{"_id":"5d1e62d88ebc3e3c8d23d0e0","slug":"156227244819-mohali-news56","type":"story","status":"publish","title_hn":"पंजाब के सरकारी अस्पतालों में जल्द पहुंचेगी रोटावायरस वैक्सीन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पंजाब के सरकारी अस्पतालों में जल्द पहुंचेगी रोटावायरस वैक्सीन
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मोहाली। पंजाब के सरकारी अस्पतालों में जल्द ही रोटावायरस वैक्सीन टीकाकरण प्रोग्राम के तहत पहुंच जाएगी। रोटावायरस एक संक्रामक कीटाणु है, जो बच्चों में दस्त का बड़ा कारण है। यह बच्चों के लिए जानलेवा भी साबित हो सकता है। वीरवार को जिला अस्पताल में डाक्टर्स व स्टाफ के लिए वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा वर्कशाप कम ट्रेनिंग प्रोग्राम करवाया गया। इसमें रोटावायरस के खतरों और बचाव पर चर्चा हुई।
वर्कशॉप के दौरान सिविल सर्जन डॉ. मनजीत सिंह ने कहा कि रोटावायरस वैक्सीन बच्चे को दस्त की बीमारी से बचाने के लिए जरूरी है। रोटावायरस कीटाणु के संक्रमण से प्रभावित बच्चे को अस्पताल में दाखिल होना पड़ सकता है और थोड़ी सी लापरवाही बच्चे की मौत का कारण भी बन सकती है। यह वैक्सीन जल्द ही टीकाकरण प्रोग्राम के तहत सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध होगी। डॉ. मनजीत सिंह ने बताया कि बच्चों में रोटावायरस के संक्रमण की शुरुआत पहले हल्के दस्त से होती है, जो लापरवाही बरतने पर गंभीर रूप से सकती है। सही इलाज न मिलने से कारण शरीर में पानी और नमक की कमी हो सकती है। जो कुछ मामलों में बच्चे की मौत का कारण भी बन सकती है।
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन द्वारा करवाई गई इस वर्कशॉप में डब्ल्यूएचओ की तरफ से डॉ. विकास, डॉ. श्रीनिवासन व डॉ. विक्रम ने रोटावायरस के बारे में विस्तार से जानकारी दी। ट्रेनिंग के दौरान डाक्टर्स, नर्सों व मेडिकल स्टाफ को इस वैक्सीन की अहमियत, प्रभाव व दवा देने के तरीकों के बारे में बताया गया। वर्कशॉप में जिला टीकाकरण अफसर डॉ. वीना जरेवाल, सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. कुलजीत कौर, डॉ. भुपिंदर सिंह, डॉ. हरप्रीत कौर, डॉ. सुरिंदर सिंह सहित सभी मेडिकल अफसरों व मेडिकल स्टाफ ने हिस्सा लिया। इस दौरान रोटावायरस के बारे में जानकारी देता एक पोस्टर भी जारी किया गया।
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हर साल 78000 बच्चों की मौत का कारण बनता है रोटावायरस
रोटावायरस को लेकर डब्ल्यूएचओ द्वारा करवाई गई वर्कशॉप में आए डॉ. विकास ने बताया कि भारत में दस्त से पीड़ित जो बच्चे अस्पतालों में लाए जाते हैं उनमें से 40 प्रतिशत रोटावायरस से संक्रमित होते हैं। देश में हर साल रोटावायरस से संक्रमित 32.7 लाख बच्चे ओपीडी में इलाज के लिए आते हैं। 8.72 लाख बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल में दाखिल करना पड़ता है। रोटावायरस भारत में हर साल 78000 बच्चों की मौत का कारण बनता है जिनमें से 59000 बच्चों की मौत दो साल से भी कम उम्र में हो जाती है। रोटावायरस संक्रमण में गंभीर दस्त के अलावा बुखार व उलटियां लग सकती हैं। इसके साथ ही बच्चे को पेट दर्द भी हो सकता है। दस्त और अन्य लक्षण तीन से सात दिन तक रहते हैं।
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वर्कशॉप के दौरान सिविल सर्जन डॉ. मनजीत सिंह ने कहा कि रोटावायरस वैक्सीन बच्चे को दस्त की बीमारी से बचाने के लिए जरूरी है। रोटावायरस कीटाणु के संक्रमण से प्रभावित बच्चे को अस्पताल में दाखिल होना पड़ सकता है और थोड़ी सी लापरवाही बच्चे की मौत का कारण भी बन सकती है। यह वैक्सीन जल्द ही टीकाकरण प्रोग्राम के तहत सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध होगी। डॉ. मनजीत सिंह ने बताया कि बच्चों में रोटावायरस के संक्रमण की शुरुआत पहले हल्के दस्त से होती है, जो लापरवाही बरतने पर गंभीर रूप से सकती है। सही इलाज न मिलने से कारण शरीर में पानी और नमक की कमी हो सकती है। जो कुछ मामलों में बच्चे की मौत का कारण भी बन सकती है।
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वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन द्वारा करवाई गई इस वर्कशॉप में डब्ल्यूएचओ की तरफ से डॉ. विकास, डॉ. श्रीनिवासन व डॉ. विक्रम ने रोटावायरस के बारे में विस्तार से जानकारी दी। ट्रेनिंग के दौरान डाक्टर्स, नर्सों व मेडिकल स्टाफ को इस वैक्सीन की अहमियत, प्रभाव व दवा देने के तरीकों के बारे में बताया गया। वर्कशॉप में जिला टीकाकरण अफसर डॉ. वीना जरेवाल, सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. कुलजीत कौर, डॉ. भुपिंदर सिंह, डॉ. हरप्रीत कौर, डॉ. सुरिंदर सिंह सहित सभी मेडिकल अफसरों व मेडिकल स्टाफ ने हिस्सा लिया। इस दौरान रोटावायरस के बारे में जानकारी देता एक पोस्टर भी जारी किया गया।
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हर साल 78000 बच्चों की मौत का कारण बनता है रोटावायरस
रोटावायरस को लेकर डब्ल्यूएचओ द्वारा करवाई गई वर्कशॉप में आए डॉ. विकास ने बताया कि भारत में दस्त से पीड़ित जो बच्चे अस्पतालों में लाए जाते हैं उनमें से 40 प्रतिशत रोटावायरस से संक्रमित होते हैं। देश में हर साल रोटावायरस से संक्रमित 32.7 लाख बच्चे ओपीडी में इलाज के लिए आते हैं। 8.72 लाख बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल में दाखिल करना पड़ता है। रोटावायरस भारत में हर साल 78000 बच्चों की मौत का कारण बनता है जिनमें से 59000 बच्चों की मौत दो साल से भी कम उम्र में हो जाती है। रोटावायरस संक्रमण में गंभीर दस्त के अलावा बुखार व उलटियां लग सकती हैं। इसके साथ ही बच्चे को पेट दर्द भी हो सकता है। दस्त और अन्य लक्षण तीन से सात दिन तक रहते हैं।