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पेड़ों का गला घोंट स्टोन सिटी बन रहा मोहाली

Wed, 12 Jun 2019 01:49 AM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Wed, 12 Jun 2019 01:49 AM IST
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पेड़ों का गला घोंट स्टोन सिटी बन रहा मोहाली
मोहाली। ली कार्बूजिए के आर्किटेक्चर की नकल कर पंजाब ने वीआईपी सिटी मोहाली बसा तो ली, पर अब यह स्टोन सिटी बनती जा रही है। विकास के नाम पर फंड की मिसयूजिंग कर हो रहे बेतरतीब काम यहां की हरियाली को निगल रहे हैं। एनजीटी की गाइडलाइंस को ठेंगा दिखा शहर के पेड़ों का गला घोंटा जा रहा है। पेड़ों की जड़ों में भरा जा रहा कंक्रीट आने वाले सालों में यहां लोगों का सांस तक लेना दूभर कर देगा।
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पंजाब सरकार ने चंडीगढ़ की तर्ज पर मोहाली को बसाया, तो ये शहर वीआईपी सिटी बन गया। यहां की हरियाली लोगों को आकर्षित करती गई और देखते ही देखते यह शहर पंजाब के नामवर एतिहासिक शहरों के साथ कदमताल करने लगा। अफसोस, सही विजन के अभाव में आज इस शहर के पेड़ों का गला घोंटा जा रहा है। विकास के नाम पर धड़ाधड़ पेवर ब्लॉक लग रहे हैं। वो भी सही हालत वाले पेवर ब्लॉक्स या टाइल्स को हटा कर। आखिर ये विकास किसका है। अर्बन ग्रीन गाइडलाइंस 2014 के मुताबिक सड़कों पर लगे पेड़ों के आसपास 6 मीटर की जगह खुली होनी चाहिए, ताकि उनकी जड़ों को सही मात्रा में हवा-पानी मिल सके, लेकिन मोहाली में ऐसा नहीं है। चंडीगढ़ नगर निगम ने पेड़ों को बचाने की पहल की है। वहीं, मोहाली नगर निगम के एसडीओ से लेकर कमिश्नर तक के पास एक हफ्ता पहले आए तूफान में गिरे पेड़ों के आंकड़े तक नहीं हैं और न ही ऐसा कोई विजन है कि जिससे गिर चुके या सूख चुके पेड़ों की जगह नए पौधे लगाए जाएं। राज्य सरकार को भी इस शहर की हरियाली की सुध लेने की फुर्सत नहीं।
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फंड्स का मिसयूज कर निगला जा रहा शहर की ग्रीनरी को
शहर की हरियाली को बचाने के लिए आवाज उठाने वाले गमाडा से रिटायर्ड एक्सईएन व समाजसेवी एनएस कलसी का कहना है कि शहर की ग्रीनरी को फंड्स का मिसयूज कर निगला जा रहा है। उनका साफ कहना है कि नगर निगम बेतरतीब पेवर ब्लॉक लगा रहा है। गमाडा द्वारा शुरुआती दौर में लगाई गई पीवीसी टाइल्स आज भी जहां बची हैं, सही हालत में हैं। पेवर ब्लॉक्स को अगर सही ढंग से लगाया जाए तो कम से कम 50 सालों तक उन्हें बदलने की जरूरत नहीं पड़ती। नगर निगम कुछ समय पहले ही लगाए गए पेवर ब्लॉक्स उखाड़ कर नए पेवर ब्लॉक लगा रहा है। इन पेवर ब्लॉक्स का न तो क्वालिटी टेस्ट हुआ और न ही इन्हें लगाने से पहले कोई सर्वे करवाया गया, जिसमें यह पता चले कि किस जगह इन्हें लगाए जाने की जरूरत है और किस जगह नहीं। बिना किसी प्लानिंग के फंड्स की मिसयूजिंग कर हो रहे ये तथाकथित विकास कार्य शहर की हरियाली को निगल रहे हैं।
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एनजीटी की गाइडलाइंस के मोहाली में नहीं हैं मायने
अर्बन ग्रीन गाइडलांइस 2014 के मुताबिक सड़क किनारे लगे पेड़ों के आसपास 6 मीटर की जगह खुली होनी चाहिए ताकि सही ग्रोथ के लिए उनकी जड़ों को हवा-पानी मिल सके। साथ ही सड़कों के किनारे लगाए जाने वाले पेड़ लंबी आयु वाले और ऊंचे होने चाहिए। इसके अलावा एवेन्यू प्लाटिंग, ग्रुप प्लाटिंग और मिक्स प्लाटिंग के निर्देश एनजीटी की तरफ से दिए गए हैं। एनजीटी के सभी निर्देशों को मोहाली में ताक पर रखा जा रहा है।
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