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लावारिस पशु सड़कों पर, लोगों की जान मुसीबत में
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मोहाली। जिले की सड़कों पर इन दिनों लावारिस पशुओं का कब्जा है। लोगों की जान मुसीबत में है, लेकिन समस्या का कोई हल निकलता नजर नहीं आ रहा। हल न निकल पाने की बड़ी वजह चुनावों का लंबा शेड्यूल भी है। आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण कई अहम प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते मे चले गए हैं। इन्हीं में कैटल पिकिंग और लालडू गोशाला में गोधन को शिफ्ट करने का प्रोजेक्ट भी शामिल है। लावारिस पशु दुर्घटनाओं की वजह बनते रहे हैं। शहर की सबसे ज्यादा व्यस्त और हाई स्पीड सड़कों पर भी लावारिस पशु चहलकदमी करते नजर आते हैं। प्रशासन चुनाव आचार संहिता का तकिया लगा चैन की नींद सो रहा है। अधिकारियों ने इस जानलेवा समस्या को लेकर चुनाव आयोग से जनसमस्या निवारण के तहत गुहार लगाने तक की जहमत नहीं उठाई है। मोहाली को हाईप्रोफाइल जिला बनाने के सरकार के दावे समय-समय पर हवा होते रहे हैं। लावारिस पशुओं की समस्या भी इन दावों की हवा निकालने के लिए बड़ी कील साबित हो रही है।
उल्लेखनीय है कि इंडस्ट्रियल एरिया की गोशाला कम कैटल प्वाइंट में जिले के लावारिस पशुओं को लाया जाता है। इस गोशाला का संचालन निगम ने एक संस्था को सौंपा था। यहां जनवरी और फरवरी के दौरान 238 गोधन की मौत के बाद संचालन कर रही संस्था गौरी शंकर सेेवा दल पर गोधन को स्लॉटर हाउस में बेचने के आरोप भी लग चुके हैं, जिनकी जांच चल रही है। इसी बीच गोशाला मेें क्षमता से ज्यादा गोधन होने का मुद्दा भी उठा था। इसके बाद लालड़ू गोशाला में गोधन शिफ्ट करने के लिए प्रपोजल तैयार किया गया था, जिसे प्रशासन ने हरी झंडी तो दी, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर और बजट को लेकर पेंच फंस गया। डीसी के निर्देश पर एडीसी जनरल साक्षी साहनी ने प्रशासन व निगम सहित संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर मोहाली गोशाला सेे प्रतिदिन सीमित संख्या में गोधन को लालड़ूू गोशाला शिफ्ट करने के आदेश भी दे दिए। अब समस्या यह है कि लालड़ू गोशाला के पास 25 एकड़ जगह तो है, लेकिन शेडों की कमी है, वहीं इसे संचालित कर रही फाउंडेशन ने शिफ्ट किए जाने वाले गोधन के चारे के लिए अतिरिक्त बजट की मांग की है। चूंकि अब चुनाव आचार संहिता लागू है और नए प्रस्ताव व बजट पास करनेे पर पूरी तरह पाबंदी है। इसका खामियाजा लोगों को सड़कों पर घूम रहे लावारिस पशुओं के आतंक का सामना कर चुकाना पड़ सकता है। जाहिर है लोगों को जिले की सड़कों के कैटल फ्री होने के लिए इंतजार करना पड़ेेगा।
उपाय तो है, पर किया नहीं गया
लावारिस पशुओं की शिफ्टिंग को लेकर हुई बैठक मेें एडीसी डी शयपाल को लालड़ू गोशाला की इंफ्रास्ट्रक्चर स्ट्रेंथ जांचने और जरूरत मुताबिक नए शेड बनवाने का जिम्मा सौंपा गया है। वहीं लालड़ू गोशाला का संचालन कर रही संस्था ने शिफ्ट किए जाने वाले गोधन के चारे के लिए बजट की मांग की है। येे बजट निगम को देना होगा। बजट पास करने के लिए निगम के हाउस की मीटिंग बुुलानी होगी। चुनाव आचार संहिता लागू होने के दौरान मीटिंग नहीं बुलाई जा सकती। लिहाजा इंफ्रास्ट्रक्चर और बजट का पेंच फंस गया है। हालांकि एक उपाय भी है। निगम कमिश्नर के पास येे पावर है कि वह निगम हाउस में प्रस्ताव मंजूर होने की संभावना केे तहत फौरी तौर पर बजट मुहैया करवा सकतेे हैं, लेकिन अभी तक निगम कमिश्नर ने अपनी इस पावर का इस्तेमाल नहीं किया है। चुनाव आचार संहिता के बहाने प्रशासन और निगम जनसमस्याओं को अनदेखा कर रहा है।
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कई जानें ले चुके हैं लावारिस पशु
खरड़ में करीब 4 माह पहले मंदिर से लौटते एक बुजुर्ग को लावारिस पशुओं ने बुरी तरह टक्कर मार-मार कर मौत के घाट उतार दिया था। करीब 9 माह पहले चंडीगढ़-मटौर रोड पर सुबह बाइक से जा रहे पति-पत्नी लावारिस पशु की टक्कर से हादसे का शिकार हो गए थे, जिसमें दोनों गंभीर रूप से घायल हुए और बाद में पति की मौत हो गई। इस हादसे की शिकार पत्नी ने मुआवजे की मांग की है। यह मामला अदालत में विचाराधीन है। करीब दो साल पहले कुंभड़ा लाइट प्वाइंट पर स्कूटी सवार एक महिला की लावारिस पशु से अचानक टकरा जाने के कारण मौत हो गई थी।
कोट्स
लावारिस पशुओं के कारण हो रही समस्या को लेकर निगम पूरी तरह गंभीर है। जिला प्रशासन ने भी इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है। मोहाली गोशाला से कैटल लोड घटाने के लिए इन्हें लालड़ू गोशाला में शिफ्ट किया जाना है। लालड़ू गोशाला को संचालित कर रही फाउंडेशन और प्रशासन में इसे लेकर बातचीत चल रही है। जल्द ही इस पर काम शुरू हो जाएगा और लोगों को लावारिस पशुओं की समस्या से निजात मिलेगी।
-रंजीव कुमार, सेक्रेटरी, नगर निगम मोहाली।
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उल्लेखनीय है कि इंडस्ट्रियल एरिया की गोशाला कम कैटल प्वाइंट में जिले के लावारिस पशुओं को लाया जाता है। इस गोशाला का संचालन निगम ने एक संस्था को सौंपा था। यहां जनवरी और फरवरी के दौरान 238 गोधन की मौत के बाद संचालन कर रही संस्था गौरी शंकर सेेवा दल पर गोधन को स्लॉटर हाउस में बेचने के आरोप भी लग चुके हैं, जिनकी जांच चल रही है। इसी बीच गोशाला मेें क्षमता से ज्यादा गोधन होने का मुद्दा भी उठा था। इसके बाद लालड़ू गोशाला में गोधन शिफ्ट करने के लिए प्रपोजल तैयार किया गया था, जिसे प्रशासन ने हरी झंडी तो दी, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर और बजट को लेकर पेंच फंस गया। डीसी के निर्देश पर एडीसी जनरल साक्षी साहनी ने प्रशासन व निगम सहित संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर मोहाली गोशाला सेे प्रतिदिन सीमित संख्या में गोधन को लालड़ूू गोशाला शिफ्ट करने के आदेश भी दे दिए। अब समस्या यह है कि लालड़ू गोशाला के पास 25 एकड़ जगह तो है, लेकिन शेडों की कमी है, वहीं इसे संचालित कर रही फाउंडेशन ने शिफ्ट किए जाने वाले गोधन के चारे के लिए अतिरिक्त बजट की मांग की है। चूंकि अब चुनाव आचार संहिता लागू है और नए प्रस्ताव व बजट पास करनेे पर पूरी तरह पाबंदी है। इसका खामियाजा लोगों को सड़कों पर घूम रहे लावारिस पशुओं के आतंक का सामना कर चुकाना पड़ सकता है। जाहिर है लोगों को जिले की सड़कों के कैटल फ्री होने के लिए इंतजार करना पड़ेेगा।
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उपाय तो है, पर किया नहीं गया
लावारिस पशुओं की शिफ्टिंग को लेकर हुई बैठक मेें एडीसी डी शयपाल को लालड़ू गोशाला की इंफ्रास्ट्रक्चर स्ट्रेंथ जांचने और जरूरत मुताबिक नए शेड बनवाने का जिम्मा सौंपा गया है। वहीं लालड़ू गोशाला का संचालन कर रही संस्था ने शिफ्ट किए जाने वाले गोधन के चारे के लिए बजट की मांग की है। येे बजट निगम को देना होगा। बजट पास करने के लिए निगम के हाउस की मीटिंग बुुलानी होगी। चुनाव आचार संहिता लागू होने के दौरान मीटिंग नहीं बुलाई जा सकती। लिहाजा इंफ्रास्ट्रक्चर और बजट का पेंच फंस गया है। हालांकि एक उपाय भी है। निगम कमिश्नर के पास येे पावर है कि वह निगम हाउस में प्रस्ताव मंजूर होने की संभावना केे तहत फौरी तौर पर बजट मुहैया करवा सकतेे हैं, लेकिन अभी तक निगम कमिश्नर ने अपनी इस पावर का इस्तेमाल नहीं किया है। चुनाव आचार संहिता के बहाने प्रशासन और निगम जनसमस्याओं को अनदेखा कर रहा है।
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कई जानें ले चुके हैं लावारिस पशु
खरड़ में करीब 4 माह पहले मंदिर से लौटते एक बुजुर्ग को लावारिस पशुओं ने बुरी तरह टक्कर मार-मार कर मौत के घाट उतार दिया था। करीब 9 माह पहले चंडीगढ़-मटौर रोड पर सुबह बाइक से जा रहे पति-पत्नी लावारिस पशु की टक्कर से हादसे का शिकार हो गए थे, जिसमें दोनों गंभीर रूप से घायल हुए और बाद में पति की मौत हो गई। इस हादसे की शिकार पत्नी ने मुआवजे की मांग की है। यह मामला अदालत में विचाराधीन है। करीब दो साल पहले कुंभड़ा लाइट प्वाइंट पर स्कूटी सवार एक महिला की लावारिस पशु से अचानक टकरा जाने के कारण मौत हो गई थी।
कोट्स
लावारिस पशुओं के कारण हो रही समस्या को लेकर निगम पूरी तरह गंभीर है। जिला प्रशासन ने भी इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है। मोहाली गोशाला से कैटल लोड घटाने के लिए इन्हें लालड़ू गोशाला में शिफ्ट किया जाना है। लालड़ू गोशाला को संचालित कर रही फाउंडेशन और प्रशासन में इसे लेकर बातचीत चल रही है। जल्द ही इस पर काम शुरू हो जाएगा और लोगों को लावारिस पशुओं की समस्या से निजात मिलेगी।
-रंजीव कुमार, सेक्रेटरी, नगर निगम मोहाली।