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108 एंबुलेंस कर्मचारियों ने अधिकारियों पर लगाया धक्केशाही का आरोप
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जीरकपुर। शहर में चल रही 108 एंबुलेंस दफ्तर के 6-7 कर्मचारियों ने विभाग के अधिकारियों पर धक्के शाही करने का आरोप लगाया है। साथ ही एक एंबुलेंस चालक को फोन पर गाली देने की शिकायत भी पुलिस को दी है। एंबुलेंस कर्मचारियों में सतनाम सिंह, हरजिंदर, सिंह, बलविंदर सिंह, स्वर्ण सिंह, प्रभदीप सिंह, मनप्रीत सिंह, दलजीत सिंह, अंग्रेज सिंह ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि पंजाब सरकार की ओर से 108 एंबुलेंस का काम ठेके पर दिया हुआ है। इसमें बहुत बड़े पैमाने पर घपला चल रहा है। जब हमने घपले के बारे में आवाज उठानी शुरू की तो ठेकेदार के सहयोगियों ने उनके साथ धक्केशाही करनी शुरू कर दी और उन्हें नौकरी से निकालने की धमकियां देने लगे। उन्होंने बताया कि जीरकपुर में स्थित 180 एंबुलेंस दफ्तर में उन्हें निकालकर नए कर्मचारी रखे जा रहे हैं, जबकि उन्हें यहां नौकरी करते हुए 10 साल से ज्यादा हो गए हैं। वहीं, एंबुलेंस चालक हरजिंदर सिंह ने आरोप लगाया कि विभाग के अधिकारी पंकज ने फोन पर उसे गालियां निकाली हैं। इसकी रिकॉर्डिंग उसके पास है और इसकी शिकायत जीरकपुर थाने में दे दी है।
ट्रेनिंग पर रख रहे 10वीं और 12 वीं पास कर्मचारी
एंबुलेंस चालकों ने बताया कि जिन नए कर्मचारियों को रखा जा रहा है, उनके पास अनुभव नहीं है। महज 40 दिन की ट्रेनिंग देकर उन्हें नियुक्त किया जा रहा है। वह 10वीं और 12वीं पास हैं। जबकि हम फार्मासिस्ट हैं, हम मेडिकल लाइन से हैं और हमारे पास 10 साल का पुराना अनुभव भी है, जैसे कि स्टाफ की केयर करना और ऑक्सीजन की ऑपरेटिंग करना, यह सब एंबुलेंस में ही करना पड़ता है, जो कि नए स्टाफ के लिए मुश्किल है। वहीं उन्हें समय पर वेतन भी नहीं मिल रहा है।
अभी मामला विचाराधीन, नौकरी से नहीं निकाला
एंबुलेंस कर्मचारियों का विभाग के अधिकारियों के साथ यह विवाद अभी चल रहा है और अभी किसी कर्मचारी को नौकरी से नहीं निकाला गया है। इसमें दोनों पक्षों का क्या कहना है इस पर जानकारी ली जा रही है। अभी मामला विचाराधीन है और यह विभाग का अंदरूनी विवाद है कुछ दिनों में इसको हल कर लिया जाएगा। - साकेत बैनर्जी, प्रोजेक्ट हेड।
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ट्रेनिंग पर रख रहे 10वीं और 12 वीं पास कर्मचारी
एंबुलेंस चालकों ने बताया कि जिन नए कर्मचारियों को रखा जा रहा है, उनके पास अनुभव नहीं है। महज 40 दिन की ट्रेनिंग देकर उन्हें नियुक्त किया जा रहा है। वह 10वीं और 12वीं पास हैं। जबकि हम फार्मासिस्ट हैं, हम मेडिकल लाइन से हैं और हमारे पास 10 साल का पुराना अनुभव भी है, जैसे कि स्टाफ की केयर करना और ऑक्सीजन की ऑपरेटिंग करना, यह सब एंबुलेंस में ही करना पड़ता है, जो कि नए स्टाफ के लिए मुश्किल है। वहीं उन्हें समय पर वेतन भी नहीं मिल रहा है।
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अभी मामला विचाराधीन, नौकरी से नहीं निकाला
एंबुलेंस कर्मचारियों का विभाग के अधिकारियों के साथ यह विवाद अभी चल रहा है और अभी किसी कर्मचारी को नौकरी से नहीं निकाला गया है। इसमें दोनों पक्षों का क्या कहना है इस पर जानकारी ली जा रही है। अभी मामला विचाराधीन है और यह विभाग का अंदरूनी विवाद है कुछ दिनों में इसको हल कर लिया जाएगा। - साकेत बैनर्जी, प्रोजेक्ट हेड।
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