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जीरकपुर छाई स्मॉग की मोटी चादर, जीरकपुर के आबो हवा खराब
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जीरकपुर। इस साल पहली बार प्रदूषण इतनी खतरनाक स्थिति में पहुंचा है। पिछले कुछ दिनों में जीरकपुर क्षेत्र के बिशनपुरा गांव के डंपिंग ग्राउंड में कचरे को समाप्त करने के लिए आग लगाई जा रही है, ताकि चुनावी सीजन में कचरे की बदबू मुद्दा न बन सके। वहीं किसानों द्वारा पाबंदी के बावजूद गेहूं के खेतों में बची पराली को शार्ट सर्किट का बहाना बना लगातार आग लगाई जा रही है। जिसके चलते जीरकपुर में सोमवार को हवा की गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में रही। शहर में प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। सोमवार को स्मॉग की चादर बनी हुई थी।
जीरकपुर में एक निजी वायु प्रदूषण यंत्र के दर्ज आंकड़ों के मुताबिक, समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 999 दर्ज किया गया जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी दर्शाता है। जबकि फ्लैट के अंदर बनाई गई वीडियो के मुताबिक घर के अंदर का लेबल 764 एक्यूआई दर्ज किया गया। शहर में अलग-अलग जगहों पर हवा की गुणवत्ता ‘अत्यंत गंभीर’ श्रेणी की महसूस करने को मिली। शहर में अचानक से प्रदूषण स्तर खतरनाक स्थिति में पहुंचने की वजह किसानों द्वारा खेतों में जलाई जाने वाली पराली व डंपिंग ग्राउंड की आग को माना जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक किसानों द्वारा पराली जलाने की गतिविधि तेजी से बढ़ गई है। इसका खामियाजा शहर के लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
एक नजर आंकड़ों पर
एक्यूआई का स्तर 0 से 50 के बीच ‘अच्छा’ माना जाता है। 51 से 100 के बीच यह ‘संतोषजनक’ स्तर पर होता है और 101 से 200 के बीच इसे ‘मध्यम’ श्रेणी में रखा जाता है। हवा की गुणवत्ता का सूचकांक 201 से 300 के बीच ‘खराब’, 301 से 400 के बीच ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 के बीच ‘अत्यंत गंभीर’ स्तर पर माना जाता है जबकि शहर में एक्यूआई लेवल 999 तक पहुंच गया था।
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क्या कहते हैं अधिकारी
ढकोली एसएमओ पोमी चतरथ ने कि रविवार का दिन होने की वजह से ऐसा कोई मरीज नहीं आया जिसे सांस लेने में तकलीफ हो लेकिन क्षेत्र से गले के इंफेक्शन के मरीज अमूमन आम हैं। अस्पताल में अकसर लोक गले के इंफेक्शन संबधित मरीज अधिक हैं जिसका कारण हवा में प्रदूषण की मात्रा अधिक होना हो सकता है। इस संबंध में जीरकपुर क्षेत्र के एक्सईएन पॉल्यूशन बोर्ड एके शर्मा से बात करने की कोशिश की गई तो उनका मोबाइल फोन स्विच ऑफ था।
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जीरकपुर में एक निजी वायु प्रदूषण यंत्र के दर्ज आंकड़ों के मुताबिक, समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 999 दर्ज किया गया जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी दर्शाता है। जबकि फ्लैट के अंदर बनाई गई वीडियो के मुताबिक घर के अंदर का लेबल 764 एक्यूआई दर्ज किया गया। शहर में अलग-अलग जगहों पर हवा की गुणवत्ता ‘अत्यंत गंभीर’ श्रेणी की महसूस करने को मिली। शहर में अचानक से प्रदूषण स्तर खतरनाक स्थिति में पहुंचने की वजह किसानों द्वारा खेतों में जलाई जाने वाली पराली व डंपिंग ग्राउंड की आग को माना जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक किसानों द्वारा पराली जलाने की गतिविधि तेजी से बढ़ गई है। इसका खामियाजा शहर के लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
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एक नजर आंकड़ों पर
एक्यूआई का स्तर 0 से 50 के बीच ‘अच्छा’ माना जाता है। 51 से 100 के बीच यह ‘संतोषजनक’ स्तर पर होता है और 101 से 200 के बीच इसे ‘मध्यम’ श्रेणी में रखा जाता है। हवा की गुणवत्ता का सूचकांक 201 से 300 के बीच ‘खराब’, 301 से 400 के बीच ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 के बीच ‘अत्यंत गंभीर’ स्तर पर माना जाता है जबकि शहर में एक्यूआई लेवल 999 तक पहुंच गया था।
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क्या कहते हैं अधिकारी
ढकोली एसएमओ पोमी चतरथ ने कि रविवार का दिन होने की वजह से ऐसा कोई मरीज नहीं आया जिसे सांस लेने में तकलीफ हो लेकिन क्षेत्र से गले के इंफेक्शन के मरीज अमूमन आम हैं। अस्पताल में अकसर लोक गले के इंफेक्शन संबधित मरीज अधिक हैं जिसका कारण हवा में प्रदूषण की मात्रा अधिक होना हो सकता है। इस संबंध में जीरकपुर क्षेत्र के एक्सईएन पॉल्यूशन बोर्ड एके शर्मा से बात करने की कोशिश की गई तो उनका मोबाइल फोन स्विच ऑफ था।