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बदलते मौसम ने दी गर्मी से राहत पर फसलों को नुकसान

Thu, 18 Apr 2019 01:11 AM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Thu, 18 Apr 2019 01:11 AM IST
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बदलते मौसम ने दी गर्मी से राहत पर फसलों को नुकसान
मोहाली। बुधवार को तेज हवाओं के साथ मोहाली सहित ट्राइसिटी में बारिश हुई और कई जगहों पर ओले भी पड़े, जिससे तापमान में 5 से 8 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। वेस्टर्न डिस्टरबेंस के चलते मौसम में आई इस तब्दीली से जहां लोगों को गर्मी से राहत मिली, वहीं किसानों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं।
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मौसम विभाग के अनुसार वीरवार से अगले एक हफ्ते तक मौसम सामान्य बना रहेगा। हालांकि आने वाले दिनों में मौसम में अनिश्चित बदलाव की संभावनाएं बनी हुईं हैं। मौसम विभाग के डायरेक्टर सुरिंदर पाल ने किसानों को सलाह दी कि मौसम को लेकर जारी की जा रही संभावनाओं को देखते हुए वह कटाई को चरणबद्ध ढंग से शुरू कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसान कटाई के बाद फसलों को तुरंत संभालने का इंतजाम करें।
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जलभराव से हुई परेशानी
पतझड़ के मौसम में तेज हवाओं के साथ बारिश और ओलावृष्टि ने शहर के कई इलाकों में जलभराव के हालात पैदा कर दिए। शहर की कई मार्केट और पार्कों में पानी की निकासी न होने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। बुधवार को शहर के अधिकतर पार्क बच्चों के खेलने लायक नहीं थे।
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गेहूं की फसल हो नुकसान
कृषि विशेषज्ञ बीएस सोहल के अनुसार वेस्टर्न डिस्टरबेंस के चलते मौसम में आ रहा बदलाव न सिर्फ गेहूं की फसल के लिए बल्कि सब्जियों व अन्य फसलों के लिए भी नुकसानदायक है। गेहूं की फसल कटाई के लिए तैयार है, ऐसे में बारिश और ओलों से उसे सबसे ज्यादा नुकसान होगा। फसल खराब होने का असर आने वाले दिनों में आम लोगों पर भी पड़ सकता है।


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क्या है वेस्टर्न डिस्टरबेंस
वेस्टर्न डिस्टरबेंस यानि पश्चिमी विक्षोभ, एक तरह का उष्णकटिबंधीय तूफान है जो मेडिटरेनियन रीजन से शुरू होता है। धरती के ठीक बीचोंबीच जहां से कर्क रेखा और मकर रेखा गुजरती है, उस क्षेत्र को उष्णकटिबंधीय क्षेत्र कहते हैं। यह हिस्सा सूर्य की किरणों से सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। धरती के सबसे गर्म हिस्से भी इसी कटिबंध में आते हैं। जब इस पट्टी में बाहर से आने वाली सर्द हवाएं पहुंचती हैं तो उष्णकटिबंधीय तूफान आते हैं। ये तूफान भूमध्य सागर के उस हिस्से में पैदा होते हैं जो यूरोप और अफ्रीका महाद्वीप के बीच में पड़ता है। इसी हिस्से को मेडिटरेनियन रीजन कहा जाता है। मेडिटरेनियन रीजन से पैदा होने वाला तूफान काला सागर और कैस्पियन समुद्र से गुजरता हुआ भारी मात्रा में नमी लेकर भारत पहुंचता है। इसका सबसे ज्यादा असर उत्तर भारत, पाकिस्तान और नेपाल में होता है।
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