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आम बजट ने जहां खुशी दी, वहीं रेल बजट को लेकर रेल यात्री मायूस दिखे
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- आम बजट ने जहां खुशी दी, वहीं रेल बजट को लेकर रेल यात्री दिखे मायूस
दीपक शाही
जीरकपुर। पीएम मोदी के कार्यकाल का शुक्रवार को आखिरी और अंतरिम बजट पेश किया गया। आम बजट से जहां मिडिल क्लास खुश थी, वहीं रेल बजट ने उन्हें मायूस किया। देखा जाए तो चंडीगढ़ की झोली में रेलवे के पुराने प्रोजेक्टों के अलावा पीयूष गोयल ने नया कुछ भी नहीं दिया। इस बजट में दो नए प्लेटफार्म (7 और 8), मल्टी फंक्शनल कांप्लेक्स, माडर्न सिग्नल इक्यूपमेंट फैक्ट्री का जिक्र किया गया है। अब सवाल ये है कि इन तीनों प्रोजेक्टों में नया क्या है? वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन को लेकर पहले से दो प्लेटफार्म और मल्टी फंक्शनल कांप्लेक्स बनाया जाना है। वहीं माडर्न सिग्नल इक्यूूपमेंट फैक्ट्री बनाने की घोषणा पूर्व रेल मंत्री पवन बंसल ने की थी। रेल यात्री बोले कि रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं, ट्रेनों और स्टेशन पर यात्रियों की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए।
मल्टी फंक्शनल कांप्लेक्स की बात पुरानी, बनेगा कब
देशभर के चुनिंदा ए क्लास रेलवे स्टेशनों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कुछ रेलवे स्टेशनों पर एमएफसी का निर्माण कराया गया था, लेकिन सरकार बदलने के बाद बाकी के रेलवे स्टेशनों पर प्रोजेक्ट अधूरे रह गए थे। बता दें कि एसईसीआर जोन के ए क्लास स्टेशनों पर इसकी शुरुआत रेलवे बोर्ड ने 2014 में की थी, तब से सुना जा रहा है, अब सही मायने में इस प्रोजेक्ट पर चंडीगढ़ में काम शुरू हो जाए तो रेलवे स्टेशन पर बनने वाले मल्टी फंक्शनल कांप्लेक्स में रेस्टोरेंट, डोरमैट्री, फूड प्लाजा, काफी हाउस, साइबर कैफे, मेडिकल स्टोर के साथ तमाम जरूरत के सामान की दुकानें होंगी। अगर यह कांप्लेक्स बन जाए तो इसका फायदा न केवल रेल यात्रियों को मिलेगा, बल्कि रेलवे स्टेशन के आसपास के लोग भी इसका लाभ उठा सकेंगे।
एक भी नई ट्रेन नहीं मिली
इस बजट सत्र में चंडीगढ़ की झोली एक भी ट्रेन नहीं मिली। जो प्रस्तावित पुरानी ट्रेनें हैं, उनका क्या हुआ इसपर भी कोई बात नहीं हुई। सबसे बड़ी घोषणों की बात करें तो सिर्फ रेलवे को पूरी तरह से ब्रॉडगेज करने, मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग को खत्म करने की घोषणा सामने आई है। जिसका पिछले बजट में भी सरकार राग अलाप रही थी।
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ये हैं अधूरे प्रोजेक्ट
- नई दिल्ली से चंडीगढ़ के बीच तेजस
- चंडीगढ़ से बद्दी रेल मार्ग
- युमनानगर पंचकूला रेल लाइन
- चंडीगढ़ से जगाधरी के लिए सीधी रेलवे लाइन
- वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन जैसे प्रोजेक्ट पर काम शुरू होना
- सीसीटीवी कैमरे भी नहीं लगाए गए
2013 के बाद बजट में चंडीगढ़ को नहीं मिली ट्रेन
2013 के रेल बजट में मल्लिकार्जुन खड़गे ने अंतरिम बजट में चंडीगढ़ को दो ट्रेनें दी थीं। इनमें एक चंडीगढ़ जयपुर इंटरसिटी रोजाना और चंडीगढ़ रामनगर वीकली। इसके बाद से चंडीगढ़ को कोई ट्रेन नहीं मिली। इससे पहले पवन बंसल ने 2012 के रेल बजट में चंडीगढ़ को 12 ट्रेनें दी थीं। इससे पहले चंडीगढ़ से मात्र 15 ट्रेनों के पेयर चल रहे थे। इस समय चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन से 35 ट्रेनों के पेयर चल रहे हैं।
क्या कहते हैं यात्री
आज बजट ठीक है, लेकिन रेल बजट से निराशा हुई है। यात्रियों की सुविधाओं पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया गया है। ट्रेनों में यात्रियों को लूटा जा रहा है और चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन के सभी सीसीटीवी कैमरे खराब पड़े हैं। पहले ट्रेेनों में सीसीटीवी कैमरा लगाने की बात की गई थी। यहां रेलवे स्टेशन का ये हाल है। 2013 के बाद ट्रेनों में इजाफा नहीं हुआ है।
- जाकिर, निवासी चंडीगढ़
आम लोगों के लिए आम बजट अच्छा है, लेकिन रेल बजट से यात्री मायूस हैं। चंडीगढ़ की झोली बिल्कुल ही खाली रह गई। चंडीगढ़ से आगरा और लखनऊ के बीच ट्रेन बढ़ाई जानी चाहिए। क्योंकि यात्रियों के अनुपात में ट्रेनों की संख्या कम है। सुरक्षा व्यवस्था पर फोकस करना चाहिए।
- राजकुमार, निवासी पंचकूला
आम बजट मिडिल क्लास लोगों के लिए अच्छा है। रेल बजट में चंडीगढ़ को कुछ नहीं मिला। अभी पुराने प्रोजेक्ट भी अधूरे पड़े हैं। सेमी हाई स्पीड ट्रेन का सपना लोगों को कई सालों से दिखाया जा रहा है, लेकिन अबतक पूरा नहीं हुआ। कोई नई ट्रेन की सौगात भी इस बजट में चंडीगढ़ को नहीं मिली।
- आकाश, निवासी पंचकूला
गरीबों और मध्यम वर्गीय लोगों के लिए आम बजट काफी अच्छा है, उसी तरह रेल बजट में भी चंडीगढ़ को नया सौगात देना चाहिए था। क्योंकि चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन एवन क्लास रेलवे स्टेशन की श्रेणी में आता है।
- रामनिवास तांतिया, निवासी चंडीगढ़
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दीपक शाही
जीरकपुर। पीएम मोदी के कार्यकाल का शुक्रवार को आखिरी और अंतरिम बजट पेश किया गया। आम बजट से जहां मिडिल क्लास खुश थी, वहीं रेल बजट ने उन्हें मायूस किया। देखा जाए तो चंडीगढ़ की झोली में रेलवे के पुराने प्रोजेक्टों के अलावा पीयूष गोयल ने नया कुछ भी नहीं दिया। इस बजट में दो नए प्लेटफार्म (7 और 8), मल्टी फंक्शनल कांप्लेक्स, माडर्न सिग्नल इक्यूपमेंट फैक्ट्री का जिक्र किया गया है। अब सवाल ये है कि इन तीनों प्रोजेक्टों में नया क्या है? वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन को लेकर पहले से दो प्लेटफार्म और मल्टी फंक्शनल कांप्लेक्स बनाया जाना है। वहीं माडर्न सिग्नल इक्यूूपमेंट फैक्ट्री बनाने की घोषणा पूर्व रेल मंत्री पवन बंसल ने की थी। रेल यात्री बोले कि रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं, ट्रेनों और स्टेशन पर यात्रियों की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए।
मल्टी फंक्शनल कांप्लेक्स की बात पुरानी, बनेगा कब
देशभर के चुनिंदा ए क्लास रेलवे स्टेशनों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कुछ रेलवे स्टेशनों पर एमएफसी का निर्माण कराया गया था, लेकिन सरकार बदलने के बाद बाकी के रेलवे स्टेशनों पर प्रोजेक्ट अधूरे रह गए थे। बता दें कि एसईसीआर जोन के ए क्लास स्टेशनों पर इसकी शुरुआत रेलवे बोर्ड ने 2014 में की थी, तब से सुना जा रहा है, अब सही मायने में इस प्रोजेक्ट पर चंडीगढ़ में काम शुरू हो जाए तो रेलवे स्टेशन पर बनने वाले मल्टी फंक्शनल कांप्लेक्स में रेस्टोरेंट, डोरमैट्री, फूड प्लाजा, काफी हाउस, साइबर कैफे, मेडिकल स्टोर के साथ तमाम जरूरत के सामान की दुकानें होंगी। अगर यह कांप्लेक्स बन जाए तो इसका फायदा न केवल रेल यात्रियों को मिलेगा, बल्कि रेलवे स्टेशन के आसपास के लोग भी इसका लाभ उठा सकेंगे।
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एक भी नई ट्रेन नहीं मिली
इस बजट सत्र में चंडीगढ़ की झोली एक भी ट्रेन नहीं मिली। जो प्रस्तावित पुरानी ट्रेनें हैं, उनका क्या हुआ इसपर भी कोई बात नहीं हुई। सबसे बड़ी घोषणों की बात करें तो सिर्फ रेलवे को पूरी तरह से ब्रॉडगेज करने, मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग को खत्म करने की घोषणा सामने आई है। जिसका पिछले बजट में भी सरकार राग अलाप रही थी।
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ये हैं अधूरे प्रोजेक्ट
- नई दिल्ली से चंडीगढ़ के बीच तेजस
- चंडीगढ़ से बद्दी रेल मार्ग
- युमनानगर पंचकूला रेल लाइन
- चंडीगढ़ से जगाधरी के लिए सीधी रेलवे लाइन
- वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन जैसे प्रोजेक्ट पर काम शुरू होना
- सीसीटीवी कैमरे भी नहीं लगाए गए
2013 के बाद बजट में चंडीगढ़ को नहीं मिली ट्रेन
2013 के रेल बजट में मल्लिकार्जुन खड़गे ने अंतरिम बजट में चंडीगढ़ को दो ट्रेनें दी थीं। इनमें एक चंडीगढ़ जयपुर इंटरसिटी रोजाना और चंडीगढ़ रामनगर वीकली। इसके बाद से चंडीगढ़ को कोई ट्रेन नहीं मिली। इससे पहले पवन बंसल ने 2012 के रेल बजट में चंडीगढ़ को 12 ट्रेनें दी थीं। इससे पहले चंडीगढ़ से मात्र 15 ट्रेनों के पेयर चल रहे थे। इस समय चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन से 35 ट्रेनों के पेयर चल रहे हैं।
क्या कहते हैं यात्री
आज बजट ठीक है, लेकिन रेल बजट से निराशा हुई है। यात्रियों की सुविधाओं पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया गया है। ट्रेनों में यात्रियों को लूटा जा रहा है और चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन के सभी सीसीटीवी कैमरे खराब पड़े हैं। पहले ट्रेेनों में सीसीटीवी कैमरा लगाने की बात की गई थी। यहां रेलवे स्टेशन का ये हाल है। 2013 के बाद ट्रेनों में इजाफा नहीं हुआ है।
- जाकिर, निवासी चंडीगढ़
आम लोगों के लिए आम बजट अच्छा है, लेकिन रेल बजट से यात्री मायूस हैं। चंडीगढ़ की झोली बिल्कुल ही खाली रह गई। चंडीगढ़ से आगरा और लखनऊ के बीच ट्रेन बढ़ाई जानी चाहिए। क्योंकि यात्रियों के अनुपात में ट्रेनों की संख्या कम है। सुरक्षा व्यवस्था पर फोकस करना चाहिए।
- राजकुमार, निवासी पंचकूला
आम बजट मिडिल क्लास लोगों के लिए अच्छा है। रेल बजट में चंडीगढ़ को कुछ नहीं मिला। अभी पुराने प्रोजेक्ट भी अधूरे पड़े हैं। सेमी हाई स्पीड ट्रेन का सपना लोगों को कई सालों से दिखाया जा रहा है, लेकिन अबतक पूरा नहीं हुआ। कोई नई ट्रेन की सौगात भी इस बजट में चंडीगढ़ को नहीं मिली।
- आकाश, निवासी पंचकूला
गरीबों और मध्यम वर्गीय लोगों के लिए आम बजट काफी अच्छा है, उसी तरह रेल बजट में भी चंडीगढ़ को नया सौगात देना चाहिए था। क्योंकि चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन एवन क्लास रेलवे स्टेशन की श्रेणी में आता है।
- रामनिवास तांतिया, निवासी चंडीगढ़