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मोहाली आरटीए दफ्तर के स्थायी व अस्थायी 10 मुलाजिम पुलिस के रडार पर, चारों आरोपियों ने खोले राज
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मोहाली। सेक्टर-76 स्थित आरटीए दफ्तर पर अब जिला पुलिस की नजर लग गई है। किसी भी समय पुलिस वहां पर दस्तक दे सकती है। इतना ही नहीं वहां पर काम करने वाली दो महिलाओं समेत दस मुलाजिम भी पुलिस के रडार पर आ गए हैं। क्योंकि आम लोगों से आरसी और लाइसेंस बनाने का काम तुरंत करवाने के नाम पर मोटी वसूलने के आरोप में पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए चार एजेंटों से पूछताछ में पुलिस के हाथ कई अहम सुराग लगे हैं। आरोपियों को बुधवार अदालत में पेश कर यहां दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत की तरफ से उन्हें दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक मंगलवार को गिरफ्तार किए गए चार आरोपियों तरनजीत सिंह , मनीश कुमार, हरजिंदर सिह और यशपाल शर्मा से पूछताछ में पुलिस को आरटीए दफ्तर के कई सुराग हाथ लगे हैं। आरोपियों ने वहां पर काम करने वाले दस मुलाजिमों के नाम बताए हैं, जिनमें में दो महिलाओं का जिक्र भी है। आरोपियों ने बताया है कि वह विभाग के स्थायी और अस्थायी कर्मचारियों के जरिये पैसे लेकर आरसी और लाइसेंस बनवाते थे। यह धंधा कई सालों से चल रहा था। उधर पुलिस भी इस बात से हैरान है कि डिप्टी कमिश्नर दफ्तर के पास चल रहे आरटीए दफ्तर में ऐसे में भी मुलाजिम रखे गए हैं, जो कि विभाग के पक्के मुलाजिम नहीं हैं। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि अस्थायी मुलाजिमों को आरटीए दफ्तर से जो महीने की सैलरी दी जाती थी, कहां से दी जाती है।
रोजाना एक एजेंट का एक लाख तक का था कारोबार
जानकारी के मुताबिक जैसे लोगों में चंडीगढ़ के नंबर को लेकर क्रेज है। वैसे ही पंजाब के लोगों में मोहाली का नंबर अपनी गाड़ियों पर लगाने का क्रेज है। इसके लिए लोग मोटे पैसे खर्च करते हैं। भले ही यह काम विभाग ऑनलाइन करता है, लेकिन पता चला है कि विभाग के मुुलाजिम इसमें भी अहम भूमिका निभाते हैं। अपनी मनपसंद का नंबर लेना हो, लाइसेंस या गाड़ी ट्रांसफर करनी हो यह सब मुलाजिमों के हाथ में था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक एक एजेंट दिन में करीब एक लाख रुपये तक का धंधा करके जाता था। इसके अलावा आरटीए से जुड़े कई अन्य काम भी उक्त आरोपी करते हैं।
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आरोपियों पर धारा-467 गलत लगाई गई
उधर पुलिस ने चारों आरोपियों को बुधवार को अदालत में पेश कर इनका पांच दिन का रिमांड लेेने के लिए याचिका दायर की। पुलिस का कहना था कि इनके संपर्क वाले मुलाजिमों से पूछताछ करनी है। ऐेसे में उन्हें और रिमांड की जरूरत है। जबकि बचाव पक्ष के वकील ने पुलिस द्वारा केस में लगाई गई आईपीसी की धारा 467 का विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह धारा गलत लगाई है। क्योंकि आरोपियों से कोई फर्जी दस्तावेज बरामद नहीं हुआ है। सरकारी वकील ने भी माना की धारा गलत लगाई है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद आरोपियों को दो दिन पुलिस रिमांड पर भेज दिया। इस संबंध में थाना सोहाना के प्रमुख ने बताया कि इस मामले में पुलिस के हाथ कुछ सबूत लगे हैं। जिसका बाद में खुलासा किया जाएगा।
बता दें कि आरोपियों को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया था। उनके पास से करीब 100 आरसी, लाइसेंस और इनसे संबंधित फाइल, मोबाइल औ लैपटॉप रबरामद हुए थे।
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पुलिस सूत्रों के मुताबिक मंगलवार को गिरफ्तार किए गए चार आरोपियों तरनजीत सिंह , मनीश कुमार, हरजिंदर सिह और यशपाल शर्मा से पूछताछ में पुलिस को आरटीए दफ्तर के कई सुराग हाथ लगे हैं। आरोपियों ने वहां पर काम करने वाले दस मुलाजिमों के नाम बताए हैं, जिनमें में दो महिलाओं का जिक्र भी है। आरोपियों ने बताया है कि वह विभाग के स्थायी और अस्थायी कर्मचारियों के जरिये पैसे लेकर आरसी और लाइसेंस बनवाते थे। यह धंधा कई सालों से चल रहा था। उधर पुलिस भी इस बात से हैरान है कि डिप्टी कमिश्नर दफ्तर के पास चल रहे आरटीए दफ्तर में ऐसे में भी मुलाजिम रखे गए हैं, जो कि विभाग के पक्के मुलाजिम नहीं हैं। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि अस्थायी मुलाजिमों को आरटीए दफ्तर से जो महीने की सैलरी दी जाती थी, कहां से दी जाती है।
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रोजाना एक एजेंट का एक लाख तक का था कारोबार
जानकारी के मुताबिक जैसे लोगों में चंडीगढ़ के नंबर को लेकर क्रेज है। वैसे ही पंजाब के लोगों में मोहाली का नंबर अपनी गाड़ियों पर लगाने का क्रेज है। इसके लिए लोग मोटे पैसे खर्च करते हैं। भले ही यह काम विभाग ऑनलाइन करता है, लेकिन पता चला है कि विभाग के मुुलाजिम इसमें भी अहम भूमिका निभाते हैं। अपनी मनपसंद का नंबर लेना हो, लाइसेंस या गाड़ी ट्रांसफर करनी हो यह सब मुलाजिमों के हाथ में था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक एक एजेंट दिन में करीब एक लाख रुपये तक का धंधा करके जाता था। इसके अलावा आरटीए से जुड़े कई अन्य काम भी उक्त आरोपी करते हैं।
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आरोपियों पर धारा-467 गलत लगाई गई
उधर पुलिस ने चारों आरोपियों को बुधवार को अदालत में पेश कर इनका पांच दिन का रिमांड लेेने के लिए याचिका दायर की। पुलिस का कहना था कि इनके संपर्क वाले मुलाजिमों से पूछताछ करनी है। ऐेसे में उन्हें और रिमांड की जरूरत है। जबकि बचाव पक्ष के वकील ने पुलिस द्वारा केस में लगाई गई आईपीसी की धारा 467 का विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह धारा गलत लगाई है। क्योंकि आरोपियों से कोई फर्जी दस्तावेज बरामद नहीं हुआ है। सरकारी वकील ने भी माना की धारा गलत लगाई है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद आरोपियों को दो दिन पुलिस रिमांड पर भेज दिया। इस संबंध में थाना सोहाना के प्रमुख ने बताया कि इस मामले में पुलिस के हाथ कुछ सबूत लगे हैं। जिसका बाद में खुलासा किया जाएगा।
बता दें कि आरोपियों को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया था। उनके पास से करीब 100 आरसी, लाइसेंस और इनसे संबंधित फाइल, मोबाइल औ लैपटॉप रबरामद हुए थे।