{"_id":"7aedee33059e9f970cd25f50e17c0271","slug":"manrega-punjab-govt-centre-seeks-report-6-december","type":"story","status":"publish","title_hn":"मनरेगा का पैसा खर्च न करने पर केंद्र ने मांगा हिसाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मनरेगा का पैसा खर्च न करने पर केंद्र ने मांगा हिसाब
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 03 Dec 2013 11:51 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंजाब सरकार प्रदेश में फसली विविधता, सेम समस्या सहित कई अन्य मुद्दों के लिए केंद्र से फंडों की मांग करती रही है। दूसरी ओर केंद्र द्वारा राज्य सरकार को जारी फंडों को सुनियोजित तरीके से खर्च कर पाने में विफल साबित हो रही है।
महात्मा गांधी ग्रामीण विकास योजना (मनरेगा) के तहत केंद्र द्वारा जारी राशि को अब तक पंजाब सरकार खर्च नहीं कर पाई है।
राज्य सरकार द्वारा तय 400 करोड़ के बजट का 50 फीसदी राशि अब तक खर्च नहीं हो सका है। इस बड़ी योजना के तहत राशि के खर्च न होने पर केंद्र ने पंजाब सरकार से हिसाब तलब किया है।
सूत्रों के अनुसार संयुक्त सचिव (मनरेगा) अपराजिता सारंगी द्वारा ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग के प्रमुख सचिव को मिले पत्र के अनुसार 6 दिसंबर तक जवाब मांगा गया है।
विज्ञापन
मनरेगा सॉफ्टवेयर के तहत विश्लेषण करने के बाद सामने आए तथ्यों के बाद केंद्र ने पत्र लिखकर राज्य सरकार से पूछा है कि इस योजना के तहत दी गई राशि का एक बड़ा हिस्सा बिना खर्च के क्यों पड़ा है।
सूत्रों के अनुसार पंजाब ने 2013-14 के फ्लैगशिप योजनाओं में मनरेगा का चार सौ करोड़ का बजट तैयार किया था। इसके अनुसार केंद्र का पिछले वर्ष का हिस्सा 16.80 करोड़ और राज्य सरकार का 1.87 करोड़ रुपये का हिस्सा बकाया पड़ा हुआ है।
चालू वित्तीय वर्ष 2013-2014 में राज्य सरकार ने 400 करोड़ खर्च करने का लक्ष्य तय किया था। सितंबर 2013 तक राज्य सरकार को केंद्र से 73.80 करोड़ रुपये मिले हैं जबकि राज्य के वित्त विभाग ने केवल 8.20 करोड़ ही जारी किए हैं।
पंजाब सरकार द्वारा मनरेगा साइट पर जो आंकड़े चढ़ाए गए हैं उसके अनुसार 124 करोड़ रुपये अलाट किए दिखाए गए हैं, जिसमें से 31.95 करोड़ रुपये बिना खर्च किए बचे हैं।
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार अगले चार माह में भी पचास फीसदी लक्ष्य भी पूरा कर लिया जाए तो वह काफी होगा।
खर्च न करने पर रुक जाता है पैसा
मनरेगा का पैसा 60 फीसदी दिहाड़ी और 40 फीसदी मैटीरियल पर खर्च होता है। दिहाड़ी का 90 फीसदी पैसा केंद्र सरकार देती है। राज्य सरकारों द्वारा पैसा खर्च न किए जाने पर पुराना पैसा भी रुक जाता है। पंजाब में मनरेगा की दिहाड़ी 184 रुपये प्रतिदिन है।
विज्ञापन
महात्मा गांधी ग्रामीण विकास योजना (मनरेगा) के तहत केंद्र द्वारा जारी राशि को अब तक पंजाब सरकार खर्च नहीं कर पाई है।
राज्य सरकार द्वारा तय 400 करोड़ के बजट का 50 फीसदी राशि अब तक खर्च नहीं हो सका है। इस बड़ी योजना के तहत राशि के खर्च न होने पर केंद्र ने पंजाब सरकार से हिसाब तलब किया है।
विज्ञापन
सूत्रों के अनुसार संयुक्त सचिव (मनरेगा) अपराजिता सारंगी द्वारा ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग के प्रमुख सचिव को मिले पत्र के अनुसार 6 दिसंबर तक जवाब मांगा गया है।
विज्ञापन
मनरेगा सॉफ्टवेयर के तहत विश्लेषण करने के बाद सामने आए तथ्यों के बाद केंद्र ने पत्र लिखकर राज्य सरकार से पूछा है कि इस योजना के तहत दी गई राशि का एक बड़ा हिस्सा बिना खर्च के क्यों पड़ा है।
सूत्रों के अनुसार पंजाब ने 2013-14 के फ्लैगशिप योजनाओं में मनरेगा का चार सौ करोड़ का बजट तैयार किया था। इसके अनुसार केंद्र का पिछले वर्ष का हिस्सा 16.80 करोड़ और राज्य सरकार का 1.87 करोड़ रुपये का हिस्सा बकाया पड़ा हुआ है।
चालू वित्तीय वर्ष 2013-2014 में राज्य सरकार ने 400 करोड़ खर्च करने का लक्ष्य तय किया था। सितंबर 2013 तक राज्य सरकार को केंद्र से 73.80 करोड़ रुपये मिले हैं जबकि राज्य के वित्त विभाग ने केवल 8.20 करोड़ ही जारी किए हैं।
पंजाब सरकार द्वारा मनरेगा साइट पर जो आंकड़े चढ़ाए गए हैं उसके अनुसार 124 करोड़ रुपये अलाट किए दिखाए गए हैं, जिसमें से 31.95 करोड़ रुपये बिना खर्च किए बचे हैं।
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार अगले चार माह में भी पचास फीसदी लक्ष्य भी पूरा कर लिया जाए तो वह काफी होगा।
खर्च न करने पर रुक जाता है पैसा
मनरेगा का पैसा 60 फीसदी दिहाड़ी और 40 फीसदी मैटीरियल पर खर्च होता है। दिहाड़ी का 90 फीसदी पैसा केंद्र सरकार देती है। राज्य सरकारों द्वारा पैसा खर्च न किए जाने पर पुराना पैसा भी रुक जाता है। पंजाब में मनरेगा की दिहाड़ी 184 रुपये प्रतिदिन है।