{"_id":"696ca776fdda40e16307c499","slug":"voting-for-senior-vice-president-and-vice-president-of-jagraon-municipal-council-2026-01-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"जगरांव में सत्ता की जंग:कांग्रेस गुट बनाम कांग्रेस बागी; सीनियर वाइस प्रेसिडेंट व वाइस प्रेसिडेंट के लिए चुनाव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जगरांव में सत्ता की जंग:कांग्रेस गुट बनाम कांग्रेस बागी; सीनियर वाइस प्रेसिडेंट व वाइस प्रेसिडेंट के लिए चुनाव
Sun, 18 Jan 2026 02:57 PM IST
अंकेश ठाकुर
अतुल मल्होत्रा, जगरांव
अतुल मल्होत्रा, जगरांव
Published by: अंकेश ठाकुर
Updated Sun, 18 Jan 2026 02:57 PM IST
सार
जगरांव नगर कौंसिल के 23 पार्षदों में से 17 कांग्रेस के थे और दो निर्दलीय भी उनके साथ थे, जिससे कांग्रेस पूर्ण बहुमत में थी। हालांकि, पार्टी की अंदरूनी खींचतान और विधायक बनाम अध्यक्ष की रस्साकशी के कारण कांग्रेस का किला कमजोर पड़ गया।
विज्ञापन
अमन कपूर बॉबी, रमेश मेशी सहोता, अमरजीत सिंह, कंवरपाल सिंह, रविंदर पाल सिंह राजू।
- फोटो : संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जगरांव नगर कौंसिल में सोमवार को सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और वाइस प्रेसिडेंट पद के लिए चुनाव होगा। यह चुनाव केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि नगर की सत्ता पर कब्जे की निर्णायक लड़ाई बन गया है। अध्यक्ष पद पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की रोक के कारण, जो भी सीनियर वाइस प्रेसिडेंट चुना जाएगा, वही नगर कौंसिल का वास्तविक 'पावर सेंटर' होगा।
विज्ञापन
पूर्व अध्यक्ष जतिंदर पाल राणा को दूसरी बार बर्खास्त किए जाने का मामला अभी हाईकोर्ट में लंबित है। अदालत ने अध्यक्ष पद के चुनाव पर रोक लगा रखी है, जिसका फैसला 20 जनवरी को आना है। इसी को देखते हुए उप प्रधान का चुनाव करवाया जा रहा है।
विज्ञापन
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, जो भी सीनियर वाइस प्रेसिडेंट बनेगा, वही नगर कौंसिल का संचालन करेगा। फाइलों से लेकर ठेकों तक, सभी महत्वपूर्ण अधिकार उसी के हाथ में होंगे। यह पद सीधे तौर पर नगर कौंसिल की कमान, अफसरशाही पर पकड़, विकास कार्यों की दिशा और आने वाले चुनावों की रणनीति तय करेगा।
विज्ञापन
नगर कौंसिल के 23 पार्षदों में से 17 कांग्रेस के थे और दो निर्दलीय भी उनके साथ थे, जिससे कांग्रेस पूर्ण बहुमत में थी। हालांकि, पार्टी की अंदरूनी खींचतान और विधायक बनाम अध्यक्ष की रस्साकशी के कारण कांग्रेस का किला कमजोर पड़ गया। कांग्रेस के 8 पार्षद बागी होकर विधायक के खेमे में चले गए। एक अकाली समर्थित निर्दलीय और एक अकाली पार्षद ने भी उनका साथ दिया, जिसके बाद जतिंदर पाल राणा को हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई।
जतिंदर पाल राणा को दो बार बर्खास्त किया जा चुका है। पहली बर्खास्तगी पर हाईकोर्ट ने उन्हें बहाल कर दिया था, लेकिन दूसरी बार उन्हें विभागीय खामियों के नाम पर हटाया गया। यह मामला अब फिर से अदालत में है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कार्रवाई प्रशासनिक से अधिक राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है।
कांग्रेस गुट बनाम कांग्रेस बागी- असली मुकाबला
कांग्रेस (राणा गुट)
रविंदर पाल सिंह राजू
अमन कपूर बॉबी
रमेश मेशी सहोता
यहां फैसला हाईकमान करेगा। एक नाम तय होते ही बाकी पीछे हटेंगे क्योंकि यह गुट संगठनात्मक अनुशासन पर टिका है।
कांग्रेस बागी गुट
कंवरपाल सिंह
अमरजीत सिंह
यहां सबसे बड़ा खतरा आपसी टकराव है। अगर एक नाम पर सहमति नहीं बनी, तो वोट कटेंगे और इसका सीधा फायदा विरोधी खेमे को मिलेगा।
हाउस का गणित: कौन किस पर भारी?
कुल सदस्य (विधायक सहित): 24
मतदान करेंगे: 21
एक पार्षद विदेश में
एक का निधन
अब मुकाबला हर वोट की कीमत सोने के भाव हो चुकी है।
शहर भुगतता रहा, नेता सत्ता खेलते रहे
पांच साल के कार्यकाल में गुटबाजी इतनी हावी रही कि विकास ठप रहा। शहर चार साल तक कूड़े के ढेरों में डूबा रहा और जनता मुद्दों से बाहर, राजनीति अंदर सिमटी रही। नगर कौंसिल शहर के लिए नहीं, सत्ता संतुलन के लिए चलती रही।
सोमवार को क्या तय होगा?
यह चुनाव तय करेगा नगर कौंसिल पर विधायक का नियंत्रण रहेगा या कांग्रेस संगठन का। हाईकोर्ट के फैसले से पहले कौन प्रशासनिक फैसले लेगा और आने वाले समय में जगराओं की राजनीति किस दिशा में जाएगी। सोमवार को होने वाला यह चुनाव सिर्फ सीनियर वाइस प्रेसिडेंट का चुनाव नहीं बल्कि यह नगर की सत्ता की सेमीफाइनल लड़ाई है और जो जीता, वही तय करेगा कि हाईकोर्ट के फैसले तक जगरांव किसके इशारों पर चलेगा।