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एसबीआई के एसोसिएट्स बैंकों की हड़ताल
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना
Updated Fri, 20 May 2016 05:57 PM IST
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लुधियाना में हड़ताल के दौरान सरकार के खिलाफ रोष प्रर्दशन करते बैंक इम्लाइज।
- फोटो : अमर उजाला
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भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के सहयोगी बैंकों के मुलाजिमों ने शुक्रवार को एक दिन की हड़ताल रखी। मुलाजिम सहयोगी बैंकों का एसबीआई में विलय के प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं। स्टेट सेक्टर बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन के बैनर तले मुलाजिमों ने मिलर गंज में धरना दिया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
मुलाजिमों ने साफ किया है कि एसबीआई में विलय को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, इसके खिलाफ मुलाजिम संगठन लंबी लड़ाई के लिए तैयार हैं। हड़ताल के कारण सहयोगी बैंकों की शाखाओं में कामकाज ठप रहा।
स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर और स्टेट बैंक ऑफ त्रावरणकोर भारतीय स्टेट बैंक के सहयोगी बैंक हैं। सरकार इन पांचों बैंकों का एसबीआई में विलय करने जा रही है। इन बैंकों के मुलाजिम इसका विरोध कर रहे हैं।
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एसोसिएशन के सचिव नरेश गौड़ ने कहा कि देश भर में इन सहयोगी बैंकों की 67 हजार शाखाएं और नौ हजार एटीएम हैं। इन बैंकों का कुल व्यवसाय 900 हजार करोड़ रुपये है। इन बैंकों में 73 हजार अधिकारी और कर्मचारी काम कर रहे हैं। एसबीआई में विलय के बाद कई शाखाएं बंद हो जाएंगी। ऐसे में कर्मचारियों में रोष बढ़ रहा है।
गौड़ ने कहा कि आज बड़े नहीं अच्छी सेवाएं देने वाले बैंकों की जरूरत है। एसबीआई के विस्तार के लिए छोटे बैंकों का अस्तित्व खत्म करना कतई उचित नहीं है। इसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। इस अवसर पर अशोक मल्हन, पवन ठाकुर, राजेश वर्मा, बलवंत राय और अश्वनी सिंगला समेत कई मुलाजिम मौजूद रहे।
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मुलाजिमों ने साफ किया है कि एसबीआई में विलय को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, इसके खिलाफ मुलाजिम संगठन लंबी लड़ाई के लिए तैयार हैं। हड़ताल के कारण सहयोगी बैंकों की शाखाओं में कामकाज ठप रहा।
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स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर और स्टेट बैंक ऑफ त्रावरणकोर भारतीय स्टेट बैंक के सहयोगी बैंक हैं। सरकार इन पांचों बैंकों का एसबीआई में विलय करने जा रही है। इन बैंकों के मुलाजिम इसका विरोध कर रहे हैं।
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एसोसिएशन के सचिव नरेश गौड़ ने कहा कि देश भर में इन सहयोगी बैंकों की 67 हजार शाखाएं और नौ हजार एटीएम हैं। इन बैंकों का कुल व्यवसाय 900 हजार करोड़ रुपये है। इन बैंकों में 73 हजार अधिकारी और कर्मचारी काम कर रहे हैं। एसबीआई में विलय के बाद कई शाखाएं बंद हो जाएंगी। ऐसे में कर्मचारियों में रोष बढ़ रहा है।
गौड़ ने कहा कि आज बड़े नहीं अच्छी सेवाएं देने वाले बैंकों की जरूरत है। एसबीआई के विस्तार के लिए छोटे बैंकों का अस्तित्व खत्म करना कतई उचित नहीं है। इसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। इस अवसर पर अशोक मल्हन, पवन ठाकुर, राजेश वर्मा, बलवंत राय और अश्वनी सिंगला समेत कई मुलाजिम मौजूद रहे।