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मेडिकल प्रैक्टीशनर्स एसोसिएशन की ‘पोल खोल’ रैली
ब्यूरो/अमर उजाला, बठिंडा
Updated Mon, 20 Jun 2016 09:59 PM IST
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बठिंडा में प्रदर्शनकारियों को रोकती पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला
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मेडिकल प्रैक्टीशनर्स एसोसिएशन की ओर से सोमवार को स्थानीय दाना मंडी में जोन स्तरीय ‘पोल खोल’ रैली का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता राज्य अध्यक्ष डॉ. धन्ना मल्ल गोयल ने की। इसमें मालवा जोन के सभी जिलों से हजारों मेडिकल प्रैक्टीशनर्स शामिल हुए। उनका किसानों और खेत मजदूरों ने भी समर्थन किया।
मेडिकल प्रैक्टीशनर्स की ओर से किसानों और मजदूरों के सहयोग से रैली निकालने की तैयारी की जा रही थी, जिससे जाम की संभावना बरकरार थी। उन्हें रोकने के लिए भारी तादाद में पुलिस फोर्स तैनात की गई थी। जब संघर्षकारी पुलिस नाके को तोड़कर रैली करने का प्रयास करने लगे तो पुलिस और संघर्षकारियों में हाथापाई की नौबत आ गई। इस वजह से माहौल तनावपूर्ण हो गया।
राज्य प्रधान धन्ना मल्ल गोयल ने कहा कि वह लंबे समय से पंजाब के उन 80 प्रतिशत लोगों को सस्ती और प्राथमिक सेहत सेवाएं दे रहे हैं, जो प्राइवेट अस्पतालों से महंगा इलाज नहीं करवा सकते। जिनको बनती सेहत सहूलियतें देना सरकार का फर्ज बनता है, लेकिन अधिकतर लोग आज भी अपने इस हक से वंचित हैं।
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उन्होंने कहा कि 2012 के विधानसभा चुनाव के दौरान ही अकाली-भाजपा सरकार ने उनका मामला चुनाव मैनीफैस्टो में डालकर भी उसका कोई हल नहीं किया। राज्य जनरल सचिव डॉ. कुलवंत राय और राज्य खजांची डॉ. एचएस राणू ने कहा कि सरकार को चाहिए था कि वह हमारे इन एक लाख लोगों का मामला हल कर उन्हें रोजगार दें। इसके विपरीत विधानसभा में एक प्रस्ताव डालकर मेडिकल प्रैक्टीशनर्स को बंद करवाने के लिए परेशान किया जा रहा है।
बीकेयू उगराहां के राज्य नेता शिंगारा सिंह मान, बीकेयू डकौंदा से राज्य उप प्रधान गुरदीप सिंह ने कहा कि इन सरकारों की लोक विरोधी नीतियों से आए दिन भारी गिनती में किसान आत्महत्याएं कर रहे हैं। ग्रामीण मजदूर यूनियन के साथी अमरजीत हनी ने कहा कि किसानों के साथ-साथ मजदूर भी खत्म हो चुका है।
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मेडिकल प्रैक्टीशनर्स की ओर से किसानों और मजदूरों के सहयोग से रैली निकालने की तैयारी की जा रही थी, जिससे जाम की संभावना बरकरार थी। उन्हें रोकने के लिए भारी तादाद में पुलिस फोर्स तैनात की गई थी। जब संघर्षकारी पुलिस नाके को तोड़कर रैली करने का प्रयास करने लगे तो पुलिस और संघर्षकारियों में हाथापाई की नौबत आ गई। इस वजह से माहौल तनावपूर्ण हो गया।
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राज्य प्रधान धन्ना मल्ल गोयल ने कहा कि वह लंबे समय से पंजाब के उन 80 प्रतिशत लोगों को सस्ती और प्राथमिक सेहत सेवाएं दे रहे हैं, जो प्राइवेट अस्पतालों से महंगा इलाज नहीं करवा सकते। जिनको बनती सेहत सहूलियतें देना सरकार का फर्ज बनता है, लेकिन अधिकतर लोग आज भी अपने इस हक से वंचित हैं।
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उन्होंने कहा कि 2012 के विधानसभा चुनाव के दौरान ही अकाली-भाजपा सरकार ने उनका मामला चुनाव मैनीफैस्टो में डालकर भी उसका कोई हल नहीं किया। राज्य जनरल सचिव डॉ. कुलवंत राय और राज्य खजांची डॉ. एचएस राणू ने कहा कि सरकार को चाहिए था कि वह हमारे इन एक लाख लोगों का मामला हल कर उन्हें रोजगार दें। इसके विपरीत विधानसभा में एक प्रस्ताव डालकर मेडिकल प्रैक्टीशनर्स को बंद करवाने के लिए परेशान किया जा रहा है।
बीकेयू उगराहां के राज्य नेता शिंगारा सिंह मान, बीकेयू डकौंदा से राज्य उप प्रधान गुरदीप सिंह ने कहा कि इन सरकारों की लोक विरोधी नीतियों से आए दिन भारी गिनती में किसान आत्महत्याएं कर रहे हैं। ग्रामीण मजदूर यूनियन के साथी अमरजीत हनी ने कहा कि किसानों के साथ-साथ मजदूर भी खत्म हो चुका है।