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वीरता पुरस्कार देने में हुई देरी : रुपनीत सिंह
अमर उजाला, लुधियाना
Updated Sat, 25 Jan 2014 09:39 PM IST
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18 मई, 2011 को लुटेरों का पीछा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए एएसआई गुरदियाल सिंह को सरकार ने मरणोपरांत वीरता पुरस्कार से नवाजा है। 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर सरकार ने वीरता एवं अन्य पुरस्कारों का ऐलान किया है।
गुरदियाल सिंह के परिजनों को इसकी जानकारी दे दी गई है। इस पुरस्कार के लिए उनके परिजनों को लंबे अर्से बाद अवश्य सुकून मिला है। बावजूूद इसके उनके बेटे रुपनीत का कहना है कि सरकार ने सम्मान देने में देरी कर दी।
पुरस्कार की घोषणा होने के बाद निजी कॉलेज में बीटेक की पढ़ाई कर रहे रुपनीत सिंह ने कहा कि उसका एक छोटा भाई नवदीप सिंह इलाके में ही स्थित एक स्कूल में दसवीं कक्षा का छात्र है जबकि मां राजदीप कौर ग्रहणी हैं।
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उनके पिता गुरिदयाल सिंह 1986 में बतौर कांस्टेबल पुलिस विभाग में भर्ती हुए थे। उनके पिता की मौत के बाद उनके ताया हरदेव सिंह ने ही उनके परिवार को सहारा देकर संभाला था। उनके परिवार का सारा खर्च और उनकी पढ़ाई का खर्च हरदेव सिंह ही चला रहे हैं। पिता को मरणोपरांत वीरता पुरस्कार से उनका पूरा परिवार गर्व महसूस कर रहा है।
एएसआई गुरदियाल सिंह मई 2011 में थाना सराभा नगर के अधीन आती चौकी शहीद भगत सिंह नगर में तैनात थे। 18 मई की सुबह उन्हें सूचना मिली कि दो संदिग्ध युवक मोटरसाइकिल पर सवार होकर जा रहे हैं। जब वे मोटरसाइकिल सवार युवकों के पास गए तो वे पुलिस देख कर फरार हो गए थे।
इसी दौरान गुरदियाल सिंह ने अपने दो मुलाजिमों के साथ मिल कर उनका पीछा किया। कुछ दूरी पर दोनों लुटेरों को काबू कर लिया गया। इसी दौरान एक लुटेरे ने अपने पास रखी पिस्तौल से उन पर गोलियां चला दी। एक गोली गुरदियाल के सिर और दूसरी कंधे पर जा लगी थी। गुरदियाल को तुरंत डीएमसी अस्पताल में भरती कराया गया। जहां पर कुछ दिन बाद ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
इसके बाद परिवार पर मानों मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। उनके परिवार का गुजारा करने का पूरा दायित्व गुरदियाल पर था। उनकी शहीदी के बाद सारी जिम्मेदारी गुरदियाल के बड़े भाई ने बखूबी निभाई और पूरे परिवार को इस सदमे से बाहर निकाला।
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गुरदियाल सिंह के परिजनों को इसकी जानकारी दे दी गई है। इस पुरस्कार के लिए उनके परिजनों को लंबे अर्से बाद अवश्य सुकून मिला है। बावजूूद इसके उनके बेटे रुपनीत का कहना है कि सरकार ने सम्मान देने में देरी कर दी।
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पुरस्कार की घोषणा होने के बाद निजी कॉलेज में बीटेक की पढ़ाई कर रहे रुपनीत सिंह ने कहा कि उसका एक छोटा भाई नवदीप सिंह इलाके में ही स्थित एक स्कूल में दसवीं कक्षा का छात्र है जबकि मां राजदीप कौर ग्रहणी हैं।
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उनके पिता गुरिदयाल सिंह 1986 में बतौर कांस्टेबल पुलिस विभाग में भर्ती हुए थे। उनके पिता की मौत के बाद उनके ताया हरदेव सिंह ने ही उनके परिवार को सहारा देकर संभाला था। उनके परिवार का सारा खर्च और उनकी पढ़ाई का खर्च हरदेव सिंह ही चला रहे हैं। पिता को मरणोपरांत वीरता पुरस्कार से उनका पूरा परिवार गर्व महसूस कर रहा है।
एएसआई गुरदियाल सिंह मई 2011 में थाना सराभा नगर के अधीन आती चौकी शहीद भगत सिंह नगर में तैनात थे। 18 मई की सुबह उन्हें सूचना मिली कि दो संदिग्ध युवक मोटरसाइकिल पर सवार होकर जा रहे हैं। जब वे मोटरसाइकिल सवार युवकों के पास गए तो वे पुलिस देख कर फरार हो गए थे।
इसी दौरान गुरदियाल सिंह ने अपने दो मुलाजिमों के साथ मिल कर उनका पीछा किया। कुछ दूरी पर दोनों लुटेरों को काबू कर लिया गया। इसी दौरान एक लुटेरे ने अपने पास रखी पिस्तौल से उन पर गोलियां चला दी। एक गोली गुरदियाल के सिर और दूसरी कंधे पर जा लगी थी। गुरदियाल को तुरंत डीएमसी अस्पताल में भरती कराया गया। जहां पर कुछ दिन बाद ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
इसके बाद परिवार पर मानों मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। उनके परिवार का गुजारा करने का पूरा दायित्व गुरदियाल पर था। उनकी शहीदी के बाद सारी जिम्मेदारी गुरदियाल के बड़े भाई ने बखूबी निभाई और पूरे परिवार को इस सदमे से बाहर निकाला।