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प्रदूषण बोर्ड के खिलाफ डाइंग उद्योग नाराज
अमर उजाला, लुधियाना
Updated Tue, 14 Jan 2014 10:27 PM IST
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पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) की सख्ती से गुस्साए डाइंग उद्योग ने 48 घंटे के बंद का फैसला लिया है। यह बंद 15 जनवरी सुबह आठ बजे से शुरू हो जाएगा।
नतीजतन 15 और 16 जनवरी को शहर की 250 इकाइयों में कामकाज पूरी तरह से ठप हो जाएगा। यह फैसला मंगलवार को स्थानीय रेस्टोरेंट में आयोजित डाइंग उद्यमियों की बैठक में लिया गया। पंजाब डायर्स एसोसिएशन के बैनर तले हुई इस बैठक में शहर के सभी डाइंग संगठनों के पदाधिकारी शामिल थे।
इस हड़ताल से एक लाख से अधिक लोगों को दो दिन रोजगार नहीं मिलेगा। 15 जनवरी को तमाम डाइंग उद्यमी ढोलेवाल चौक के पास प्रदूषण बोर्ड के दफ्तर के सामने धरना देकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे।
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बैठक के बाद पंजाब डायर्स एसोसिएशन के प्रधान अशोक मक्कड़ ने कहा कि गंदे पानी की ट्रीटमेंट के लिए डाइंग उद्योग सरकार के सहयोग से ताजपुर रोड पर कॉमन एफ्ल्यूऐंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) लगा रहा है। इसके लिए उद्यमियों ने अपनी जेब से पांच करोड़ रुपये इक्ट्ठा करके दिए हैं।
दूसरे बहादुरके रोड पर भी सीईटीपी के लिए उद्यमियों ने दो करोड़ दिया है। जबकि फोकल प्वाइंट में ट्रीटमेंट प्लांट के लिए उद्यमियों ने दो करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इसके अलावा तमाम डाइंग इकाइयोें में अपने व्यक्तिगत ट्रीटमेंट प्लांट भी लगा रखे हैं।
मक्कड़ ने दावा किया कि सभी उद्यमी प्रदूषण बोर्ड द्वारा घोषित तमाम मानक पूरे कर रहे हैं। बावजूद इसके उद्योग पर आरोप लगाया जा रहा है कि बुड्ढे नाले को गंदा करने में इंडस्ट्री की भूमिका है। मक्कड़ ने दावा किया कि दो दिन तक शहर की डाइंग इंडस्ट्री में से एक बूंद भी पानी नहीं निकलेगा। प्रदूषण बोर्ड दो दिन तक लगातार बुड्ढे नाले से पानी के सैंपल लेकर चेक कराए, इसके बाद खुद पता चल जाएगा कि पानी कौन गंदा कर रहा है।
मक्कड़ ने आरोप लगाया कि प्रदूषण नियंत्रण करना उद्यमियों की प्राथमिकताओं में शामिल है। इस पर उद्यमी करोड़ों रुपये खर्च कर रहे हैं। बावजूद इसके पिछले एक सप्ताह से प्रदूषण बोर्ड ने डाइंग उद्योग के खिलाफ अभियान छेड़ रखा है। कम से कम 60 से 70 इकाइयों को चेक किया जा चुका है। इससे उद्योग जगत में बेचैनी है।
प्रदूषण बोर्ड के इस रुख के खिलाफ उद्यमियों में रोष है। इसलिए अब दो दिन की हड़ताल पर जाने का फैसला लिया गया है। इस बैठक में रजत सूद, राहुल वर्मा, केशो राम विज, बावा जैन समेत डाइंग उद्योग से जुड़े तमाम उद्यमी मौजूद रहे।
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नतीजतन 15 और 16 जनवरी को शहर की 250 इकाइयों में कामकाज पूरी तरह से ठप हो जाएगा। यह फैसला मंगलवार को स्थानीय रेस्टोरेंट में आयोजित डाइंग उद्यमियों की बैठक में लिया गया। पंजाब डायर्स एसोसिएशन के बैनर तले हुई इस बैठक में शहर के सभी डाइंग संगठनों के पदाधिकारी शामिल थे।
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इस हड़ताल से एक लाख से अधिक लोगों को दो दिन रोजगार नहीं मिलेगा। 15 जनवरी को तमाम डाइंग उद्यमी ढोलेवाल चौक के पास प्रदूषण बोर्ड के दफ्तर के सामने धरना देकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे।
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बैठक के बाद पंजाब डायर्स एसोसिएशन के प्रधान अशोक मक्कड़ ने कहा कि गंदे पानी की ट्रीटमेंट के लिए डाइंग उद्योग सरकार के सहयोग से ताजपुर रोड पर कॉमन एफ्ल्यूऐंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) लगा रहा है। इसके लिए उद्यमियों ने अपनी जेब से पांच करोड़ रुपये इक्ट्ठा करके दिए हैं।
दूसरे बहादुरके रोड पर भी सीईटीपी के लिए उद्यमियों ने दो करोड़ दिया है। जबकि फोकल प्वाइंट में ट्रीटमेंट प्लांट के लिए उद्यमियों ने दो करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इसके अलावा तमाम डाइंग इकाइयोें में अपने व्यक्तिगत ट्रीटमेंट प्लांट भी लगा रखे हैं।
मक्कड़ ने दावा किया कि सभी उद्यमी प्रदूषण बोर्ड द्वारा घोषित तमाम मानक पूरे कर रहे हैं। बावजूद इसके उद्योग पर आरोप लगाया जा रहा है कि बुड्ढे नाले को गंदा करने में इंडस्ट्री की भूमिका है। मक्कड़ ने दावा किया कि दो दिन तक शहर की डाइंग इंडस्ट्री में से एक बूंद भी पानी नहीं निकलेगा। प्रदूषण बोर्ड दो दिन तक लगातार बुड्ढे नाले से पानी के सैंपल लेकर चेक कराए, इसके बाद खुद पता चल जाएगा कि पानी कौन गंदा कर रहा है।
मक्कड़ ने आरोप लगाया कि प्रदूषण नियंत्रण करना उद्यमियों की प्राथमिकताओं में शामिल है। इस पर उद्यमी करोड़ों रुपये खर्च कर रहे हैं। बावजूद इसके पिछले एक सप्ताह से प्रदूषण बोर्ड ने डाइंग उद्योग के खिलाफ अभियान छेड़ रखा है। कम से कम 60 से 70 इकाइयों को चेक किया जा चुका है। इससे उद्योग जगत में बेचैनी है।
प्रदूषण बोर्ड के इस रुख के खिलाफ उद्यमियों में रोष है। इसलिए अब दो दिन की हड़ताल पर जाने का फैसला लिया गया है। इस बैठक में रजत सूद, राहुल वर्मा, केशो राम विज, बावा जैन समेत डाइंग उद्योग से जुड़े तमाम उद्यमी मौजूद रहे।