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सहायक धंधे को मुख्य धंधे में बदलेंगे मछली मेले : ढिल्लों
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना
Updated Mon, 25 Apr 2016 10:05 PM IST
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लुधियाना में मछली पालक किसानों को सम्मानित करते मंत्री शरणजीत सिंह ढिल्लो ।
- फोटो : अमर उजाला
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मछली पालन विभाग पंजाब की तरफ से लगाए दो दिवसीय मछली मेले के आखिरी दिन सेमिनार और प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। मछली पालक किसानों की मुश्किलों को माहिरों की तरफ से मौके पर ही हल किया गया। सोमवार को कैबिनेट मंत्री शरणजीत सिंह ढिल्लों कार्यक्रम में मुख्य मेहमान रहे।
ढिल्लों ने कहा कि मछली मेले सहायक धंधे को मुख्य कार्य में बदलने के लिए सहायक सिद्ध होंगे। ऐसे मेले रिवायती फसल प्रणाली के से पैदा हुई दिक्कतों के हल के लिए उपयोगी होंगे। उन्होंने कहा कि मछली पालन, मुर्गी पालन, सुअर पालन, डेयरी पालन, बकरी पालन अगर इकट्ठा शुरू किया जाए तो खर्चे कम और आमदन ज्यादा ली जा सकती है।
सरकार के एडिशनल सचिव मंदीप सिंह संधू ने कहा कि पंजाब पहला राज्य है जहां मछली पालन के लिए पचास से 90 प्रतिशत तक सब्सिडी मछली पालकों को दी जा रही है। मछली पुंग की पैदावार बढ़ाना और क्वालिटी ऊंची करने के लिए सरकारी मछली पुंग फार्मों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। मछली के अच्छे मंडीकरण के लिए राज्य में तीन आधुनिक मछली मंडी स्थापित की गई है।
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मछली पालन की बदलती तकनीकों की खोज के लिए क्षेत्रीय खोज केंद्र बठिंडा में स्थापित किया जा रहा है। पंजाब में मछली की प्राकृतिक पानी, डैम, दरिया, झील में मछली की नई किस्मों की संभावनाओं की तलाश के लिए माहिरों को हिदायत की। उन्होंने इस क्षेत्र में अच्छा काम करने वाले किसानों और आए हुए वैज्ञानिकों को सम्मानित भी किया।
सेशन के चेयरमैन डॉ. गोपाल कृष्णा वाइस चांसलर कम डायरेक्टर सीआईएफई मुंबई ने फिशरीज एजुकेेशन और ट्रेनिंग इन इंडिया के बारे में बताया। सहायक डायरेक्टर जनरल डॉ. पी प्रवीण ने भी अपने विचार सांझे किए।
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ढिल्लों ने कहा कि मछली मेले सहायक धंधे को मुख्य कार्य में बदलने के लिए सहायक सिद्ध होंगे। ऐसे मेले रिवायती फसल प्रणाली के से पैदा हुई दिक्कतों के हल के लिए उपयोगी होंगे। उन्होंने कहा कि मछली पालन, मुर्गी पालन, सुअर पालन, डेयरी पालन, बकरी पालन अगर इकट्ठा शुरू किया जाए तो खर्चे कम और आमदन ज्यादा ली जा सकती है।
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सरकार के एडिशनल सचिव मंदीप सिंह संधू ने कहा कि पंजाब पहला राज्य है जहां मछली पालन के लिए पचास से 90 प्रतिशत तक सब्सिडी मछली पालकों को दी जा रही है। मछली पुंग की पैदावार बढ़ाना और क्वालिटी ऊंची करने के लिए सरकारी मछली पुंग फार्मों का आधुनिकीकरण किया जा रहा है। मछली के अच्छे मंडीकरण के लिए राज्य में तीन आधुनिक मछली मंडी स्थापित की गई है।
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मछली पालन की बदलती तकनीकों की खोज के लिए क्षेत्रीय खोज केंद्र बठिंडा में स्थापित किया जा रहा है। पंजाब में मछली की प्राकृतिक पानी, डैम, दरिया, झील में मछली की नई किस्मों की संभावनाओं की तलाश के लिए माहिरों को हिदायत की। उन्होंने इस क्षेत्र में अच्छा काम करने वाले किसानों और आए हुए वैज्ञानिकों को सम्मानित भी किया।
सेशन के चेयरमैन डॉ. गोपाल कृष्णा वाइस चांसलर कम डायरेक्टर सीआईएफई मुंबई ने फिशरीज एजुकेेशन और ट्रेनिंग इन इंडिया के बारे में बताया। सहायक डायरेक्टर जनरल डॉ. पी प्रवीण ने भी अपने विचार सांझे किए।