गुरुद्वारा मंजी साहिब गोलीकांड: पुलिस हिरासत में आरोपी राजू की मौत, पूछताछ के बाद बिगड़ी तबीयत
27-28 अक्टूबर की रात करीब 3:15 बजे राजोआणा कलां स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा मंजी साहिब में मोटरसाइकिल सवार दो नकाबपोश हमलावरों ने मुख्य सेवादार संत बाबा बलदेव सिंह के रिहायशी कमरे पर गोलियां चलाई थीं। इसी मामले में पकड़े गए शूटर राजू की पुलिस हिरासत में माैत हो गई है।
विस्तार
गुरुद्वारा मंजी साहिब गोलीकांड के आरोपी शूटर राज सिंह उर्फ राजू की पुलिस हिरासत में मौत हो गई। फिरोजपुर के गांव नूरपुर माछीवाड़ा निवासी राजू को लुधियाना ग्रामीण पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
सोमवार रात रक्तचाप कम होने की शिकायत के बाद उसे पहले सुधार के सरकारी और निजी अस्पताल ले जाया गया। हालत गंभीर होने पर लुधियाना के ग्लोबल हार्ट अस्पताल रेफर किया गया, जहां उसकी मौत हो गई। पुलिस की ओर से मौत की वजह रक्तचाप कम होना बताई जा रही है, लेकिन हिरासत के दौरान उसकी तबीयत बिगड़ने की परिस्थितियों को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, जगरांव के सीआईए स्टाफ में पूछताछ के बाद राजू की हालत बिगड़ी थी। हालांकि, इस संबंध में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। सोमवार दोपहर करीब डेढ़ बजे एसएसपी डॉ. अंकुर गुप्ता ने प्रेस कांफ्रेंस कर उसकी गिरफ्तारी की पुष्टि की थी। इसके बाद उसे अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड हासिल किया गया था। अब हिरासत में मौत के मामले ने पहले से संवेदनशील इस गोलीकांड को नया मोड़ दे दिया है।
15 साल में सात मुकदमे, एनडीपीएस और आर्म्स एक्ट में भी नाम
राज सिंह उर्फ राजू का आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया है। उपलब्ध पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, वर्ष 2010 से 2025 के बीच उसके खिलाफ विभिन्न थानों में कुल सात मुकदमे दर्ज हुए थे। इनमें फिरौती, चोरी, एनडीपीएस और आर्म्स एक्ट से संबंधित मामले शामिल हैं।
रिकॉर्ड के अनुसार, 15 मई 2010 को थाना सदर कोटकपूरा में आईपीसी की धारा 384 के तहत मुकदमा नंबर 53 दर्ज हुआ। 18 नवंबर 2011 को थाना सिटी फरीदकोट में धारा 382 और 411 के तहत मुकदमा नंबर 310 दर्ज किया गया। 31 मार्च 2016 को थाना शाहकोट में एनडीपीएस एक्ट की धाराओं 22/61/85 और आर्म्स एक्ट की धाराओं 25/54/59 के तहत मुकदमा नंबर 72 दर्ज हुआ।
इसके बाद 23 जनवरी 2020 को थाना फरीदकोट में आईपीसी की धाराओं 385/511 और आर्म्स एक्ट की धाराओं 25/27/54/59 के तहत मुकदमा नंबर 28 दर्ज किया गया। 27 अक्टूबर 2022 को थाना सदर जीरा में एनडीपीएस एक्ट की धाराओं 21/61/85 के तहत मुकदमा नंबर 171 दर्ज हुआ। वर्ष 2025 में भी उसके खिलाफ तीन महीने के अंतराल में दो मामले दर्ज हुए। इनमें 8 मार्च को मुकदमा नंबर 19 और 7 जून को मुकदमा नंबर 65 शामिल हैं। दोनों एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज किए गए थे।
विदेशी नंबर से धमकी
मामला 27-28 अक्टूबर की रात करीब 3:15 बजे का है। राजोआणा कलां स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा मंजी साहिब में मोटरसाइकिल सवार दो नकाबपोश हमलावरों ने मुख्य सेवादार संत बाबा बलदेव सिंह के रिहायशी कमरे पर गोलियां चलाई थीं। एक गोली शीशे और लकड़ी के दरवाजे को चीरती हुई दीवार में जा धंसी। संयोगवश उस समय बाबा बलदेव सिंह बाथरूम में इशनान कर रहे थे और बाल-बाल बच गए।
पुलिस जांच में विदेशी इंटरनेट नंबर से जान से मारने की धमकियां देने और कथित तौर पर फिरौती मांगने की बात सामने आई थी। मांग पूरी न होने पर बाबा की गतिविधियों पर नजर रखकर वारदात को अंजाम देने की साजिश रचे जाने का आरोप है। पुलिस ने करीब 200 किलोमीटर के रास्ते में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने, साइबर जांच और खुफिया सूचनाओं के आधार पर फिरोजपुर में दबिश देकर राजू को गिरफ्तार किया था। गुरदासपुर के दो अन्य संदिग्धों को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लेने की जानकारी सामने आई थी।
गगड़ा गोलीकांड की कहानी अलग, धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पर सवाल
इससे पहले गांव गगड़ा के ऐतिहासिक गुरुद्वारा गोपालसर साहिब के मुख्य गेट पर भी नकाबपोश हमलावर ने दो गोलियां चलाई थीं और धमकी भरा पत्र छोड़ा था। इस मामले में पुलिस ने संदीप सिंह उर्फ सोनी को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में पुलिस ने दावा किया कि मुख्य सेवादार बाबा अमरजीत सिंह ने कथित तौर पर सुरक्षा और असलहा लाइसेंस हासिल करने के उद्देश्य से फायरिंग की साजिश में भूमिका निभाई थी। बाद में बाबा अमरजीत सिंह को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने हथियार, मैगजीन, मोटरसाइकिल और वारदात में इस्तेमाल कपड़े बरामद करने की जानकारी दी थी। हालांकि, पुलिस ने दोनों गुरुद्वारों में हुई गोलीबारी की घटनाओं को अलग-अलग मामले माना है।
लगातार दो दिनों में दो ऐतिहासिक गुरुद्वारों पर फायरिंग और अब मंजी साहिब गोलीकांड के आरोपी की पुलिस हिरासत में मौत ने पंजाब में चिंता बढ़ा दी है। पुलिस के सामने अब न केवल विदेशी नंबर से धमकी और फिरौती के नेटवर्क का पर्दाफाश करने की चुनौती है, बल्कि हिरासत में राजू की तबीयत बिगड़ने और मौत की परिस्थितियों को भी निष्पक्ष जांच के जरिए स्पष्ट करना जरूरी होगा। संगत की निगाहें अब पुलिस की अगली कार्रवाई और दोनों मामलों में सामने आने वाले तथ्यों पर टिकी हैं।, मृतक का परिवार थाना सुधार पहुंच गया है और हंगामा होने के आसार बन गये हैं, शव अभी लुधियाना के ग्लोबल हार्ट अस्पताल में है और पुलिस कागजी कार्यवाई कर रही है