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हलवारा एयरपोर्टः सरकार की किसानों को दो टूक, एक पाई नहीं बढ़ेगी जमीन के लिए मुआवजा राशि
Mon, 09 Mar 2020 08:09 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, लुधियाना
अमर उजाला नेटवर्क, लुधियाना
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Mon, 09 Mar 2020 08:09 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट हलवारा के लिए अधिग्रहण की जाने वाली जमीन की मुआवजा राशि को लेकर सरकार ने किसानों को साफ कर दिया है कि इसमें एक पाई नहीं बढ़ाए जाएगी। बता दें कि सांसद अमर सिंह ने सोमवार को किसानों और मंत्री सुखसरकारिया के साथ बैठक रखी थी।
इसमें सांसद अमर सिंह, प्रिंसिपल सचिव अर्बन डेवलपमेंट सर्वजीत सिंह, किसान सोहन सिंह कलकता, सरपंच लखबीर सिंह, नंबरदार रणवीर सिंह व एनआरआई इंदरजीत सिंह उपस्थित थे। सरकार की बात सुनने के बाद किसानों का कहना है कि उनके साथ विश्वासघात किया गया है। इस मुद्दे पर बुधवार को गांव एतिआणा में बैठक होगी। वह अपनी जमीन सरकार को न देने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं।
सरपंच लखबीर सिंह ने बताया कि उनकी मांग थी कि सरकार उनकी जमीन के लिए कम मुआवजा राशि दे रही है। इसलिए उन्हें कहा गया था कि वह ऐसा मामला लेकर आएं, जिसमें किसानों को जमीन अधिग्रहण के लिए ज्यादा मुआवजा मिला हो। गांव घुगराना में पंजाब लॉजिस्टिक इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेज ड्राई पोर्ट के लिए सरकार ने जमीन का अधिग्रहण किया था।
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हालांकि वहां जमीन का कलेक्टर रेट आठ रुपये था, लेकिन किसानों को 85 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा राशि दी गई थी। ये सारे सबूत लेकर वह सोमवार को बैठक के लिए चंडीगढ़ गए थे। इसमें साफ कहा है कि एयरपोर्ट के लिए मुआवजा राशि में एक पाई नहीं बढ़ सकती है। यानी उन्हें प्रति एकड़ 20.70 लाख रुपये ही मिलेंगे।
किसान सोहन सिंह कलकता ने बताया कि उन्हें तो यह तक कह दिया गया है कि सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के अनुसार जमीन अधिग्रहण के बाद किसान कुछ नहीं कर सकते, उन्हें मुआवजा राशि लेनी पड़ेगी। ऐसा नहीं होने पर सरकार जमीन पर कब्जा ले सकती है। सरकार के इस तानाशाही रवैये के कारण पहले एक किसान आत्महत्या कर चुका है। वह सरकार के इस फैसले के खिलाफ संघर्ष करेंगे। अपनी जमीनों में किसी को घुसने नहीं देंगे।
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इसमें सांसद अमर सिंह, प्रिंसिपल सचिव अर्बन डेवलपमेंट सर्वजीत सिंह, किसान सोहन सिंह कलकता, सरपंच लखबीर सिंह, नंबरदार रणवीर सिंह व एनआरआई इंदरजीत सिंह उपस्थित थे। सरकार की बात सुनने के बाद किसानों का कहना है कि उनके साथ विश्वासघात किया गया है। इस मुद्दे पर बुधवार को गांव एतिआणा में बैठक होगी। वह अपनी जमीन सरकार को न देने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं।
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सरपंच लखबीर सिंह ने बताया कि उनकी मांग थी कि सरकार उनकी जमीन के लिए कम मुआवजा राशि दे रही है। इसलिए उन्हें कहा गया था कि वह ऐसा मामला लेकर आएं, जिसमें किसानों को जमीन अधिग्रहण के लिए ज्यादा मुआवजा मिला हो। गांव घुगराना में पंजाब लॉजिस्टिक इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेज ड्राई पोर्ट के लिए सरकार ने जमीन का अधिग्रहण किया था।
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हालांकि वहां जमीन का कलेक्टर रेट आठ रुपये था, लेकिन किसानों को 85 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा राशि दी गई थी। ये सारे सबूत लेकर वह सोमवार को बैठक के लिए चंडीगढ़ गए थे। इसमें साफ कहा है कि एयरपोर्ट के लिए मुआवजा राशि में एक पाई नहीं बढ़ सकती है। यानी उन्हें प्रति एकड़ 20.70 लाख रुपये ही मिलेंगे।
किसान सोहन सिंह कलकता ने बताया कि उन्हें तो यह तक कह दिया गया है कि सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के अनुसार जमीन अधिग्रहण के बाद किसान कुछ नहीं कर सकते, उन्हें मुआवजा राशि लेनी पड़ेगी। ऐसा नहीं होने पर सरकार जमीन पर कब्जा ले सकती है। सरकार के इस तानाशाही रवैये के कारण पहले एक किसान आत्महत्या कर चुका है। वह सरकार के इस फैसले के खिलाफ संघर्ष करेंगे। अपनी जमीनों में किसी को घुसने नहीं देंगे।