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महंगाई के बोझ से भारी होगा बच्चों का बस्ता
अमर उजाला, लुधियाना
Updated Thu, 21 Nov 2013 11:29 PM IST
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लुधियाना में महंगाई की मार से आम आदमी बुरी तरह त्रस्त है। वहीं अब बच्चों का स्कूली बस्ता भी महंगाई के बोझ से और महंगा हो जाएगा।
प्रिंटर्स ने एक दिसंबर से कापी, किताब, स्टेशनरी, बॉक्सेस इत्यादि की कीमतों में पंद्रह फीसदी तक का इजाफा करने की तैयारी कर ली है।
इसी के साथ चालू वित्त वर्ष में अब तक इन उत्पादों की कीमतों में 25 से तीस फीसदी तक का इजाफा आ चुका है। प्रिंटर्स का कहना है कि कागज के बेतहाशा बढ़ते दाम एवं अन्य इनपुट लागत में वृद्धि इसके कारण हैं। हालांकि कागज और इनपुट लागत के मुकाबले वृद्धि को ग्राहक पर नहीं डाला जा रहा है। इससे इंडस्ट्री दबाव में है।
ऑफसेट प्रिंटर्स एसोसिएशन (ओपीए) के प्रधान परवीन अग्रवाल ने कहा है कि कागज उद्योग ने रुपये की कमजोरी के कारण सितंबर में 12 फीसदी दाम बढ़ाए थे। अब एक दिसंबर से पंद्रह फीसदी कीमतें बढ़ाने का ऐलान कर दिया है।
इसका सीधा असर नोट बुक, गत्ते के डिब्बे, कापी किताब, स्टेशनरी और लेबल इत्यादि पर आएगा। उनका कहना है कि इस वृद्धि को ग्राहक पर डालने का प्रयास किया जाएगा।
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अग्रवाल ने कहा कि कागज मिलों का तर्क है कि लकड़ी की कीमतों में वृद्धि के अलावा केमिकल्स, एनर्जी और ट्रांसपोर्ट इत्यादि महंगी होने से दाम बढ़ाए जा रहे हैं।
साल में तीसरी बार महंगा हो रहा कागज : चोपड़ा
ओपीए के महासचिव कमल चोपड़ा का कहना है कि चालू साल में जनवरी के बाद कागज की कीमतों में तीसरी बार इजाफा किया जा रहा है। इसका असर स्कूल-कालेज जाने वाले बच्चों की कापी, किताब और स्टेशनरी पर आना तय है। उधर प्रिंटर रमित सक्सेना का कहना है कि दिसंबर की वृद्धि के बाद चालू साल में कापी किताब एवं स्टेशनरी उत्पादों की कीमतों में 25 से तीस फीसदी तक का उछाल हो जाएगा।
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प्रिंटर्स ने एक दिसंबर से कापी, किताब, स्टेशनरी, बॉक्सेस इत्यादि की कीमतों में पंद्रह फीसदी तक का इजाफा करने की तैयारी कर ली है।
इसी के साथ चालू वित्त वर्ष में अब तक इन उत्पादों की कीमतों में 25 से तीस फीसदी तक का इजाफा आ चुका है। प्रिंटर्स का कहना है कि कागज के बेतहाशा बढ़ते दाम एवं अन्य इनपुट लागत में वृद्धि इसके कारण हैं। हालांकि कागज और इनपुट लागत के मुकाबले वृद्धि को ग्राहक पर नहीं डाला जा रहा है। इससे इंडस्ट्री दबाव में है।
ऑफसेट प्रिंटर्स एसोसिएशन (ओपीए) के प्रधान परवीन अग्रवाल ने कहा है कि कागज उद्योग ने रुपये की कमजोरी के कारण सितंबर में 12 फीसदी दाम बढ़ाए थे। अब एक दिसंबर से पंद्रह फीसदी कीमतें बढ़ाने का ऐलान कर दिया है।
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इसका सीधा असर नोट बुक, गत्ते के डिब्बे, कापी किताब, स्टेशनरी और लेबल इत्यादि पर आएगा। उनका कहना है कि इस वृद्धि को ग्राहक पर डालने का प्रयास किया जाएगा।
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अग्रवाल ने कहा कि कागज मिलों का तर्क है कि लकड़ी की कीमतों में वृद्धि के अलावा केमिकल्स, एनर्जी और ट्रांसपोर्ट इत्यादि महंगी होने से दाम बढ़ाए जा रहे हैं।
साल में तीसरी बार महंगा हो रहा कागज : चोपड़ा
ओपीए के महासचिव कमल चोपड़ा का कहना है कि चालू साल में जनवरी के बाद कागज की कीमतों में तीसरी बार इजाफा किया जा रहा है। इसका असर स्कूल-कालेज जाने वाले बच्चों की कापी, किताब और स्टेशनरी पर आना तय है। उधर प्रिंटर रमित सक्सेना का कहना है कि दिसंबर की वृद्धि के बाद चालू साल में कापी किताब एवं स्टेशनरी उत्पादों की कीमतों में 25 से तीस फीसदी तक का उछाल हो जाएगा।