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बैलगाड़ियों पर पाबंदी हटाने से दौड़ाकों में खुशी की लहर
ब्यूरो, अमर उजाला/लुधियाना
Updated Sat, 09 Jan 2016 10:21 PM IST
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बैलगाड़ी दौड़ के लिए अनुमति मिलने पर इतना उत्साह है कि जितना बेटे की शादी का नहीं होता। चार साल तक बैलगाड़ियाें की रोक से बैलगाड़ी दौड़ाने वाले जॉकियों का मन काफी उदास भी रहा, लेकिन बैलों को अपने बच्चों की तरह पालते रहे और खुराक भी पूरी दी। एक उम्मीद थी कि दौड़ फिर से शुरू होगी। बैल गाड़ियों की दौड़ किसी के लिए रोजगार का साधन तो किसी के लिए शौक है। यह विचार बैल दौड़ाकों ने केंद्र द्वारा पंजाब के किला रायपुर तथा कई अन्य राज्यों में होने वाली बैलगाड़ियों की दौड़ की अनुमति देने से भारी उल्लास के साथ प्रगट किए।
किला रायपुर के खेल मैदान में शनिवार को 40 के करीब बैल दौड़ाक पहुंचे और अपनी खुशी सांझा की। दौड़ाकों ने यह भी बताया कि वे मैदान में आने से पहले वाहेेगुरु का आशीर्वाद लेकर आए हैं। इस साल भी मिनी ओलंपिक के नाम से प्रचलित 80वां किला रायुपर खेल मेला 4 से 7 फरवरी को आयोजित किया जाएगा। बैलगाड़ी दौड़ को हरी झंडी मिलने से आयोजकों का उत्साह चरम पर है।
पिछली बार विदेशी खेल प्रेमी हुए थे मायूस
किला रायपुर खेल मेले के आयोजक गरेवाल स्पोर्ट्स क्लब के एग्जीक्यूटिव मेंबर जगबीर सिंह ग्रेवाल ने बताया कि पिछले वर्ष करवाई गई किला रायपुर खेल मेले में पहले दिन बैल गाड़ियों की टाइमिंग दौड़ करवाई गई थी। इससे बैल दौड़ाकों और दर्शकों में काफी उत्साह था। परंतु दूसरे ही दिन पुलिस की पाबंदी के चलते दौड़ नहीं हो पाई। स्पेशल बैलगाड़ियों की दौड़ देखने के लिए आने वाले विदेशी पर्यटकों को भी मायूस वापस लौटना पड़ा था। इस बार विदेशियों के इस मिनी ओलंपिक गेम्स में पहुंचनेे की उम्मीद है। जगबीर ने बताया कि राजस्थान से भी कुछ लोग बैल गाड़ियों की दौड़ देखने के लिए आ रहे हैं ताकि वहां पर बैलगाड़ी दौड़ कराने के लिए एसोसिएशन का सहयोग लिया जा सके।
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एनिमल हस्बेंडरी एंड वेटेरिनेरी डिपार्टमेंट की पूरी करेंगे शर्ते
गरेवाल स्पोर्ट्स एसोसिएशन (किला रायपुर) के जनरल सेक्रेटरी परमजीत ग्रेवाल तथा सरपरस्त सुरजीत ग्रेवाल ने बताया कि वह हर बार एनिमल हस्बेंडरी एंड वेटेरिनेरी डिपार्टमेंट की शर्तों को मानते हुए खेल करवातेे हैं। खेल के दौरान बैलों पर किसी तरह की कोई क्रूरता नहीं दिखाई जाती।
तीन पीढ़ियों से दौड़ा रहे हैं बैल
धमोट के गांव जंडाली के रहने वाले सुखपाल सिंह (32 वर्ष) ने बताया कि वह बीस साल से बैल दौड़ा रहे हैं। तीन पीढ़ियां लगातार बैल दौड़ाती आ रही हैं। बैलों को चने, बादाम, दूध, शहद, मक्खन आदि रोजाना खिलाते हैं। उनके बैल नारा ने अब तक 16 मोटर साइकिल, 2 फ्रिज, 1 नैनो कार तथा लाखों के कैश प्राइज भी जीते हैं। बैल गाड़ी दौड़ हमारे लिए रोजी रोटी है।
समराला के नजदीक गांव बलाला के रहने वाले जंग सिंह (44 वर्ष) ने बताया कि हमारे बुजुर्ग बैल गाड़ियां दौड़ाया करते थे और अब वे भी 1992 से बैल गाड़ी दौड़ा रहे हैं। केंद्र के इस फैसले से बहुत खुशी है। दौड़ पर पाबंदी लगने सेे मन बहुत हताश था। फिर भी रोजाना बैलों की सेवा करता।
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किला रायपुर के खेल मैदान में शनिवार को 40 के करीब बैल दौड़ाक पहुंचे और अपनी खुशी सांझा की। दौड़ाकों ने यह भी बताया कि वे मैदान में आने से पहले वाहेेगुरु का आशीर्वाद लेकर आए हैं। इस साल भी मिनी ओलंपिक के नाम से प्रचलित 80वां किला रायुपर खेल मेला 4 से 7 फरवरी को आयोजित किया जाएगा। बैलगाड़ी दौड़ को हरी झंडी मिलने से आयोजकों का उत्साह चरम पर है।
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पिछली बार विदेशी खेल प्रेमी हुए थे मायूस
किला रायपुर खेल मेले के आयोजक गरेवाल स्पोर्ट्स क्लब के एग्जीक्यूटिव मेंबर जगबीर सिंह ग्रेवाल ने बताया कि पिछले वर्ष करवाई गई किला रायपुर खेल मेले में पहले दिन बैल गाड़ियों की टाइमिंग दौड़ करवाई गई थी। इससे बैल दौड़ाकों और दर्शकों में काफी उत्साह था। परंतु दूसरे ही दिन पुलिस की पाबंदी के चलते दौड़ नहीं हो पाई। स्पेशल बैलगाड़ियों की दौड़ देखने के लिए आने वाले विदेशी पर्यटकों को भी मायूस वापस लौटना पड़ा था। इस बार विदेशियों के इस मिनी ओलंपिक गेम्स में पहुंचनेे की उम्मीद है। जगबीर ने बताया कि राजस्थान से भी कुछ लोग बैल गाड़ियों की दौड़ देखने के लिए आ रहे हैं ताकि वहां पर बैलगाड़ी दौड़ कराने के लिए एसोसिएशन का सहयोग लिया जा सके।
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एनिमल हस्बेंडरी एंड वेटेरिनेरी डिपार्टमेंट की पूरी करेंगे शर्ते
गरेवाल स्पोर्ट्स एसोसिएशन (किला रायपुर) के जनरल सेक्रेटरी परमजीत ग्रेवाल तथा सरपरस्त सुरजीत ग्रेवाल ने बताया कि वह हर बार एनिमल हस्बेंडरी एंड वेटेरिनेरी डिपार्टमेंट की शर्तों को मानते हुए खेल करवातेे हैं। खेल के दौरान बैलों पर किसी तरह की कोई क्रूरता नहीं दिखाई जाती।
तीन पीढ़ियों से दौड़ा रहे हैं बैल
धमोट के गांव जंडाली के रहने वाले सुखपाल सिंह (32 वर्ष) ने बताया कि वह बीस साल से बैल दौड़ा रहे हैं। तीन पीढ़ियां लगातार बैल दौड़ाती आ रही हैं। बैलों को चने, बादाम, दूध, शहद, मक्खन आदि रोजाना खिलाते हैं। उनके बैल नारा ने अब तक 16 मोटर साइकिल, 2 फ्रिज, 1 नैनो कार तथा लाखों के कैश प्राइज भी जीते हैं। बैल गाड़ी दौड़ हमारे लिए रोजी रोटी है।
समराला के नजदीक गांव बलाला के रहने वाले जंग सिंह (44 वर्ष) ने बताया कि हमारे बुजुर्ग बैल गाड़ियां दौड़ाया करते थे और अब वे भी 1992 से बैल गाड़ी दौड़ा रहे हैं। केंद्र के इस फैसले से बहुत खुशी है। दौड़ पर पाबंदी लगने सेे मन बहुत हताश था। फिर भी रोजाना बैलों की सेवा करता।