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उधार नहीं दे पाया तो लगाया बेटी के रेप का आरोप
अमर उजाला, मालेरकोटला (संगरूर)
Updated Sun, 12 Jan 2014 10:02 PM IST
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कर्ज के एक लाख रुपये नहीं लौटाने के लिए एक शख्स ने अपने पड़ोसी को अपनी ही बेटी के रेप और गर्भपात के संगीन मामले में फंसा दिया। मामला चार महीने पहले का है।
पुलिस ने आरोपी 21 वर्षीय युवक को जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया था। शुक्रवार को अदालत ने युवक को बाइज्जत बरी कर दिया।
रविवार को पत्रकारवार्ता में पीड़ित के वकील सैयद शब्बीह हैदर ने बताया कि 18 अगस्त 2013 को सिटी पुलिस ने पत्थर का काम करने वाले 21 वर्षीय नौजवान के खिलाफ एक 16 वर्षीय नाबालिग लड़की का रेप करने, उसे जान से मार डालने की धमकियां देने और उसका गर्भपात करने की संगीन धाराओं (376, 312, 313, 506 और सेक्शन 4 चाइल्ड सेक्स एक्ट) का पर्चा दर्ज करके गिरफ्तार किया था।
मामला दर्ज होने के बाद युवक का परिवार भारी सदमे में था। युवक की पत्नी को विश्वास था कि उसका पति बेकसूर है। अहमदगढ़ पुलिस ने युवक के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किए तो मामला जिला सत्र न्यायधीश वरिंदर अग्रवाल की फास्ट ट्रैक कोर्ट में पहुंचा।
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केस के शुरुआती दिनों में ही यह साबित कर दिया गया कि आरोप लगाने वाली लड़की बालिग है। अदालत में पेश किए गए तथ्यों को मीडिया के सामने रखते हुए एडवोकेट हैदर ने बताया कि अदालत में यह भी साबित हुआ कि पीड़िता का गर्भ किसी डॉक्टर की मदद के बिना नहीं गिराया जा सकता था, इसलिए दवा से गर्भ गिराने के आरोप भी झूठे साबित हुए हैं।
अदालत को बताया गया कि युवक ने आरोप लगाने वाली लड़की के पिता से एक लाख रुपये लेने हैं जिन्हें वापस मांगने पर उसे इस संगीन मामले में फंसा दिया गया। जिस जगह रेप का वाकया बताया गया है, वह बेहद घनी आबादी का क्षेत्र है। अदालत ने यह स्वीकार किया कि रेप-गर्भपात के आरोप झूठे हैं, इसलिए अदालत ने संजय को बाइज्जत रिहा करने के आदेश सुनाए हैं।
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पुलिस ने आरोपी 21 वर्षीय युवक को जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया था। शुक्रवार को अदालत ने युवक को बाइज्जत बरी कर दिया।
रविवार को पत्रकारवार्ता में पीड़ित के वकील सैयद शब्बीह हैदर ने बताया कि 18 अगस्त 2013 को सिटी पुलिस ने पत्थर का काम करने वाले 21 वर्षीय नौजवान के खिलाफ एक 16 वर्षीय नाबालिग लड़की का रेप करने, उसे जान से मार डालने की धमकियां देने और उसका गर्भपात करने की संगीन धाराओं (376, 312, 313, 506 और सेक्शन 4 चाइल्ड सेक्स एक्ट) का पर्चा दर्ज करके गिरफ्तार किया था।
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मामला दर्ज होने के बाद युवक का परिवार भारी सदमे में था। युवक की पत्नी को विश्वास था कि उसका पति बेकसूर है। अहमदगढ़ पुलिस ने युवक के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किए तो मामला जिला सत्र न्यायधीश वरिंदर अग्रवाल की फास्ट ट्रैक कोर्ट में पहुंचा।
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केस के शुरुआती दिनों में ही यह साबित कर दिया गया कि आरोप लगाने वाली लड़की बालिग है। अदालत में पेश किए गए तथ्यों को मीडिया के सामने रखते हुए एडवोकेट हैदर ने बताया कि अदालत में यह भी साबित हुआ कि पीड़िता का गर्भ किसी डॉक्टर की मदद के बिना नहीं गिराया जा सकता था, इसलिए दवा से गर्भ गिराने के आरोप भी झूठे साबित हुए हैं।
अदालत को बताया गया कि युवक ने आरोप लगाने वाली लड़की के पिता से एक लाख रुपये लेने हैं जिन्हें वापस मांगने पर उसे इस संगीन मामले में फंसा दिया गया। जिस जगह रेप का वाकया बताया गया है, वह बेहद घनी आबादी का क्षेत्र है। अदालत ने यह स्वीकार किया कि रेप-गर्भपात के आरोप झूठे हैं, इसलिए अदालत ने संजय को बाइज्जत रिहा करने के आदेश सुनाए हैं।