जगरांव में हादसा: नशे में धुत ड्राइवर चला रहा था स्कूल बस, पेड़ से टकराई, मासूम की मौत, पांच छात्र जख्मी
निजी स्कूल की वैन बच्चों को लेकर जा रही थी। वैन की रफ्तार तेज थी। रायकोट रोड पर वैन एक पेड़ से टकरा गई और एक बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई। गुस्साए लोगों ने धरना लगा दिया।
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नशे में धुत स्कूल बस के ड्राइवर ने मंगलवार सुबह बच्चों से भरी बस बरनाला जांलधर हाईवे पर रायकोट के पास एक पेड़ में दे मारी। हादसा इतना जबरदस्त था कि स्कूल बस का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया। हादसे में एक सात साल के बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांच बच्चे घायल हो गए। उन्हें राहगीरों ने तुरंत रायकोट रोड पर बने प्राइवेट अस्पताल में दाखिल करवाया। मृतक बच्चे की पहचान गुरमन सिंह निवासी गांव अखाडा के रूप में हुई है। घायलों की पहचान आकाशदीप कौर, सुखमन सिंह, गुरलीन कौर, अर्शदीप कौर और गुरसाहिब सिंह के रूप में हुई हैं। पांचों घायलों का प्राइवेट अस्पताल में इलाज चल रहा है। हादसे के बाद हाईवे पर वाहनों की लाइनें लगने से जाम लग गया।
घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने जाम खुलवाया। उधर, जैसे ही सूचना बच्चों के परिजनों को मिली तो वे मौके पर पहुंचने शुरू हो गए। इस दौरान बच्चे का शव देखकर परिजनों समेत गांव निवासियों का गुस्सा भड़क गया। माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया, जब परिजनों को पता चला कि ड्राइवर ने नशा किया हुआ था। इसके बाद परिजनों ने शव को सड़क पर रखकर जाम लगा दिया। परिजनों का आरोप था कि उन्होंने कई बार पेरेंट्स टीचर मीटिंग में ड्राइवर बदलने के लिए स्कूल प्रिंसिपल को कई बार कहा था। अभिभावकों का आरोप है कि ड्राइवर नशे का आदी है। इसको बदला जाए, लेकिन स्कूल प्रशासन ने ड्राइवर को नहीं बदला। इतना ही नहीं, 65 साल के ड्राइवर के पास लाइसेंस तक नहीं था।
स्कूल की लापरवाही के कारण ही उनके बच्चे की जान गई है। वहीं इस संबंधी मामला मंत्री के पास पहुंच गया, जिन्होंने दो दिन में पूरे मामले संबंधी एसडीएम से रिपोर्ट मांग ली। करीब छह घंटे लगे धरने के बाद पुलिस ने स्कूल मैनेजमेंट, प्रिंसिपल व ड्राइवर पर मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी। इस दौरान एसडीएम गुरबीर सिंह कोहली ने परिवार के साथ बात कर डीसी कोटे से परिवार को एक लाख का चेक आर्थिक मद्द के रूप में देकर कहा कि बाकी सरकार की तरफ से भी परिवार की मदद की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस तरह के हादसे न हो। इसलिए दो दिन मुहिम चलाकर स्कूल बसों की जांच की जाएगी। वहीं स्कूल की तरफ से 2 दिन की छुट्टी का एलान किया गया है।
मन अत्यंत व्यथित हो जाता है, जब अपने ही जिगर का टुकड़ा दूर हो जाए। स्कूल में पढ़ने भेजे बच्चे की मौत की पता चलते ही अभिभावकों का रो-रोकर बुरा हाल है। स्कूल प्रशासन के खिलाफ गुस्सा तो है ही, साथ ही मन में कूड़ता एक सवाल भी है। उनका कहना है कि अपने बच्चे को सुबह तैयार करके स्कूल में पढ़ने भेजा था। मालूम नहीं था कि उनका जिगर का टुकड़ा अब लौटेगा ही नहीं। नहीं मालूम था कि आज आखिरी बार उसका स्कूल बैग पैक कर रहे हैं, नहीं मालूम था कि आज आखिरी बार अपने जिगर के टुकड़े के लिए लंच बॉक्स पैक कर रहे हैं। नहीं मालूम था उनके साथ कुछ ऐसा भी हो जाएगा, जिसकी कभी कल्पना ही नहीं की होगी। आंखाें में आंसू और मन में गुस्सा लिए अभिभावकों को कुछ समझ नहीं आ रहा कि अब करें तो क्या करें।