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सऊदी अरब में आंखों की रोशनी गंवाने वाला युवक तरस रहा
Updated Mon, 17 Jul 2017 10:20 PM IST
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विदेश में गंवाई आंखों की रोशनी, अब प्रशासन की बेरुखी से निराश
- आर्थिक सहायता को डीसी कार्यालय के चक्कर काट रहा है गांव सरदारगढ़ का मनप्रीत
अमर उजाला ब्यूरो
बठिंडा।
अपना भविष्य संवारने सऊदी अरब गए गांव सरदारगढ़ निवासी युवक के आंखों की रोशनी एक हादसे में चली गई। फैक्ट्री में काम करने समय हुए ब्लास्ट के कारण वह दृष्टिहीन हो गया, लेकिन इलाज कराने का झांसा देकर उसे करीब दो माह तक एक कमरे में बंद रखा गया। इस बीच न तो उसकी आर्थिक मदद की गई और न ही उसका इलाज हो सका। आखिरकार किसी प्रकार वह भारत लौटा। अब वह इलाज के लिए जरूरी आर्थिक सहायता की मांग को लेकर डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के चक्कर काट रहा है। उनका कहना है कि तमाम प्रयासों के बावजूद अधिकारियों ने अभी तक उसकी सुध नहीं ली है।
22 वर्षीय पीड़ित मनप्रीत सिंह ने बताया कि वह नौकरी के सिलसिले में साल 2015 में सऊदी अरब गया था। वहां उसने एक प्राइवेट कंपनी में काम करना शुरू किया। इसी बीच फैक्ट्री में हुए धमाके में उसे गंभीर चोट आई। हादसे ने उसके आंखों की रोशनी छीन ली। वह किसी प्राकर अगस्त 2016 में वापस घर लौटा। युवक ने बताया कि उसका उपचार करवाने के लिए परिजनों ने नाते रिश्तेदारों से कर्ज ले रखा है, लेकिन अब मदद करने से रिश्तेदार भी पीछे हट चुके हैं। इस समय उसका उपचार पीजीआई (चंडीगढ़ )में चल रहा है। पीड़ित युवक ने आरोप लगाया है कि इलाज के मामले में आर्थिक सहायता के लिए उसने जिले के डिप्टी कमिश्नर को एक पत्र सौंपा था, लेकिन आज तक उसे प्रशासन की ओर से कोई सहायता नहीं मिली।
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- आर्थिक सहायता को डीसी कार्यालय के चक्कर काट रहा है गांव सरदारगढ़ का मनप्रीत
अमर उजाला ब्यूरो
बठिंडा।
अपना भविष्य संवारने सऊदी अरब गए गांव सरदारगढ़ निवासी युवक के आंखों की रोशनी एक हादसे में चली गई। फैक्ट्री में काम करने समय हुए ब्लास्ट के कारण वह दृष्टिहीन हो गया, लेकिन इलाज कराने का झांसा देकर उसे करीब दो माह तक एक कमरे में बंद रखा गया। इस बीच न तो उसकी आर्थिक मदद की गई और न ही उसका इलाज हो सका। आखिरकार किसी प्रकार वह भारत लौटा। अब वह इलाज के लिए जरूरी आर्थिक सहायता की मांग को लेकर डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के चक्कर काट रहा है। उनका कहना है कि तमाम प्रयासों के बावजूद अधिकारियों ने अभी तक उसकी सुध नहीं ली है।
22 वर्षीय पीड़ित मनप्रीत सिंह ने बताया कि वह नौकरी के सिलसिले में साल 2015 में सऊदी अरब गया था। वहां उसने एक प्राइवेट कंपनी में काम करना शुरू किया। इसी बीच फैक्ट्री में हुए धमाके में उसे गंभीर चोट आई। हादसे ने उसके आंखों की रोशनी छीन ली। वह किसी प्राकर अगस्त 2016 में वापस घर लौटा। युवक ने बताया कि उसका उपचार करवाने के लिए परिजनों ने नाते रिश्तेदारों से कर्ज ले रखा है, लेकिन अब मदद करने से रिश्तेदार भी पीछे हट चुके हैं। इस समय उसका उपचार पीजीआई (चंडीगढ़ )में चल रहा है। पीड़ित युवक ने आरोप लगाया है कि इलाज के मामले में आर्थिक सहायता के लिए उसने जिले के डिप्टी कमिश्नर को एक पत्र सौंपा था, लेकिन आज तक उसे प्रशासन की ओर से कोई सहायता नहीं मिली।
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