पंजाब में महापंचायत : किसान नेता बोले-अब कॉरपोरेट वर्सेज आमजन बन गया है किसान आंदोलन, अब ये पूरे देश में फैलेगा
- तीन कृषि कानूनों के खिलाफ सरहिंद की अनाज मंडी में महापंचायत का आयोजन
- किसान नेताओं ने केंद्र सरकार पर निकाली भड़ास
- आरोप, सरकार किसान आंदोलन पर लोगों को कर रही है भ्रमित
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तीन कृषि कानूनों के खिलाफ सरहिंद की अनाज मंडी में महापंचायत का आयोजन किया गया। इसमें किसान नेताओं ने केंद्र सरकार पर जमकर भड़ास निकाली। नेताओं ने कहा कि किसान आंदोलन अब कॉरपोरेट वर्सेज आमजन बन गया है। केंद्र के अड़ियल रवैये के खिलाफ इसे शांतिपूर्ण ढंग से पूरे देश में फैलाया जाएगा और जिन राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, वहां किसान मोर्चे के नेता भाजपा के खिलाफ प्रचार करने पहुंचेंगे।
महापंचायत में पहुंचे संयुक्त मोर्चे के नेता गुरनाम सिंह चढूनी, दर्शनपाल सिंह व बलबीर सिंह राजेवाल ने मंच से साफ किया कि सियासी फ्रंट बनाए जाने की बात मोर्चे को बदनाम करने के लिए राजनीतिक पार्टियों द्वारा फैलाई जा रही है। जबकि मोर्चे का ऐसा कोई विचार नहीं है।
महापंचायत में हजारों किसान, मजदूर, आढ़ती पहुंचे। संयुक्त किसान मोर्चे के वरिष्ठ नेताओं के साथ फिल्म अदाकार योगराज सिंह, पंजाबी गायक तरसेम जस्सड़, रेशम अनमोल और पम्मी बाई आदि मौजूद रहे। किसान नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि कृषि कानूनों के विरोध में 26 मार्च को भारत बंद करवाया जा रहा है क्योंकि सरकार किसानों की बात सुनना ही नहीं चाहती। उल्टे वह अपने चहेतों के जरिए किसान आंदोलन पर लोगों को भ्रमित कर रही है और हमारी साख बिगाड़ने में जुटी है। इसलिए संयुक्त मोर्चे ने फैसला लिया है कि किसान आंदोलन को अब शांतिपूर्वक ढंग से आगे लेकर जाएंगे।
उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन में राजनीतिक मंशा की कोई जगह नहीं है। यह अकेले किसानों का नहीं, आमजन का आंदोलन है। केंद्र सरकार किसानों की उपज को कॉरपोरेट घरानों के गोदामों में बंद कर इसे लोगों को महंगे दाम में बेचना चाहती है। इसके लिए एफसीआई को तोड़ने की कोशिशें चल रहीं हैं और किसानों की जमीनों का रिकार्ड मांगा जा रहा है। संयुक्त मोर्चा इसी का विरोध कर रहा है। राजेवाल ने कहा कि बंगाल के 92 फीसदी किसान हमारे आंदोलन की भावना को समझते हैं। इसलिए वहां के नतीजे हमारे लिए निर्णायक होंगे।
गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि हम पूरे भारत में महापंचायत कर रहे हैं। इसके बाद पश्चिम बंगाल में चुनाव का माहौल ही बदल गया है। वहां के लोगों ने किसानों की बात को ध्यान से सुना है और उनकी परेशानी को समझा है। इसके बाद पश्चिम बंगाल में बीजेपी की हार तय हो गई है। जहां तक दिल्ली किसान आंदोलन की बात है, यह जितना लंबा चलेगा हम चलाएंगे।
सरकार एमएसपी से भाग रही है और एफसीआई द्वारा किसानों की जमीनों का रिकार्ड मांगा जा रहा है। ऐसा पहले हरियाणा में भी हुआ है। सरकार लास्ट लॉस के नाम पर किसानों की फसल के दाम गिराकर खरीदना चाहती है। यह शब्द ही हमने पहली बार सुना है। इससे जाहिर है कि सरकार कॉरपोरेट घरानों की भाषा बोल रही है। फसल खरीद पर कई ऐसी शर्तें लगा दी गई हैं, जिससे किसान अपनी फसल कम दाम में बेचने को मजबूर हो जाए।
सभी 32 किसान जत्थेबंदियां संभालें पंजाब की कमान
इस दौरान कलाकार योगराज सिंह ने कहा कि 31 जत्थेबंदियां खुद पंजाब की कमान संभालें, ताकि सरकारों के कान खोले जा सकें। उन्होंने पंडाल में बैठे किसानों से पूछा कि जब यह खेती कानून नहीं थे तो क्या किसान खुश थे, अगर यह कानून वापस होते हैं तो क्या किसान खुश होंगे? इस पर सबने हाथ उठाकर उनकी बात का समर्थन किया। तब उन्होंने कहा कि सभी 31 किसान जत्थेबंदियों से गुजारिश है कि वह पंजाब का नेतृत्व करें।
किसान नेता दर्शनपाल सिंह ने कहा कि किसान आंदोलन पूरे देश में केंद्र की अड़ियल सरकार के खिलाफ बगावत के सुर पैदा करेगा और आने वाले समय में यह जन आंदोलन बनकर उभरेगा। इसके लिए 26 मार्च को भारत बंद किया जा रहा है मतलब उस दिन रेल, बस, दूध, ट्रांसपोर्ट, कारोबार सब कुछ बंद रहेगा। इसके बाद 27-28 को आगे की रणनीति बनाई जाएगी।