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स्वस्थ नहीं है सेना का नन्हा मददगार: रोज शुगर की दवा खाकर जाता था सैनिकों के पास, सम्मान के बाद बहुत कुछ बदला

Thu, 29 May 2025 08:39 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो अनिल कुमार, संवाद, फिरोजपुर (पंजाब)
अनिल कुमार, संवाद, फिरोजपुर (पंजाब) Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो Updated Thu, 29 May 2025 08:39 PM IST
सार

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सेना की मदद करने वाले फिरोजपुर के 10 वर्षीय सरवन सिंह को देश के सबसे कम उम्र के सिविल वॉरियर के रूप में सम्मानित किया गया है। ममदोट के सरहदी गांव तरावाली के सरवन सिंह को  मेजर जनरल रणजीत सिंह मनराल (जीओसी-7 इन्फेंट्री) ने सम्मानित किया।

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Army Little helper sarwan singh has diabetes
पिता के साथ श्रवण - फोटो : संवाद

विस्तार

भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष के दौरान सेना के जवानों तक खाने पीने का सामान पहुंचाने वाले सबसे कम उम्र के नागरिक योद्धा (सिविल डिफेंस) 10 वर्षीय सरवन सिंह के हौसले की हर जगह चर्चा हो रही है। 

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फिरोजपुर के गांव तरांवाली (चक अमरीक सिंह वाला, ममदोट) के रहने वाले सरवन के पिता सोना सिंह ने बताया कि संघर्ष के दौरान ज्यादातर सरहदी गांव खाली हो गए थे और छोटे बच्चे धमाकों की आवाज व ब्लैकआउट से सहमे हुए थे, वहीं सरवन अकेला सरहद पर तैनात फौजियों के लिए जरूरत का सामान देने जाता था। 

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डायबिटीज का मरीज है सरवन

पिता ने बताया कि उसे शुगर की बीमारी है। वह दवा खाकर सरहद पर सामान देने पहुंचता था। उल्लेखनीय है कि सरवन के इसी जज्बे और हौसले को देखते हुए सातवीं इन्फैंट्री के मेजर जनरल रणजीत सिंह मनराल ने बुधवार को उसे विशेष पुरस्कार देकर सम्मानित किया था। जब तक सेना तैनात रही, सरवन रोज सरहद पर जाता रहा। वह चौथी कक्षा का विद्यार्थी है और सरकारी स्कूल में पढ़ता है। 

अकेला ही गया था जवानों के बीच

सरवन ने बताया कि उसने जब सरहद पर तोपें व टैंक देखे तो वह डरा नहीं, बल्कि रोमांच से भर गया और एक दिन अकेला ही जवानों के बीच पहुंच गया। उसे फौजियों ने प्यार किया और खाने को बिस्कुट दिए। बस यहीं से सरवन की फौजियों से दोस्ती हो गई। इस दौरान गर्मी बहुत थी, इसलिए सरवन जवानों के लिए घर से बर्फ, लस्सी, ठंडा पानी, दूध, चाय-बिस्किट और सब्जी-रोटी लेकर जाने लगा। फौजियों को युद्ध के मैदान में लड़ता देख सरवन भी फौज में जाकर देश की सेवा करना चाहता है।

गांव के लोग भी गाैरवान्वित

पिता सोना सिंह बताते हैं कि जब सरवन फौजियों के लिए घर से सामान लेकर जाने लगा, तो हमें भी अच्छा लगा। उसकी ये सेवा देख खुशी हुई। गांव के लोग भी जवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर उनकी मदद कर रहे थे। जब दोनों देशों के बीच स्थिति सामान्य हुई तो उनके घर सातवीं इन्फैंट्री के जवान गाड़ी लेकर पहुंचे और कहा कि सरवन को उनके वरिष्ठ अधिकारी ने ममदोट हाल में सम्मानित करेंगे। ये सुनकर उन्हें बहुत गर्व हुआ। सरवन कहता है सम्मानित होने के बाद स्कूल के शिक्षक उसे ज्यादा प्यार करने लगे हैं। 

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