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जालंधर में स्वाइन फ्लू ने दी दस्तक, महिला की मौत
नरिंदर वैद्य/अमर उजाला, जालंधर
Updated Sun, 07 Feb 2016 06:33 PM IST
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बीते साल स्वाइन फ्लू के चलते कई लोगों की मौत हो गई थी। वहीं अब दोबारा इस बीमारी ने जिले में दस्तक दे दी है।
शनिवार रात को शहर की रहने वाली एक महिला की स्वाइन फ्लू से मौत हो गई। महिला को शुक्रवार खांसी बुखार के चलते एक प्राइवेट अस्पताल में दाखिल कराया गया था।
शनिवार को स्वाइन फ्लू के शक में महिला का टेस्ट करवाया गया। शनिवार देर रात को महिला को स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो गई, लेकिन देर रात उसकी मौत हो गई।
सिविल अस्पताल के सर्जन कैलाश कपूर का कहना है कि इस बीमारी से लोगों को बचाने के लिए अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड बना दिया है। अस्पताल में इस बीमारी को रोकने के लिए दवाएं भी उपलब्ध हैं। इस आइसोलेशन वार्ड की कमान नोडल अफसर कश्मीरी लाल को सौंपी गई है।
इस बीमारी से बचने के लिए सेहत विभाग की ओर से कुछ जानकारियां मुहैया करवाई गई हैं। इसके अनुसार जब भी खांसे तो मुंह पर हाथ या रुमाल जरूर रखें।
फ्लू के समय किसी से हाथ मिलाने से परहेज करें। बुखार आने पर घर पर आराम करें और पौष्टिक भोजन खाएं। बुखार से पीड़ित व्यक्ति का तौलिया और रुमाल का अलग ही रखें। बाहर से आने पर और खाना खाने से पहले हाथ अच्छी तरह धोएं। बच्चों को बुखार या खांसी हो तो उन्हें स्कूल न जाने दें।
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कफ व कोल्ड, लगातार खांसी आना, दवा खाने के बाद भी बुखार का तेज होते जाना, नाक का लगातार बहना, छीकें आना, नाक का जाम हो जाना, सिर में भयानक दर्द होना, मांसपेशियों में दर्द या अकड़न महसूस करना, गले में खराश का लगातार बढ़ते जाना, बहुत ज्यादा थकान महसूस करना और नींद का ना आना इस बिमारी के लक्षण हो सकते हैं।
इस बीमारी से बचने के लिए स्वाइन फ्लू की वैक्सीन उपलब्ध है। सीजन शुरू होने से पहले ही बच्चों, बुजुर्ग व गर्भवती महिलाओं को यह वैक्सीन दी जा सकती है।
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शनिवार रात को शहर की रहने वाली एक महिला की स्वाइन फ्लू से मौत हो गई। महिला को शुक्रवार खांसी बुखार के चलते एक प्राइवेट अस्पताल में दाखिल कराया गया था।
शनिवार को स्वाइन फ्लू के शक में महिला का टेस्ट करवाया गया। शनिवार देर रात को महिला को स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो गई, लेकिन देर रात उसकी मौत हो गई।
सिविल अस्पताल के सर्जन कैलाश कपूर का कहना है कि इस बीमारी से लोगों को बचाने के लिए अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड बना दिया है। अस्पताल में इस बीमारी को रोकने के लिए दवाएं भी उपलब्ध हैं। इस आइसोलेशन वार्ड की कमान नोडल अफसर कश्मीरी लाल को सौंपी गई है।
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इस बीमारी से बचने के लिए सेहत विभाग की ओर से कुछ जानकारियां मुहैया करवाई गई हैं। इसके अनुसार जब भी खांसे तो मुंह पर हाथ या रुमाल जरूर रखें।
फ्लू के समय किसी से हाथ मिलाने से परहेज करें। बुखार आने पर घर पर आराम करें और पौष्टिक भोजन खाएं। बुखार से पीड़ित व्यक्ति का तौलिया और रुमाल का अलग ही रखें। बाहर से आने पर और खाना खाने से पहले हाथ अच्छी तरह धोएं। बच्चों को बुखार या खांसी हो तो उन्हें स्कूल न जाने दें।
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कफ व कोल्ड, लगातार खांसी आना, दवा खाने के बाद भी बुखार का तेज होते जाना, नाक का लगातार बहना, छीकें आना, नाक का जाम हो जाना, सिर में भयानक दर्द होना, मांसपेशियों में दर्द या अकड़न महसूस करना, गले में खराश का लगातार बढ़ते जाना, बहुत ज्यादा थकान महसूस करना और नींद का ना आना इस बिमारी के लक्षण हो सकते हैं।
इस बीमारी से बचने के लिए स्वाइन फ्लू की वैक्सीन उपलब्ध है। सीजन शुरू होने से पहले ही बच्चों, बुजुर्ग व गर्भवती महिलाओं को यह वैक्सीन दी जा सकती है।