{"_id":"57a091794f1c1b512f2b8941","slug":"sunil-jakhar-congress-leader-captain-prime-minister-cm-badal-ferozepur-jalandhar-punjab","type":"story","status":"publish","title_hn":"कैप्टन सहित प्रमुख नेता दिल्ली जाने को तैयार : जाखड़","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कैप्टन सहित प्रमुख नेता दिल्ली जाने को तैयार : जाखड़
ब्यूरो/अमर उजाला, फिरोजपुर
Updated Tue, 02 Aug 2016 09:47 PM IST
विज्ञापन
सुनील जाखड़।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सतलुज-यमुना लिंक नहर के मुद्दे पर मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल पर हल्ला बोलते हुए प्रदेश कांग्रेस उपप्रधान एवं मुख्य प्रवक्ता सुनील जाखड़ ने कहा कि बादल की अध्यक्षता में बीते 1 मार्च को चंडीगढ़ में हुई मंत्रिमंडलीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस संबंध में अकाली-भाजपा मंत्रियों ने मुलाकात करने का फैसला लिया था।
लेकिन अब वह इसे सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन मामला बताते हुए कन्नी काट रहे हैं। जाहिर है कि बादल ने या तो एक मार्च को लोगों को बेवकूफ बनाने का प्रयत्न किया था या फिर अब बेवकूफ बना रहे हैं। यहां मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में जाखड़ ने कहा कि यदि अब भी बादल प्रधानमंत्री के समक्ष पानी का मुद्दा उठाकर पंजाब के हितों की रक्षा करने का इरादा रखते हों तो कैप्टन अमरिंदर सिंह सहित सभी प्रमुख कांग्रेस नेता उनके साथ दिल्ली जाने को तैयार हैं। हमारा मकसद पानी के मामले पर राजनीति करना नहीं बल्कि कभी पांच नदियों का प्रदेश कहे जाने वाले पंजाब के हितों की रक्षा करना है।
पंजाब में प्रशासकीय अव्यवस्था की चर्चा करते हुए जाखड़ ने कहा कि सरकार ने सुविधा केंद्रों की स्थापना के समय लंबे चौड़े दावे किए थे, लेकिन समुचित स्टाफ भर्ती न करने और अपेक्षित सुविधाएं उपलब्ध न करवाने के कारण लोग सुबह पांच बजे फाइलें उठाए लाइन में आ खड़े होते हैं और पांच घंटे बाद खाली हाथ लौट जाते हैं। सरकार ने गांवों में भी सुविधा केंद्रों के लिए करोड़ों रुपये की लागत से इमारतें खड़ी कर दीं, लेकिन आज तक काम शुरू नहीं हुआ।
विज्ञापन
खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत नीले कार्ड बनाने की प्रक्रिया का पूरी तरह राजनीतिकरण करने का आरोप लगाते हुए जाखड़ ने कहा कि पूरे प्रदेश से ऐसी शिकायतें प्राप्त हुईं जिनमें लोगों ने नीले कार्ड बनाने के लिए प्रार्थना पत्र जमा करवाए थे। उनमें से पचास प्रतिशत के भी कार्ड नहीं बने। कारण यह है कि जत्थेदारों और भाजपाइओं ने अपने घरों में बैठ कर चहेतों के ही कार्ड बनाए।
इस अवसर पर जाखड़ के नेतृत्व में कांग्रेस पार्षदों ने लगभग 1000 नागरिकों के प्रार्थना पत्र उपमंडल अधिकारी अमरजीत सिंह को सौंपते हुए आग्रह किया कि इनके नीले कार्ड बनाए जाएं क्योंकि अधिनियम की कसौटी पर खरा उतरने के बावजूद ये लोग नीले कार्डों से वंचित रह गए हैं।
विज्ञापन
लेकिन अब वह इसे सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन मामला बताते हुए कन्नी काट रहे हैं। जाहिर है कि बादल ने या तो एक मार्च को लोगों को बेवकूफ बनाने का प्रयत्न किया था या फिर अब बेवकूफ बना रहे हैं। यहां मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में जाखड़ ने कहा कि यदि अब भी बादल प्रधानमंत्री के समक्ष पानी का मुद्दा उठाकर पंजाब के हितों की रक्षा करने का इरादा रखते हों तो कैप्टन अमरिंदर सिंह सहित सभी प्रमुख कांग्रेस नेता उनके साथ दिल्ली जाने को तैयार हैं। हमारा मकसद पानी के मामले पर राजनीति करना नहीं बल्कि कभी पांच नदियों का प्रदेश कहे जाने वाले पंजाब के हितों की रक्षा करना है।
विज्ञापन
पंजाब में प्रशासकीय अव्यवस्था की चर्चा करते हुए जाखड़ ने कहा कि सरकार ने सुविधा केंद्रों की स्थापना के समय लंबे चौड़े दावे किए थे, लेकिन समुचित स्टाफ भर्ती न करने और अपेक्षित सुविधाएं उपलब्ध न करवाने के कारण लोग सुबह पांच बजे फाइलें उठाए लाइन में आ खड़े होते हैं और पांच घंटे बाद खाली हाथ लौट जाते हैं। सरकार ने गांवों में भी सुविधा केंद्रों के लिए करोड़ों रुपये की लागत से इमारतें खड़ी कर दीं, लेकिन आज तक काम शुरू नहीं हुआ।
विज्ञापन
खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत नीले कार्ड बनाने की प्रक्रिया का पूरी तरह राजनीतिकरण करने का आरोप लगाते हुए जाखड़ ने कहा कि पूरे प्रदेश से ऐसी शिकायतें प्राप्त हुईं जिनमें लोगों ने नीले कार्ड बनाने के लिए प्रार्थना पत्र जमा करवाए थे। उनमें से पचास प्रतिशत के भी कार्ड नहीं बने। कारण यह है कि जत्थेदारों और भाजपाइओं ने अपने घरों में बैठ कर चहेतों के ही कार्ड बनाए।
इस अवसर पर जाखड़ के नेतृत्व में कांग्रेस पार्षदों ने लगभग 1000 नागरिकों के प्रार्थना पत्र उपमंडल अधिकारी अमरजीत सिंह को सौंपते हुए आग्रह किया कि इनके नीले कार्ड बनाए जाएं क्योंकि अधिनियम की कसौटी पर खरा उतरने के बावजूद ये लोग नीले कार्डों से वंचित रह गए हैं।