फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Punjab ›   Jalandhar News ›   Sukhbir looking for lost ground on pretext of Jalandhar Lok Sabha by election

Jalandhar: लोकसभा उपचुनाव के बहाने खोई जमीन तलाश रहे सुखबीर, मैदान में उतर थपथपा रहे टकसाली नेताओं की पीठ

Wed, 01 Mar 2023 01:46 PM IST
नवीन दलाल सुरिंदर पाल, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, जालंधर (पंजाब) Published by: नवीन दलाल Updated Wed, 01 Mar 2023 01:46 PM IST
सार

शिरोमणि अकाली दल हमेशा पंथक वोट पर आधारित रहा है, जबकि भाजपा शहरी वोटरों पर, जिस कारण गठबंधन की तीन बार सरकार बनी, लेकिन 1997 के बाद यह पहली बार होगा कि शिरोमणि अकाली दल का भाजपा से गठबंधन नहीं है।

विज्ञापन
Sukhbir looking for lost ground on pretext of Jalandhar Lok Sabha by election
सुखबीर सिंह बादल। - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

जालंधर लोकसभा सीट के उपचुनाव सिर पर हैं और इनमें शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल पार्टी की खोई हुई जमीन तलाश रहे हैं। यही वजह है कि वह गली-गली जाकर टकसाली अकाली नेताओं को एकजुटता का पाठ पढ़ा रहे हैं। इसके अलावा वह धार्मिक स्थलों व डेरों की शरण में भी जा रहे हैं। पार्टी लगातार पंजाब में हाशिये पर चल रही है और अकाली दल के 100 साल के इतिहास में पार्टी का वोट बैंक शेयर बुरी तरह गिरकर 18 फीसदी पर आ चुका है। यही वजह है कि सुखबीर बादल ने खुद कमर कस रखी है।

विज्ञापन

 
पंजाब में 18 प्रतिशत तक पहुंच चुका है शिरोमणि अकाली दल का वोट शेयर
शिरोमणि अकाली दल हमेशा पंथक वोट पर आधारित रहा है, जबकि भाजपा शहरी वोटरों पर, जिस कारण गठबंधन की तीन बार सरकार बनी, लेकिन 1997 के बाद यह पहली बार होगा कि शिरोमणि अकाली दल का भाजपा से गठबंधन नहीं है और इस बार बसपा से गठबंधन कर वह मैदान में है। 2017 में भाजपा के साथ चुनाव लड़ने वाले शिरोमणि अकाली दल के हिस्से 25.2 फीसदी वोट और 15 सीटें आई थीं, शिअद का ग्राफ यहीं से तेजी से गिरना शुरू हुआ।
विज्ञापन


शिअद के कार्यकाल में बेअदबी की घटनाओं, गुरमीत राम रहीम को श्री अकाल तख्त साहब से माफी, बरगाड़ी में सिख संगत पर गोलियां चलाने की घटनाओं ने पंथक वोटरों में उसके प्रति गहरी नाराजगी पैदा कर दी। पंथक वोट शिअद से बुरी तरह से खिसका और पिछले साल विधानसभा चुनाव में अकाली दल महज तीन सीटों पर ही आकर अटक गया। 2019 में भी शिअद लोकसभा चुनाव में दो सीटों पर सिमट गया था, जिसमें सुखबीर व उनकी पत्नी हरसिमरत कौर बादल ही चुनाव जीत पाए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


2022 के विधानसभा चुनाव में शिरोमणि अकाली दल का वोट शेयर घटकर 18.36 फीसदी रह गया। सीटें भी सिर्फ तीन ही आईं। पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में प्रकाश सिंह बादल, सुखबीर सिंह बादल और बिक्रम सिंह मजीठिया जैसे दिग्गज भी चुनाव हार गए।

कांग्रेस का रहा दबदबा

1952 में गठित पहली लोकसभा में जालंधर के सांसद कांग्रेस के पंडित अमरनाथ थे। इसके बाद 1977 तक इस सीट पर कांग्रेस का ही दबदबा रहा। 1977 में पहली बार अकाली दल के इकबाल सिंह ढिल्लों जीते, जो विदेश मंत्री रहे। यही वह दौर था, जब पहला गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री भी बना था। 1989 में इंद्र कुमार गुजराल इस सीट से दूसरे गैर कांग्रेसी सांसद थे। वह 1998 में भी इस सीट से सांसद रहे।

शिअद ने 2009 में हंस राज हंस को उम्मीदवार बनाया
1996 में शिरोमणि अकाली दल के दरबारा सिंह ने जालंधर लोकसभा से जीत हासिल की। वह पहले ऐसे सांसद बने, जिन्हें विपक्ष में बैठना पड़ा। 1999 में कांग्रेस के बलबीर सिंह ने निकटतम प्रतिद्वंद्वी शिअद की प्रभजोत कौर को शिकस्त दी। 2004 में पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल के बेटे नरेश गुजराल को शिअद ने मैदान में उतारा था, जिन्हें हराकर कांग्रेस के राणा गुरजीत सिंह संसद पहुंचे। शिअद ने 2009 में हंस राज हंस को उम्मीदवार बनाया था, जो सिख वोट पाने में नाकाम रहे। मोहिंदर सिंह केपी ने कांग्रेस के टिकट से जीत का परचम लहराया।

फिर 2014 में मोदी लहर के बीच भी अकाली दल बादल व भाजपा के संयुक्त उम्मीदवार पवन कुमार टीनू को 70981 वोटों से हराकर संतोख सिंह चौधरी ने कांग्रेस का दबदबा जारी रखा। 2019 में भी जालंधर लोकसभा सीट कांग्रेस के खाते में गई और चौधरी संतोख सिंह ने अकाली दल भाजपा के संयुक्त उम्मीदवार चरणजीत सिंह अटवाल को हराया था। देश को एक प्रधानमंत्री और दो-दो विदेश मंत्री देने वाली लोकसभा सीट जालंधर में ऐसा भी केवल चार ही बार हुआ है, जब यहां गैर कांग्रेसी सांसद रहा हो।

जालंधर से इकबाल सिंह ढिल्लों, आईके गुजराल, दरबारा सिंह और बलबीर सिंह ऐसे सांसद थे, जो कांग्रेस के खिलाफ जीते। इन चार मौकों को छोड़ दिया जाए तो 1951 से अब तक के चुनावी इतिहास में इस सीट पर कांग्रेस ही काबिज रही, भले ही देश में किसी भी पार्टी की हवा रही हो।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed