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Jalandhar News: नए अकाली दल में धार्मिक व पंथक नेताओं को तरजीह

Fri, 10 Oct 2025 08:29 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 10 Oct 2025 08:29 PM IST
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Religious and sectarian leaders are given preference in the new Akali Dal.
-श्री गुरुनानक देव जी के 17वें वंशज को सरप्ररस्त बनाकर पंथक राजनीति की शुरुआत
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सुरिंदर पाल
जालंधर। शिरोमणि अकाली दल (पुनगर्ठित) के प्रधान ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने संगठनात्मक ढांचे में चार संरक्षक (सरपरस्त) नियुक्त किए गए हैं। इनमें बाबा सर्बजोत सिंह बेदी, बाबा सेवा सिंह रामपुर खेड़ा, श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार प्रो. मंजीत सिंह और रविंदर सिंह का नाम रखा गया है। इससे अकाली दल दोबारा पंथक व धार्मिक रास्ते की राह पर चल पड़ा है।
सियासी माहिरों का कहना है कि यह पहली बार है कि श्री गुरुनानक देव जी के 17वें वंशज बाबा सर्बजोत बेदी जो अभी तक संत समाज की सरपरस्ती करते आ रहे थे और अब राजनीतिक पार्टी के संरक्षक बने हैं। उनका संत समाज व पंथ में काफी सत्कार है। वहीं बाबा सेवा सिंह रामपुर खेड़ा सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद हैं जो खडूर साहिब स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारों के जीर्णोद्धार और रखरखाव में सक्रिय हैं। बाबा सेवा सिंह को 2004 में गुरु गोबिंद सिंह फाउंडेशन सेवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वृक्षारोपण अभियान की शुरुआत उन्होंने 1999 में की थी। अब तक पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली और मुंबई में सड़कों के किनारे, शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर 6.5 लाख से अधिक पेड़ लगाए जा चुके हैं।
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अब तक लगभग 10,000 की संख्या में बरगद और पीपल जैसे पारंपरिक वृक्ष लगाए जा चुके हैं। भारत सरकार ने उन्हें 2010 में पर्यावरण और सामाजिक सशक्तीकरण के क्षेत्र में निस्वार्थ सेवा के लिए प्रतिष्ठित पद्मश्री से सम्मानित किया था लेकिन किसानी आंदोलन के दौरान उन्होंने पद्मश्री लौटा दिया था। बाबा सेवा सिंह रामपुर खेड़ा एक अंतरराष्ट्रीय हस्ती हैं जिनको नवंबर 2009 में लंदन में विंडसर समारोह के दौरान उन्हें सम्मानित किया।
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भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने उन्हें 2011 में कैपिटल फाउंडेशन जस्टिस कुलदीप सिंह पुरस्कार प्रदान किया। पंजाब के मुख्यमंत्री ने 15 अगस्त 2011 को अमृतसर में 65वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान उन्हें सामाजिक सेवा के लिए राज्य पुरस्कार से सम्मानित किया। ऐसे समाज सेवी को पार्टी का संरक्षक लगाकर ज्ञानी हरप्रीत सिंह संत सीचेवाल की टक्कर के सेवक को पार्टी के भीतर शामिल करवाया है।

वहीं संरक्षक प्रो मंजीत सिंह श्री अकाल तख्त साहब के कार्यकारी जत्थेदार रह चुके हैं। उनको एसजीपीसी ने 2003 में तत्कालीन सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को सिरोपा देने के बाद उठे विवाद के बाद हटा दिया गया था। वह भी सिख समाज की नामचीन शख्सियत है।

पंथक वोटों की नाराजगी झेल रहा शिअद
शिरोमणि अकाली दल बादल लगातार पंथक वोटों की नाराजगी झेल रहा था और पंथक वोट पार्टी से दूर चला गया था। यही वजह थी कि अकाली दल 2022 में उन विधानसभा क्षेत्रों में काफी पीछे रह गया जो पंथक वोटरों का गढ़ माने जाते थे। अकाली दल बादल की पंथक इलाके खडूर साहब, पट्टी, तरनतारन, खेमकरण जैसे हलकों में बुरी तरह से हार गया। इतना ही माझा की तमाम सीटों पर हार देखनी पड़ी, जहां पंथक वोट जीत हार का फैसला करते हैं। सिर्फ मजीठा से गनीव कौर जीतने में कामयाब रही।
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