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अमेरिका में मंदी की आहट: आधी पगार पर काम करने को मजबूर पंजाबी मूल के लोग, एक झटके में चली गईं 80 लाख नौकरियां
Sun, 21 May 2023 09:29 AM IST
शाहरुख खान
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 21 May 2023 09:29 AM IST
सार
अमेरिका में एक स्टोर की मैनेजर मंजीत कौर संघा का कहना है कि बेरोजगारी काफी बढ़ गई है। सरकार का सख्त नियम है कि कम से कम 15 डॉलर प्रति घंटा सैलरी दी जाए फिर भी आधी पगार पर लोग काम कर रहे हैं। उन्हें नकद भुगतान कर पैसा बचाया जा रहा है।
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विस्तार
दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका में मंदी की आहट से भारतीय मूल के लोग भी प्रभावित हो रहे हैं। वहां लाखों भारतीयों में सबसे अधिक पंजाब मूल के लोग हैं, जिनमें अधिकांश मजदूरी करते हैं। इन लोगों को आधी मजदूरी पर काम करना पड़ रहा है। अमेरिका में करीब 5 लाख सिख रह रहे हैं, जबकि भारतीय मूल के लोगों की संख्या 47 लाख के करीब है।
अमेरिका में 7.5 डॉलर प्रति घंटा की मजदूरी पर श्रमिक आसानी से उपलब्ध हैं। अमेरिका में भी सबसे ज्यादा मजदूरी कैलिफोर्निया राज्य में मिलती रही है, अब वहां पर भी कम पगार में श्रमिक मिलने लगे हैं। पहले एक घंटे के 14 डॉलर और 8 घंटे के 112 डॉलर मिलते थे।
अमेरिका में होटल सफाई करने वाले लोगों की सैलरी सालाना 25000 से 30000 डॉलर होती है, जो भारतीय रुपये में लगभग 25 लाख रुपये है लेकिन पिछले कुछ समय में अमेरिका में शरणार्थियों की संख्या में अचानक बढ़ोतरी होने से इस पर खासा प्रभाव पड़ा है।
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अमेरिका में एक स्टोर की मैनेजर मंजीत कौर संघा का कहना है कि बेरोजगारी काफी बढ़ गई है। सरकार का सख्त नियम है कि कम से कम 15 डॉलर प्रति घंटा सैलरी दी जाए फिर भी आधी पगार पर लोग काम कर रहे हैं। उन्हें नकद भुगतान कर पैसा बचाया जा रहा है।
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अमेरिका में 7.5 डॉलर प्रति घंटा की मजदूरी पर श्रमिक आसानी से उपलब्ध हैं। अमेरिका में भी सबसे ज्यादा मजदूरी कैलिफोर्निया राज्य में मिलती रही है, अब वहां पर भी कम पगार में श्रमिक मिलने लगे हैं। पहले एक घंटे के 14 डॉलर और 8 घंटे के 112 डॉलर मिलते थे।
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अमेरिका में होटल सफाई करने वाले लोगों की सैलरी सालाना 25000 से 30000 डॉलर होती है, जो भारतीय रुपये में लगभग 25 लाख रुपये है लेकिन पिछले कुछ समय में अमेरिका में शरणार्थियों की संख्या में अचानक बढ़ोतरी होने से इस पर खासा प्रभाव पड़ा है।
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अमेरिका में एक स्टोर की मैनेजर मंजीत कौर संघा का कहना है कि बेरोजगारी काफी बढ़ गई है। सरकार का सख्त नियम है कि कम से कम 15 डॉलर प्रति घंटा सैलरी दी जाए फिर भी आधी पगार पर लोग काम कर रहे हैं। उन्हें नकद भुगतान कर पैसा बचाया जा रहा है।
अचानक 80 लाख नौकरियां चली गईं
अमेरिका में आईटी कंपनी के संचालक रूपेश जैन का कहना है कि संकट तो है। पहले 80 हजार नौकरियां अचानक चली गईं। अब सत्ता और विपक्ष के बीच तकरार चल रही है। अगर मामला न निपटा तो सरकारी कर्मचारियों का वेतन रुक सकता है। 70 लाख लोगों की नौकरी जा सकती है और दुनियाभर में मंदी आ सकती है। सबसे अधिक असर भारतीय लोगों पर है और जो प्रशिक्षित नहीं हैं, उन पर तो सबसे अधिक संकट है।
जालंधर के शाहकोट के रहने वाले साबी यूएसए में अपनी खुद की ट्रक चलाते हैं। उनका कहना है कि भारतीय भूल के भारी संख्या में लोग श्रमिक हैं। लेकिन अब जो हाल चल रहा है, हर कोई कम वेतन पर काम करने के लिए तैयार है क्योंकि नौकरियां ही नहीं मिल रही हैं। काफी संख्या में लोग बेरोजगारी का शिकार हैं।
अमेरिका में आईटी कंपनी के संचालक रूपेश जैन का कहना है कि संकट तो है। पहले 80 हजार नौकरियां अचानक चली गईं। अब सत्ता और विपक्ष के बीच तकरार चल रही है। अगर मामला न निपटा तो सरकारी कर्मचारियों का वेतन रुक सकता है। 70 लाख लोगों की नौकरी जा सकती है और दुनियाभर में मंदी आ सकती है। सबसे अधिक असर भारतीय लोगों पर है और जो प्रशिक्षित नहीं हैं, उन पर तो सबसे अधिक संकट है।
जालंधर के शाहकोट के रहने वाले साबी यूएसए में अपनी खुद की ट्रक चलाते हैं। उनका कहना है कि भारतीय भूल के भारी संख्या में लोग श्रमिक हैं। लेकिन अब जो हाल चल रहा है, हर कोई कम वेतन पर काम करने के लिए तैयार है क्योंकि नौकरियां ही नहीं मिल रही हैं। काफी संख्या में लोग बेरोजगारी का शिकार हैं।
अमेरिका में 47 लाख भारतीयों में 5 लाख सिख
विदेश मंत्रालय की 2018 की रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका में 44.60 लाख भारतीय रहते थे। यह वह संख्या है जो वैध वीजा पर अमेरिका में हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका की जनगणना ब्यूरो 2020 के अनुसार, संयुक्त राज्य में कुल एशियाई भारतीयों की जनसंख्या 45 लाख है। कुछ ऐसे राज्य हैं जहां भारतीय बड़ी संख्या में रहते हैं और मौजूदा समय में यह संख्या 47 लाख पार कर सकती है।
पांच डॉक्टरों में से एक भारतीय
अमेरिकी आबादी का लगभग एक प्रतिशत भारतीय मूल के निवासी हैं, जो लगभग छह प्रतिशत कर का भुगतान करते हैं। पांच डॉक्टरों में से एक भारत से है। भारतीय मूल के लोगों ने अमेरिका में मेडिकल शिक्षा, चिकित्सा, ट्रक कारोबार के अलावा बादाम की खेती में जबरदस्त बुलंदियों को छू रखा है।
विदेश मंत्रालय की 2018 की रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका में 44.60 लाख भारतीय रहते थे। यह वह संख्या है जो वैध वीजा पर अमेरिका में हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका की जनगणना ब्यूरो 2020 के अनुसार, संयुक्त राज्य में कुल एशियाई भारतीयों की जनसंख्या 45 लाख है। कुछ ऐसे राज्य हैं जहां भारतीय बड़ी संख्या में रहते हैं और मौजूदा समय में यह संख्या 47 लाख पार कर सकती है।
पांच डॉक्टरों में से एक भारतीय
अमेरिकी आबादी का लगभग एक प्रतिशत भारतीय मूल के निवासी हैं, जो लगभग छह प्रतिशत कर का भुगतान करते हैं। पांच डॉक्टरों में से एक भारत से है। भारतीय मूल के लोगों ने अमेरिका में मेडिकल शिक्षा, चिकित्सा, ट्रक कारोबार के अलावा बादाम की खेती में जबरदस्त बुलंदियों को छू रखा है।