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बूम की उम्मीद: पंजाब में रेत के दाम कम होने से रियल एस्टेट कारोबारियों की आस बढ़ी, कम होगी निर्माण की कीमत

Thu, 11 Nov 2021 03:50 PM IST
निवेदिता वर्मा सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 11 Nov 2021 03:50 PM IST
सार

कारोबारियों का कहना है कि मकान में लगने वाली कील से लेकर वायरिंग तक सबकुछ महंगा हो गया है। ऐसे में चन्नी सरकार के इस फैसले से लोगों को काफी राहत मिलेगी।

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Real Estate Industry Expected Boom After Punjab Government Reduced Price of Sand
पंजाब में रेत के दाम में कमी। - फोटो : फाइल

विस्तार

पंजाब में ईंट व सरिया के दामों में जबरदस्त उछाल से रियल एस्टेट की कमर टूट रही थी पर मंगलवार को सीएम चरणजीत चन्नी ने 5.5 रुपये फुट रेत कर रियल एस्टेट कारोबार को ऑक्सीजन दे दी है। यह जमीनी हकीकत है कि 5 रुपये फुट गुंडा टैक्स अदा किया जा रहा था। रियल एस्टेट के कारोबारियों को जबरदस्त बूम की उम्मीद है। उनका कहना है कि ईंट व सरिया के दाम ने कमर तोड़ दी थी, तेजी से दामों में उछाल आ गया था लेकिन अब संतुलन बन जाएगा और निर्माण की कीमत कम हो जाएगी।

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एजीआई ग्रुप के एमडी सुखदेव सिंह का कहना है कि पहले हमें रेत 36 रुपये फुट तक पहुंच रही थी, जिसमें 17 रुपये फुट कीमत थी बाकी उसके ऊपर पांच रुपये फुट गुंडा टैक्स के अलावा जीएसटी और रॉयल्टी थी। लेकिन अब 5.5 रुपये फुट रेत अगर 15 रुपये फुट मिलती है तो निश्चित तौर पर इससे कारोबार को फायदा ही होगा। 
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पीजे ग्रुप के जोगिंदर सिंह का कहना है कि कंस्ट्रक्शन के तमाम मैटेरियल की डिमांड तेजी से बढ़ गई थी, जिस कारण बजट गड़बड़ा गया था। ईंट का रेट 7 रुपये तक पहुंच गया था, जो महज 4 रुपये था। ईंट-भट्ठों को माइनिंग पॉलिसी से बाहर कर दिया गया है। अब भट्ठा मालिक सीधे जमींदार से मिट्टी ले लेगा। इसमें माफिया की दखल अंदाजी बिल्कुल खत्म हो जाएगी। कारोबार में बूम आने की संभावना बढ़ गई है। 
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रियल एस्टेट कारोबारी निशांत गुप्ता का कहना है कि रेत, ईंट, बजरी, सरिया, सीमेंट के दाम आसमान को छू रहे थे। जिससे कॉलोनाइजरों की हालत पतली हो रही थी। जून तक ईटों के भाव 4400 रुपये से 4800 रुपये तक प्रति हजार था। सितंबर में कोयला का दाम बढ़ने के कारण भट्ठे तीन दिन तक बंद रहे व बारिशों से अधिकतर भट्ठों पर काम नहीं हो पाया। ऐसे में ईट की बढ़ती मांग और काम न चलने से ईंट का भाव 7500 रुपये प्रति हजार पहुंच गया। 


जिस घर को बनाने में पहले 25 लाख रुपये का खर्चा आता था अब उसके निर्माण पर 40 लाख रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। मकान में लगने वाली कील से लेकर वायरिंग तक सबकुछ महंगा हो गया है। सीमेंट का एक बैग 360 रुपये का आता था। अब इसकी कीमत बढ़कर 390 रुपये हो गई है। और आगे इसका रेट 15 रुपये और बढ़ाए जाने की आशंका है। जिसके बाद प्रति बैग की कीमत 405 रुपये हो जाएगी। इसका कारण यह है कि सीमेंट के लिए आने वाला पत्थर भी महंगा हो रहा है। निश्चचित तौर पर रेत के दाम कम होने से व्यापार व कारोबार को ऑक्सीजन मिलेगी साथ ही ईंट भट्ठा को भी फायदा मिलेगा तो दाम कम होंगे।

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