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गर्भवती महिला के पेट में बच्चे की मौत, सिविल अस्पताल में हंगामा
अमर उजाला ब्यूरो/जालंधर
Updated Tue, 15 Mar 2016 09:38 PM IST
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हंगामा
- फोटो : file
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जालंधर के सिविल अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही सामने आई है। एक महिला के पेट में पल रहे बच्चे की तीन दिन से मौत हो चुकी थी, लेकिन डॉक्टरों की लापरवाही से महिला की हालत खराब हो गई। इसके बाद यह मामला भाजपा के नेता अमित तनेजा और आला अधिकारियों तक जा पहुंचा।
सिविल अस्पताल में मिट्ठापुर क्षेत्र की रहने वाली केसर नामक एक महिला की अल्ट्रासाउंड स्कैनिंग की गई थी। आरोप है कि अस्पताल के स्टाफ ने महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे के मृत होने का पता लग जाने के बाद भी यह बात परिजनों से छिपाए रखी। वहीं महिला की शनिवार को स्कैनिंग की गई थी, जिसकी रिपोर्ट महिला और उसके परिजनों को नहीं दी गई।
सोमवार रात को डॉक्टरों ने महिला के परिजनों को गर्भ में बच्चा मृत होने की बात बताई तो वहां हंगामा हो गया। यही नहीं उक्त महिला की हालत इतनी बिगड़ गई कि उसे पिम्स रेफर करना पड़ गया। वहां पर भी महिला की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। उसको सांस लेने में दिक्कत होने लगी, लेकिन पिम्स में वेंटिलेटर सुविधा न होने से उक्त महिला को मेडिकल कॉलेज अमृतसर भेज दिया गया।
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वहां वह महिला जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है। केसर के घर वालों का कहना है कि उसकी तबीयत बिगड़ने पर दस दिन पहले उसे सिविल अस्पताल में दाखिल करवाया गया था। शनिवार को उसकी स्कैनिंग हुई, मगर डॉक्टरों ने सोमवार तक रिपोर्ट में बच्चा मृत होने की बात नहीं बताई। जब तक यह बात डाक्टरों ने बताई उसकी हालत बिगड़ चुका था।
मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डा. वीना पाल का कहना है कि यह घटना सोमवार देर रात की है। इस केस से संबंधित डाक्टरों का कहना है कि उन्होंने परिवार वालों को बात बताई थी। फिर भी डॉक्टरों को रिपोर्ट देने के लिए कहा है। मामले की जांच करवाई जा रही है। उधर गायनी एसएमओ संगीता कपूर का कहना है कि शनिवार को महिला के घर वालों को बच्चे के मृत होने की बात बताई गई थी। रविवार को तो डिलीवरी के लिए ड्रिप भी लगाई गई थी। उन्होंने कहा कि इस केस से संबंधित डॉक्टरों से बात करके जांच की जा रही है।
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सिविल अस्पताल में मिट्ठापुर क्षेत्र की रहने वाली केसर नामक एक महिला की अल्ट्रासाउंड स्कैनिंग की गई थी। आरोप है कि अस्पताल के स्टाफ ने महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे के मृत होने का पता लग जाने के बाद भी यह बात परिजनों से छिपाए रखी। वहीं महिला की शनिवार को स्कैनिंग की गई थी, जिसकी रिपोर्ट महिला और उसके परिजनों को नहीं दी गई।
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सोमवार रात को डॉक्टरों ने महिला के परिजनों को गर्भ में बच्चा मृत होने की बात बताई तो वहां हंगामा हो गया। यही नहीं उक्त महिला की हालत इतनी बिगड़ गई कि उसे पिम्स रेफर करना पड़ गया। वहां पर भी महिला की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ। उसको सांस लेने में दिक्कत होने लगी, लेकिन पिम्स में वेंटिलेटर सुविधा न होने से उक्त महिला को मेडिकल कॉलेज अमृतसर भेज दिया गया।
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वहां वह महिला जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है। केसर के घर वालों का कहना है कि उसकी तबीयत बिगड़ने पर दस दिन पहले उसे सिविल अस्पताल में दाखिल करवाया गया था। शनिवार को उसकी स्कैनिंग हुई, मगर डॉक्टरों ने सोमवार तक रिपोर्ट में बच्चा मृत होने की बात नहीं बताई। जब तक यह बात डाक्टरों ने बताई उसकी हालत बिगड़ चुका था।
मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डा. वीना पाल का कहना है कि यह घटना सोमवार देर रात की है। इस केस से संबंधित डाक्टरों का कहना है कि उन्होंने परिवार वालों को बात बताई थी। फिर भी डॉक्टरों को रिपोर्ट देने के लिए कहा है। मामले की जांच करवाई जा रही है। उधर गायनी एसएमओ संगीता कपूर का कहना है कि शनिवार को महिला के घर वालों को बच्चे के मृत होने की बात बताई गई थी। रविवार को तो डिलीवरी के लिए ड्रिप भी लगाई गई थी। उन्होंने कहा कि इस केस से संबंधित डॉक्टरों से बात करके जांच की जा रही है।