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दलित वोट बैंक पर नजर: पंजाब में दिग्गजों पर दांव खेल सकती है भाजपा, 42 फीसदी वोट के लिए हो रहा मंथन
Fri, 21 Jan 2022 04:24 PM IST
निवेदिता वर्मा
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Fri, 21 Jan 2022 04:24 PM IST
सार
पंजाब में बहुमत के लिए 59 सीटों की जरूरत है। भाजपा के पास दोआबा की काफी सीटें हैं। दोआबा में अगर भाजपा अधिक सीटों पर चुनाव लड़ती है तो निश्चित तौर पर दलित कार्ड खेलना लाजमी होगा।
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पंजाब विधानसभा चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भारतीय जनता पार्टी पहली बार अकाली दल से अलग होकर पंजाब के चुनाव लड़ रही है। पार्टी पंजाब के 32 फीसदी दलित वोट खींचने के लिए दलित कार्ड खेलने की तैयारी में है। ऐसा सामने आ रहा है कि अगर दोआबा में भाजपा की तरफ से दलित दिग्गज नेता मैदान में नहीं आए तो पार्टी को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।
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दोआबा में जहां 42 फीसदी वोट दलितों का है, वहीं पंजाब में 32 फीसदी आबादी है। लिहाजा, पार्टी को ऐसे दमदार चेहरों की जरूरत है, जो पंजाब में सीएम चन्नी व अकाली दल के साथी बसपा की काट ढूंढ सकें। पार्टी में दलितों के तीन-चार ही बड़े चेहरे हैं, जिनमें विजय सांपला राष्ट्रीय अनुसूचित जाति के चेयरमैन हैं, जबकि सोमप्रकाश केंद्रीय राज्यमंत्री हैं। जालंधर के वाल्मीकि समाज के अग्रणी नेता हंसराज हंस दिल्ली से लोकसभा सदस्य हैं। पार्टी के पास प्रदेश महासचिव राजेश बाघा हैं। ये नेता दोआबा से संबंधित हैं।
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पार्टी की भगत बिरादरी के नेता भगत चुन्नी लाल अब काफी बुजुर्ग हो चुके हैं और चुनाव लड़ने की स्थिति में नहीं हैं। भाजपा की तरफ से दलित सीएम के मुद्दे पर यू टर्न लिया जा चुका है, जिससे दलित वर्ग का एक तबका काफी नाराज है।
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पार्टी की तरफ से मंथन के बाद तय किया गया है कि दलितों के बड़े चेहरे को विधानसभा चुनाव लड़ाना जरूरी है, अन्यथा इसका असर पंजाब के 32 फीसदी वोट पर हो सकता है। केंद्रीय राज्यमंत्री सोमप्रकाश होशियारपुर से लोकसभा सांसद हैं और पार्टी उनको विधानसभा चुनाव लड़ाकर होशियारपुर संसदीय सीट का उपचुनाव करवाने का जोखिम मोल नहीं लेना चाहती। लिहाजा, दूसरे कद्दावर नेता हंसराज हंस हैं, लेकिन वह दिल्ली से सांसद हैं। पार्टी के पास अब विजय सांपला ही विकल्प बचे हैं, जिनको फगवाड़ा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ाने की सिफारिश की जा चुकी है। उनके भतीजे आशु सांपला पहले ही इस सीट पर काफी समय से सक्रिय थे और तमाम लोगों से मुलाकात कर रहे थे।
सांपला के बेटे साहिल सांपला भी शाम चौरासी विधानसभा हलका से भाजपा की सीट मांग रहे हैं। पार्टी की तरफ से दोनों के नाम पर सहमति बनने के आसार बन चुके हैं। पंजाब में भाजपा के लिए दिक्कत यह है कि उनका वोट शेयर काफी गिरा हुआ है। 2017 में कांग्रेस का वोट शेयर 38.5 प्रतिशत था, जबकि आम आदमी पार्टी का 23.7 प्रतिशत व शिअद का 25.7 प्रतिशत और बीजेपी का वोट शेयर 5.4 प्रतिशत था। पार्टी का वोट शेयर किसानी आंदोलन के बाद काफी गिरा है।
भाजपा पंजाब में 64 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की पंजाब लोक कांग्रेस को 39, शिरोमणि अकाली दल संयुक्त को 14 और सिमरनजीत सिंह बैंस की लोक इंसाफ पार्टी को चार सीटें दी गई हैं। पंजाब में बहुमत के लिए 59 सीटों की जरूरत है। भाजपा के पास दोआबा की काफी सीटें हैं। दोआबा में अगर भाजपा अधिक सीटों पर चुनाव लड़ती है तो निश्चित तौर पर दलित कार्ड खेलना लाजमी होगा।