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पीटीयू मुलाजिम फ्रंट ने मांगा रजिस्ट्रार का इस्तीफा
ब्यूरो/अमर उजाला, जालंधर
Updated Tue, 14 Jul 2015 10:14 PM IST
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आई के गुजराल पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी (पीटीयू) में मंगलवार को मुलाजिम
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फ्रंट के सदस्यों ने पीटीयू के रजिस्ट्रार डॉ. अमनप्रीत सिंह को घेर लिया।
मुलाजिम फ्रंट के सदस्यों ने जमकर हंगामा करते रजिस्ट्रार को इस्तीफा देने के लिए कहा। मुलाजिमों से तंग आकर रजिस्ट्रार अमनप्रीत सिंह ने इस्तीफा देने की हामी तक भर दी। मगर शाम ढलने तक उन्होंने अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया। इस मामले का अभी तक कोई हल नहीं निकल पाया है।
मुलाजिम फ्रंट के प्रधान कमलेश कुमार ने बताया कि पंजाब में एक ही टेक्निकल यूनिवर्सिटी पीटीयू ही थी। पहले वह घाटे में चल रही थी, लेकिन पूर्व वीसी रजनीश अरोड़ा के नेतृत्व में पीटीयू ने काफी उपलब्धियां हासिल की हैं। पीटीयू के पास करीब 500 करोड़ रुपये का फंड भी आ गया था। जब पंजाब सरकार को इस बात का पता चला तो उन्होंने बठिंडा में दूसरी टेक्निकल यूनिवर्सिटी खोल दी।
इस दौरान कहा गया था कि मालवा के छात्र बठिंडा यूनिवर्सिटी और दोआबा के पीटीयू में ही रहेंगे। लेकिन उसके बाद सरकार ने पूर्व वीसी पर दबाव बनाया कि वह करीब 200 करोड़ रुपये पीटीयू के फंड से निकालकर बठिंडा यूनिवर्सिटी को दे दें। उन्होंने कहा कि सरकार के दबाव में आकर रजनीश अरोड़ा ने साइन कर दिए। इस दौरान उनकी कार्यकाल खत्म हो गया और वह यहां चले गए। उन्होंने कहा कि अब सरकार 75 करोड़ रुपये पहली किस्त मांग रही है। लेकिन पीटीयू का स्टाफ अपने फंड से बठिंडा यूनिवर्सिटी को एक रुपया भी नहीं देने देगा, इसको फंड को लेने में पूरे स्टाफ की मेहनत लगी है।
मुलाजिम फ्रंट के सदस्यों ने जमकर हंगामा करते रजिस्ट्रार को इस्तीफा देने के लिए कहा। मुलाजिमों से तंग आकर रजिस्ट्रार अमनप्रीत सिंह ने इस्तीफा देने की हामी तक भर दी। मगर शाम ढलने तक उन्होंने अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया। इस मामले का अभी तक कोई हल नहीं निकल पाया है।
मुलाजिम फ्रंट के प्रधान कमलेश कुमार ने बताया कि पंजाब में एक ही टेक्निकल यूनिवर्सिटी पीटीयू ही थी। पहले वह घाटे में चल रही थी, लेकिन पूर्व वीसी रजनीश अरोड़ा के नेतृत्व में पीटीयू ने काफी उपलब्धियां हासिल की हैं। पीटीयू के पास करीब 500 करोड़ रुपये का फंड भी आ गया था। जब पंजाब सरकार को इस बात का पता चला तो उन्होंने बठिंडा में दूसरी टेक्निकल यूनिवर्सिटी खोल दी।
इस दौरान कहा गया था कि मालवा के छात्र बठिंडा यूनिवर्सिटी और दोआबा के पीटीयू में ही रहेंगे। लेकिन उसके बाद सरकार ने पूर्व वीसी पर दबाव बनाया कि वह करीब 200 करोड़ रुपये पीटीयू के फंड से निकालकर बठिंडा यूनिवर्सिटी को दे दें। उन्होंने कहा कि सरकार के दबाव में आकर रजनीश अरोड़ा ने साइन कर दिए। इस दौरान उनकी कार्यकाल खत्म हो गया और वह यहां चले गए। उन्होंने कहा कि अब सरकार 75 करोड़ रुपये पहली किस्त मांग रही है। लेकिन पीटीयू का स्टाफ अपने फंड से बठिंडा यूनिवर्सिटी को एक रुपया भी नहीं देने देगा, इसको फंड को लेने में पूरे स्टाफ की मेहनत लगी है।