{"_id":"57da9bd54f1c1b2309d476f9","slug":"protest-three-days-protest-field-workers-dharna-protest-started-lambi-muktsar-jalandhar","type":"story","status":"publish","title_hn":"लंबी में खेत मजदूर संगठनों का धरना शुरू ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लंबी में खेत मजदूर संगठनों का धरना शुरू
ब्यूरो/अमर उजाला, लंबी (मुक्तसर)
Updated Thu, 15 Sep 2016 07:00 PM IST
विज्ञापन
प्रदर्शन
- फोटो : demo
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
खेत मजदूर संगठनों ने लंबी में तीन दिवसीय धरना शुरू कर दिया है। इस दौरान मजदूरों ने जहां राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, वहीं मांगों की पूर्ति न होने पर संघर्ष तीव्र करने की चेतावनी भी दी।
खेत मजदूर संगठनों के नेताओं अध्यक्ष जोरा सिंह नसराली, महासचिव लछमण सिंह सेवेवाला, वित्त सचिव हरमेश मालड़ी ने कहा कि राज्य सरकार खेत मजदूर विरोधी है। 1 अप्रैल को हुए समझौते के बाद भी मजदूरों को न तो प्लॉट अलॉट किए हैं और न ही अलॉट किए प्लॉट पर कब्जा दिया गया है।
कपास चुगाई का मुआवजा भी अधिकतर मजदूरों को अभी तक नहीं मिल पाया है। नीले कार्ड थोक में बनाने के बावजूद असल हकदार इससे वंचित हैं। खुदकुशी पीड़ितों को तुरंत मुआवजा देने की मांग मंजूर करने पर भी मजदूरों व किसानों को कुछ नहीं मिल पाया। बादल सरकार मनरेगा के प्रति भी गंभीर नहीं है।
विज्ञापन
इस दौरान शारीरिक योग्यता, शैक्षणिक व बौधिक योग्यता के आधार पर पक्का रोजगार देने, गो रक्षा के नाम पर दलितों पर अत्याचार बंद करने, ठेका प्रणाली रद्द करने, मजदूरों के ऋण माफ करने, बिना ब्याज व बिना गारंटी के ऋण देने, बुढ़ापा, विधवा व दिव्यांग पेंशन तीन हजार रुपये करने की मांग की गई। इस अवसर पर मेजर सिंह, बलवंत सिंह, हरभगवान सिंह, तरसेम सिंह, सेवक सिंह, सुखा सिंह, गुरपाश सिंह, हेमराज और भुपेंदर सिंह मौजूद थे।
विज्ञापन
खेत मजदूर संगठनों के नेताओं अध्यक्ष जोरा सिंह नसराली, महासचिव लछमण सिंह सेवेवाला, वित्त सचिव हरमेश मालड़ी ने कहा कि राज्य सरकार खेत मजदूर विरोधी है। 1 अप्रैल को हुए समझौते के बाद भी मजदूरों को न तो प्लॉट अलॉट किए हैं और न ही अलॉट किए प्लॉट पर कब्जा दिया गया है।
विज्ञापन
कपास चुगाई का मुआवजा भी अधिकतर मजदूरों को अभी तक नहीं मिल पाया है। नीले कार्ड थोक में बनाने के बावजूद असल हकदार इससे वंचित हैं। खुदकुशी पीड़ितों को तुरंत मुआवजा देने की मांग मंजूर करने पर भी मजदूरों व किसानों को कुछ नहीं मिल पाया। बादल सरकार मनरेगा के प्रति भी गंभीर नहीं है।
विज्ञापन
इस दौरान शारीरिक योग्यता, शैक्षणिक व बौधिक योग्यता के आधार पर पक्का रोजगार देने, गो रक्षा के नाम पर दलितों पर अत्याचार बंद करने, ठेका प्रणाली रद्द करने, मजदूरों के ऋण माफ करने, बिना ब्याज व बिना गारंटी के ऋण देने, बुढ़ापा, विधवा व दिव्यांग पेंशन तीन हजार रुपये करने की मांग की गई। इस अवसर पर मेजर सिंह, बलवंत सिंह, हरभगवान सिंह, तरसेम सिंह, सेवक सिंह, सुखा सिंह, गुरपाश सिंह, हेमराज और भुपेंदर सिंह मौजूद थे।