फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Punjab ›   Jalandhar News ›   Meet Farmer Union Leader of Punjab 

किसान मोर्चा के हीरो: खेती किसानी से राजनीति तक है धमक, पंजाब की सियासत में लाएंगे बदलाव

Tue, 14 Dec 2021 02:15 PM IST
निवेदिता वर्मा सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Tue, 14 Dec 2021 02:15 PM IST
सार

इन किसान नेताओं का पूरे सूबे में अच्छा दबदबा है। हालांकि पंजाब की सियासत को लेकर अभी तक इन चेहरों ने कोई बयान नहीं दिए हैं, लेकिन सभी सियासी दल इनको सियासत में लाने के लिए प्रयास में कोई कमी नहीं छोड़ रहे हैं। 

विज्ञापन
Meet Farmer Union Leader of Punjab 
किसान यूनियनों के नेता। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली सीमा पर किसानों का मोर्चा एक साल तक लगा रहा और पंजाब के किसान नेता विश्व स्तर पर उभरकर सामने आए। पंजाब में किसानों की वापसी पर फूलों की वर्षा हो रही है। किसान मोर्चा में कई किसान यूनियनों का आपसी तालमेल और सूझबूझ ही उनको जीत की मंजिल तक पहुंचा सकी है। इन किसान नेताओं का पूरे सूबे में अच्छा दबदबा है। हालांकि पंजाब की सियासत को लेकर अभी तक इन चेहरों ने कोई बयान नहीं दिए हैं, लेकिन सभी सियासी दल इनको सियासत में लाने के लिए प्रयास में कोई कमी नहीं छोड़ रहे हैं। 

विज्ञापन

भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) जोगिंदर सिंह उगराहां

जोगिंदर सिंह उगराहां भारत में किसान आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक हैं। संगरूर जिले के सुनाम शहर के रहने जोगिंदर सिंह का जन्म और पालन-पोषण एक किसान परिवार में हुआ था। पंजाब के बहुत कम लोगों को जानकारी होगी कि जोगिंदर सिंह उग्रराहां पूर्व सैनिक हैं। भारतीय सेना से रिटायर होने के बाद, उन्होंने खेती की ओर रुख किया और किसान हितों की लड़ाई में सक्रिय हो गए। उन्होंने साल 2002 में भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) का गठन किया और तब से वह लगातार किसानों के मुद्दों पर संघर्ष कर रहे हैं। जोगिंदर सिंह उगराहां एक उत्कृष्ट वक्ता हैं और इस कला से वो लोगों को जुटाने में माहिर हैं। यह संगठन अमृतसर, बठिंडा, बवाला, गुरदासपुर, लुधियाना, संगरूर, फरीदकोट, फिरोजपुर मनसा, मोगा और मुक्तसर जिले में अपना प्रभाव रखता है।

विज्ञापन

भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) बलवीर सिंह राजेवाल

भारतीय किसान यूनियन राजेवाल के संस्थापक बलबीर सिंह राजेवाल हैं। वह किसान यूनियन के थिंक टैंक माने जाते हैं। 2006 में इस किसान यूनियन की स्थापना की गई थी। इसके करीब 5000 सदस्य हैं। यह किसान संगठन बठिंडा, फरीदकोट, फतेहगढ़ साहिब, फिरोजपुर, गुरदासपुर, होशियारपुर जैसी जगहों पर अपना प्रभाव रखता है। बलबीर सिंह राजेवाल 77 साल के हैं। भारतीय किसान यूनियन का संविधान भी बलबीर सिंह राजेवाल ने ही लिखा था। बलबीर सिंह राजेवाल स्थानीय मालवा कॉलेज की प्रबंधन समिति के अध्यक्ष भी हैं, जो वर्तमान में समराला क्षेत्र का एक अग्रणी शैक्षणिक संस्थान है। राजेवाल पंजाब के सबसे तेजतर्रार किसान नेता माने जाते हैं। वह किसान मुद्दों पर नेतृत्व करने और किसान पक्ष को प्रस्तुत करके किसान आंदोलन का चेहरा बन गए हैं। किसानों के प्रदर्शन के डिमांड चार्टर का मसौदा तैयार करने में राजेवाल ने महत्वपूर्ण अग्रणी भूमिका निभाई थी। केंद्रीय मंत्री नरिंदर सिंह तोमर के हर बात का सटीक व तथ्यों के साथ उत्तर देकर राजेवाल ने किसानों को मजबूत व जागरूक करने में अहम भूमिका निभाई।

विज्ञापन
विज्ञापन

किसान मजदूर संघर्ष समिति : सतनाम सिंह पन्नू

किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के सतनाम सिंह पन्नू की उम्र 65 साल है। समिति की स्थापना 2007 में हुई थी, जिसमें करीब 5000 सदस्य हैं। इस संगठन में तरनतारन, गुरदासपुर, फिरोजपुर और अमृतसर से काफी किसान जुड़े हुए हैं। फेसबुक पर इनके 70 हजार फॉलोअर्स हैं। यह किसान यूनियन किसी भी मुद्दे को लेकर प्रदर्शन करने में लंबा समय लेती है। 26 जनवरी को लाल किले पर हुई हिंसा में सतनाम सिंह पन्नू के संगठन किसान मजदूर संघर्ष समिति पर आरोप लगाए गए थे और पन्नू ने खुलकर कहा था कि सबकुछ दीप सिद्धू ने किया है जो केंद्र सरकार का आदमी है।

भारतीय किसान यूनियन (क्रांतिकारी) सुरजीत सिंह फुल

भारतीय किसान यूनियन क्रांतिकारी के संस्थापक सुरजीत सिंह फुल हैं। इस किसान संगठन की 2004 में स्थापना की गई थी। भारतीय किसान यूनियन क्रांतिकारी का राजनीतिक झुकाव माकपा की तरफ है। इनके ऊपर कई बार पुलिस ने एफआईआर भी दर्ज की है. यही नहीं पंजाब सरकार ने 2009 में इन पर यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया था क्योंकि इनके संबंध कई नक्सलियों से बताए गए थे। सयुंक्त किसान मोर्चा ने 26 जनवरी के ट्रैक्टर मार्च के दौरान तय रूट का उल्लंघन करने के लिए सुरजीत सिंह फूल को निलंबित कर दिया था और बाद में तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर जांच करवाई थी। सुरजीत सिंह फूल लेफ्ट विचारधारा के साथ जुड़े हुए हैं और उनकी टीम में अधिकतर किसान लेफ्ट विचारधारा वाले हैं।



क्रांतिकारी किसान यूनियन डॉ. दर्शन पाल

क्रांतिकारी किसान यूनियन के संस्थापक एमबीबीएस व एमडी डॉक्टर दर्शन पाल हैं। डॉ. दर्शन पाल भी किसान यूनियन का थिंक टैंक माने जाते हैं। वह काफी नपी-तुली भाषा में सटीक उत्तर देते हैं लेकिन उनका संगठन मालवा में काफी मजबूत है। इस संगठन की स्थापना 2016 में हुई थी। यह संगठन राजनीतिक तौर पर माकपा की तरफ झुकाव रखता है। 70 साल की उम्र के दर्शन पाल ने पंजाब सरकार में हेल्थ डिपार्टमेंट में नौकरी शुरू की थी। यह संगठन संख्या बल के आधार में छोटा है लेकिन डॉक्टर दर्शनपाल ने 30 किसान संगठनों के समन्वय की भूमिका अदा की। 2002 में सरकारी डॉक्टर के रूप में अपनी नौकरी छोड़ने के बाद, वो सामाजिक और किसान संगठनों के साथ सक्रिय हो गए और उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। अब डॉ. दर्शन पाल पटियाला व आसपास के इलाकों में एक बड़ा किसानी चेहरा बनकर उभरे हैं।

भारतीय किसान यूनियन (लक्खोवाल) अजमेर सिंह लक्खोवाल

अजमेर सिंह लक्खोवाल गणित में एमएससी हैं और अतीत में अकाली दल से जुड़े रहे हैं। अकाली दल की सरकार में उनको मंडी बोर्ड का चेयरमैन भी लगाया गया था। भारतीय किसान यूनियन लक्खोवाल के प्रधान अजमेर सिंह लक्खोवाल खुद हैं जिसकी स्थापना 1992 में हुई थी और अभी इसके 7000 मेंबर हैं। 77 साल के अजमेर सिंह लक्खोवाल पाकिस्तान में जन्मे थे और विभाजन के समय लुधियाना आए थे। भारतीय किसान यूनियन के लक्खोवाल गुट की ओर से नए कृषि कानूनों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका वापस लेने के बाद वह विवादों में घिर गए थे। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने तो अजमेर सिंह लक्खोवाल पर आरोप लगा दिया था कि उन्होंने शिरोमणि अकाली दल के दबाव में सुप्रीम कोर्ट से याचिका वापस ली है। पंजाब में अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार के कार्यकाल में अजमेर सिंह लक्खोवाल दस साल पंजाब मंडी बोर्ड के चेयरमैन रहे हैं।

किसान मजदूर संघर्ष समिति सरवण सिंह पंधेर

सरवण सिंह पंधेर पंजाब के माझा क्षेत्र के एक प्रमुख युवा किसान नेता हैं। वह किसान मजदूर संघर्ष समिति के महासचिव हैं। इस का गठन 2000 में सतनाम सिंह पन्नू ने किया था। अब भी संगठन का नेतृत्व पन्नू करते हैं, लेकिन पंधेर वर्तमान आंदोलन में बड़ी भूमिका में नजर आए। उनकी युवाओं में खासी पकड़ रही। पंधेर का मुख्य आधार दोआबा और मालवा के 10 जिलों में है, जिसमें माझा के चार जिले शामिल हैं। सरवन सिंह पंधेर को तेजी से आगे बढ़ते आंदोलनकारी नेता के रूप में देखा जा रहा है। 42 साल के सरवण सिंह का गांव अमृतसर जिले का पंधेर है। वह छात्र जीवन से ही जन आंदोलनों में शामिल रहे हैं। पंधेर ने अपना जीवन सार्वजनिक हित के लिए समर्पित कर दिया है इसलिए उन्होंने शादी नहीं की है।

भारतीय किसान यूनियन (डकोंदा) बूटा बुर्ज सिंह गिल

भारतीय किसान यूनियन डकोंदा के प्रधान बूटा सिंह बुर्ज गिल हैं। इस संगठन की स्थापना 2005 में हुई थी और इसके 4000 सक्रिय सदस्य हैं। यह किसान संगठन संगरूर, बरनाला, मोगा लुधियाना, पटियाला, फिरोजपुर, फरीदकोट और फतेहगढ़ साहिब में प्रभाव रखता है। 66 साल के बूटा सिंह बुर्ज गिल इससे पहले भारतीय किसान यूनियन लक्खोवाल का हिस्सा था लेकिन इसके बाद अपना अलग संगठन तैयार कर लिया। 66 वर्षीय बूटा सिंह ने किसान आंदोलन में अहम भूमिका निभाई। बूटा सिंह उन नेताओं में शामिल थे जो 1984 में राजभवन के घेराव में शामिल थे। वह लंबे समय से कृषि आंदोलनों में शामिल रहे हैं।

भारतीय किसान यूनियन (सिद्धपुर) जगजीत सिंह दल्लेवाल

जगजीत सिंह दल्लेवाल भारतीय किसान यूनियन सिद्धूपुर के अध्यक्ष हैं। इस किसान संगठन की स्थापना 2002 में हुई थी। इसके पांच हजार के करीब सक्रिय सदस्य हैं। जगजीत सिंह दल्लेवाल 62 साल के हैं और इनके पास 17 एकड़ जमीन है। जगजीत सिंह दल्लेवाल ने किसान मोर्चा में अहम भूमिका अदा की और सरकार से बातचीत में वह लगातार सक्रिय रहे और उनहोंने किसानों में जोश भी समय समय पर पैदा किया।

भारतीय किसान यूनियन कादियां हरमीत सिंह कादियां

भारतीय किसान यूनियन कादियां के संस्थापक हरमीत सिंह कादियां है। इस यूनियन की स्थापना 2017 में की गई थी। यह बटिंडा, जालंधर, होशियारपुर, मोगा, रोपड़ और मानसा जैसे कई जगहों पर सक्रिय है। 35 साल की उम्र के हरमीत सिंह कादियां लुधियाना में जन्मे थे और लुधियाना के खालसा कॉलेज से उन्होंने ग्रेजुएशन किया है। हरमीत कादियां की दोआबा में खासी पकड़ है और करीब चार हजार किसान सक्रिय सदस्य हैं। किसान नेता हरमीत सिंह कादियां खुद अपने 10 साल के बेटे को लेकर दिल्ली मोर्चे पर गए। बच्चे सुबह ट्रॉलियों में बैठकर ऑनलाइन क्लास में हिस्सा लेते हैं तो दिन में आंदोलन में शामिल हो जाते थे। हरमीत कादियां ने लगातार किसानों को संघर्ष के साथ
खड़ा रखने में अहम रोल अदा किया था।

पंजाब किसान यूनियन रूलदा सिंह मानसा

पंजाब किसान यूनियन के प्रधान रूलदा सिंह मानसा हैं। इसकी स्थापना 2006 में हुई थी। संगठन का प्रभाव मानसा, लुधियाना और मुक्तसर में है। राजनीतिक तौर पर यह संगठन अपने आपको सीपीआईएमएल से जोड़ कर बताता है। रूलदा सिंह मानसा किसान मोर्चा की राष्ट्रीय समिति के सदस्य भी रहे। रूलदा सिंह मानसा ने लगातार सोशल मीडिया व पंजाबी चैनलों पर धमाल मचाकर रखा और किसानों में जोश पैदा करते रहे।

कीर्ति किसान यूनियन निर्भय सिंह दूधिके

इस किसान यूनियन के संस्थापक निर्भय सिंह दूधिके हैं। 1972 में इस किसान संगठन की स्थापना की गई थी, जिसका प्रभाव अमृतसर, गुरदासपुर, जालंधर, पठानकोट, संगरूर, मोगा, लुधियाना और नवांशहर में है और यह किसान संगठन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ मार्क्सिस्ट लेनिनिस्ट डेमोक्रेटिक से राजनीतिक रूप से जुड़ा हुआ है। 

भारतीय किसान यूनियन (दोआब) मंजीत सिंह राय 

भारतीय किसान यूनियन दोआब के प्रेसिडेंट मंजीत सिंह राय हैं। यह किसान संगठन नवांशहर, जालंधर, होशियारपुर और कपूरथला के किसानों में अपना प्रभाव रखता है। मंजीत सिंह राय एक अच्छे वक्ता हैं। उन्होंने मीडिया व सोशल मीडिया चैनलों पर लगातार खेती कानूनों का तथ्यों के साथ विरोध किया। लगातार वह किसान मोर्चा का हिस्सा रहे और उनकी हर योजना में थिंक टैंक का काम करते रहे।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed