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जालंधर नगर निगम की बैठक : मात्र 10 सेकेंड में स्मार्ट सिटी प्रस्ताव पास
ब्यूरो/अमर उजाला, जालंधर
Updated Wed, 02 Dec 2015 03:39 PM IST
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मंगलवार को नगर निगम जालंधर की हाउस मिटिंग में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत शहर को स्मार्ट सिटी बनाने का प्रस्ताव रखा गया।
शहरी विकास मंत्रालय की गाइड लाइन के अनुसार स्मार्ट सिटी प्रपोजल (एससीपी) तैयार किया गया, जिसे मेयर सुनील ज्योति और कमिश्नर गुरप्रीत सिंह खैहरा ने महज 10 सेकेंड में पास कर चलते बने। शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के संबंध में किसी भी पार्षद के विचार नहीं जाने गए।
एजेंडा पढ़ने के साथ ही कांग्रेसी पार्षदों ने विरोध जताना शुरू कर दिया था। उनका कहना था कि उनके विचार जाने जाएं, मगर किसी भी पार्षद को हाउस मीटिंग में रखे गए स्मार्ट सिटी के प्रस्ताव पर बोलने नहीं दिया गया।
एजेंडा प्रस्तुत करने से पहले पार्षदों ने जमकर हंगामा किया। दोपहर तीन बजे मीटिंग आरंभ हुई और शुरुआत में ही सत्ताधारी भाजपा एवं अकाली दल के पार्षदों के अलावा कांग्रेसी पार्षदों ने निगम कार्यालय में फैले भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया।
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निगम के अलग-अलग विभाग के अधिकारियों पर रिश्वतखोरी के आरोप लगाए गए और इसके साथ ही उनके तबादले और सस्पेंशन की मांग की गई।
करीब दो घंटे तक चले हंगामे के बाद सदन में स्मार्ट सिटी को लेकर प्रस्ताव रखा गया। सिंगल एजेंडा पढ़ा गया, जिसे बिना पार्षदों का विचार जाने महज 10 सेकेंड में पास कर दिया गया।
कांग्रेसी पार्षद स्मार्ट सिटी पर कई सुझाव रखना चाहते थे, मगर उनको बोलने नहीं दिया गया। इस प्रपोजल में सत्ताधारी भाजपा तथा अकाली दल के पार्षदों की भी राय नहीं जानी गई।
मेयर सुनील ज्योति ने कहा कि यह हाउस स्मार्ट सिटी के प्रस्ताव को पास करने के लिए बुलवाया गया है। जालंधर का नाम पहले टॉप 100 स्मार्ट सिटी में आ चुका है, लेकिन अब टॉप 20 में आने के लिए शहरी विकास मंत्रालय की तरफ से जारी गाइड लाइन के अनुसार प्रपोजल तैयार किया गया।
इस पर विचार करने के लिए हाउस की जीरो ऑवर की मीटिंग रखी गई। निगम हाउस मीटिंग में पास हुए स्मार्ट सिटी के प्रस्ताव को अब सरकार के पास भेजा जाएगा।
शहर की दो दर्जन से ज्यादा अवैध इमारतों पर कार्रवाई करवाने के लिए सीनियर डिप्टी मेयर कमलजीत सिंह भाटिया पिछले दो महीने से मांग कर रहे हैं।
बिल्डिंग विभाग ने इस मामले में अब तक जो कार्रवाई की है उससे वे संतुष्ट नहीं है। मंगलवार को हाउस मीटिंग में भाटिया ने फिर से अवैध इमारतों को मुद्दा उठाया।
भाटिया ने कहा कि बिल्डिंग ब्रांच कभी त्योहार तो कभी सरकारी छुट्टी का बहाना लगाकर कार्रवाई नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि बिल्डिंग ब्रांच के एसटीपी ने अवैध इमारतों पर कार्रवाई संबंधी जो लिस्ट सौंपी है वह उससे संतुष्ट नहीं हैं।
लिस्ट में कई इमारतों को कंपाउंड करने की बात कही गई, मगर यह नहीं बताया गया कि कितना एरिया कंपाउंड किया गया है।
निगम कार्यालय में फैले भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए मीटिंग का होना जरूरी है। मीटिंग में सवाल होंगे तभी भ्रष्टाचार दूर होगा। हाउस के सभी पार्षदों को साथ लेकर चले, मगर ऐसा नहीं हो रहा है। पार्षदों की पॉवर खत्म कर मेयर अकेले ही निगम चला रहे हैं।
जगदीश राजा, कांग्रेस पार्षद
अवैध कालोनी से जितना पैसा इकट्ठा किया गया है वह वहां क्यों नहीं लगाया है। शहरवासियों से एनओसी और प्रॉपर्टी टैक्स लिया जा रहा है, मगर यह पैसा अवैध कालोनियों के काम पर क्यों नहीं लगता।
पवन कुमार,कांग्रेसी पार्षद
मोहल्ले में घूम रहे आवारा कुत्ते लोगों के लिए परेशानी बने हुए हैं, उन्हें पकड़ने के लिए कुछ नहीं किया जा रहा है।
पवन कुमार, कांग्रेसी पार्षद
हाउस मीटिंग में सत्ताधारी भाजपा पार्षदों ने मेयर सुनील ज्योति की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
भाजपा पार्षद जोगिंदर सिंह टोनी ने कहा कि तहबाजारी में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। इसके खिलाफ कोई पार्षद अवाज उठाता है तो उसके खिलाफ नोटिस जारी कर दिया जाता है।
यह कहां का इंसाफ है? तहबाजारी में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। सुपरिंटेंडेंट विक्रात वर्मा का तबादला किया जाए।
भाजपा पार्षद राज गोपाल ने कहा कि निगम में आने वाले लोग बिल्डिंग ब्रांच के अधिकारियों को भ्रष्टाचारी बोल रहे हैं। यह निगम कार्यालय और मेयर के लिए अच्छी बात नहीं है।
इसलिए रिश्वतखोर अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए। भाजपा पार्षद किशन कोछड़ मिंटा ने कहा कि निगम कार्यालय में भ्रष्टाचार है।
इसे कुछ अधिकारी अंजाम दे रहे हैं। निगम के सभी पार्षद चाहते हैं कि निगम से भ्रष्टाचार खत्म हो। शहर का स्मार्ट सिटी बनाना है तो भ्रष्टाचार को खत्म करना जरूरी है। मेयर कोई ठोस कदम उठाएं।
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शहरी विकास मंत्रालय की गाइड लाइन के अनुसार स्मार्ट सिटी प्रपोजल (एससीपी) तैयार किया गया, जिसे मेयर सुनील ज्योति और कमिश्नर गुरप्रीत सिंह खैहरा ने महज 10 सेकेंड में पास कर चलते बने। शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के संबंध में किसी भी पार्षद के विचार नहीं जाने गए।
एजेंडा पढ़ने के साथ ही कांग्रेसी पार्षदों ने विरोध जताना शुरू कर दिया था। उनका कहना था कि उनके विचार जाने जाएं, मगर किसी भी पार्षद को हाउस मीटिंग में रखे गए स्मार्ट सिटी के प्रस्ताव पर बोलने नहीं दिया गया।
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एजेंडा प्रस्तुत करने से पहले पार्षदों ने जमकर हंगामा किया। दोपहर तीन बजे मीटिंग आरंभ हुई और शुरुआत में ही सत्ताधारी भाजपा एवं अकाली दल के पार्षदों के अलावा कांग्रेसी पार्षदों ने निगम कार्यालय में फैले भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया।
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निगम के अलग-अलग विभाग के अधिकारियों पर रिश्वतखोरी के आरोप लगाए गए और इसके साथ ही उनके तबादले और सस्पेंशन की मांग की गई।
करीब दो घंटे तक चले हंगामे के बाद सदन में स्मार्ट सिटी को लेकर प्रस्ताव रखा गया। सिंगल एजेंडा पढ़ा गया, जिसे बिना पार्षदों का विचार जाने महज 10 सेकेंड में पास कर दिया गया।
कांग्रेसी पार्षद स्मार्ट सिटी पर कई सुझाव रखना चाहते थे, मगर उनको बोलने नहीं दिया गया। इस प्रपोजल में सत्ताधारी भाजपा तथा अकाली दल के पार्षदों की भी राय नहीं जानी गई।
मेयर सुनील ज्योति ने कहा कि यह हाउस स्मार्ट सिटी के प्रस्ताव को पास करने के लिए बुलवाया गया है। जालंधर का नाम पहले टॉप 100 स्मार्ट सिटी में आ चुका है, लेकिन अब टॉप 20 में आने के लिए शहरी विकास मंत्रालय की तरफ से जारी गाइड लाइन के अनुसार प्रपोजल तैयार किया गया।
इस पर विचार करने के लिए हाउस की जीरो ऑवर की मीटिंग रखी गई। निगम हाउस मीटिंग में पास हुए स्मार्ट सिटी के प्रस्ताव को अब सरकार के पास भेजा जाएगा।
शहर की दो दर्जन से ज्यादा अवैध इमारतों पर कार्रवाई करवाने के लिए सीनियर डिप्टी मेयर कमलजीत सिंह भाटिया पिछले दो महीने से मांग कर रहे हैं।
बिल्डिंग विभाग ने इस मामले में अब तक जो कार्रवाई की है उससे वे संतुष्ट नहीं है। मंगलवार को हाउस मीटिंग में भाटिया ने फिर से अवैध इमारतों को मुद्दा उठाया।
भाटिया ने कहा कि बिल्डिंग ब्रांच कभी त्योहार तो कभी सरकारी छुट्टी का बहाना लगाकर कार्रवाई नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि बिल्डिंग ब्रांच के एसटीपी ने अवैध इमारतों पर कार्रवाई संबंधी जो लिस्ट सौंपी है वह उससे संतुष्ट नहीं हैं।
लिस्ट में कई इमारतों को कंपाउंड करने की बात कही गई, मगर यह नहीं बताया गया कि कितना एरिया कंपाउंड किया गया है।
निगम कार्यालय में फैले भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए मीटिंग का होना जरूरी है। मीटिंग में सवाल होंगे तभी भ्रष्टाचार दूर होगा। हाउस के सभी पार्षदों को साथ लेकर चले, मगर ऐसा नहीं हो रहा है। पार्षदों की पॉवर खत्म कर मेयर अकेले ही निगम चला रहे हैं।
जगदीश राजा, कांग्रेस पार्षद
अवैध कालोनी से जितना पैसा इकट्ठा किया गया है वह वहां क्यों नहीं लगाया है। शहरवासियों से एनओसी और प्रॉपर्टी टैक्स लिया जा रहा है, मगर यह पैसा अवैध कालोनियों के काम पर क्यों नहीं लगता।
पवन कुमार,कांग्रेसी पार्षद
मोहल्ले में घूम रहे आवारा कुत्ते लोगों के लिए परेशानी बने हुए हैं, उन्हें पकड़ने के लिए कुछ नहीं किया जा रहा है।
पवन कुमार, कांग्रेसी पार्षद
हाउस मीटिंग में सत्ताधारी भाजपा पार्षदों ने मेयर सुनील ज्योति की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
भाजपा पार्षद जोगिंदर सिंह टोनी ने कहा कि तहबाजारी में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। इसके खिलाफ कोई पार्षद अवाज उठाता है तो उसके खिलाफ नोटिस जारी कर दिया जाता है।
यह कहां का इंसाफ है? तहबाजारी में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। सुपरिंटेंडेंट विक्रात वर्मा का तबादला किया जाए।
भाजपा पार्षद राज गोपाल ने कहा कि निगम में आने वाले लोग बिल्डिंग ब्रांच के अधिकारियों को भ्रष्टाचारी बोल रहे हैं। यह निगम कार्यालय और मेयर के लिए अच्छी बात नहीं है।
इसलिए रिश्वतखोर अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए। भाजपा पार्षद किशन कोछड़ मिंटा ने कहा कि निगम कार्यालय में भ्रष्टाचार है।
इसे कुछ अधिकारी अंजाम दे रहे हैं। निगम के सभी पार्षद चाहते हैं कि निगम से भ्रष्टाचार खत्म हो। शहर का स्मार्ट सिटी बनाना है तो भ्रष्टाचार को खत्म करना जरूरी है। मेयर कोई ठोस कदम उठाएं।