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Jalandhar News: अटारी बॉर्डर पर करंट लगने से मौत मामले में शिक्षक के आश्रित मुआवजे के हकदार
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-सिंगल जज के 60 लाख मुआवजे के आदेश पर खंडपीठ की मुहर
-केंद्र सरकार की अपील को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने किया खारिज
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अमृतसर में अटारी बॉर्डर पर करंट लगने से मारे गए एक शिक्षक के परिवार को 60 लाख का मुआवजा देने के एकल जज के आदेश के खिलाफ केंद्र सरकार की अपील खारिज कर दी है। कोर्ट ने शिक्षक के आश्रितों को मुआवजे के लिए पात्र माना और एकल जज के आदेश पर मुहर लगा दी।
2013 में में 32 साल के नरेंद्र कुमार अटारी बॉर्डर पर बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी में शामिल होने गए थे। सेरेमनी खत्म होने के बाद वहां लोगों की भीड़ लग गई और कुमार कथित तौर पर जंक्शन बॉक्स पर पैर कर एक डिमार्केशन लैंप के खंभे पर चढ़ गए। बॉक्स टूट गया और इससे बिजली का तार बाहर आ गया जिससे उन्हें करंट लग गया। फरवरी 2023 में सिंगल-जज ने बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स और पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड को इस घटना के लिए संयुक्त रूप से जिम्मेदार ठहराया और उन्हें पीड़ित के परिवार को मुआवजा देने का आदेश दिया। केंद्र सरकार और पीएसपीसीएल दोनों ने इस आदेश के खिलाफ अपील की।
खंडपीठ ने पीएसपीसीएल की यह बात मान ली कि वह जिम्मेदार नहीं है क्योंकि जिस इलाके में एक्सीडेंट हुआ वह के खास अधिकार क्षेत्र में है। कोर्ट ने कहा विवादित जगह भारत और पाकिस्तान के बीच इंटरनेशनल गेट के पास है इसलिए एक्सीडेंट वाली जगह केंद्र सरकार के खास अधिकार क्षेत्र और कंट्रोल में है जिसे बीएसएफ कंट्रोल कर रहा है। कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति को उस इलाके में पहुंचने देने में लापरवाही भी बीएसएफ की है जहां एक्सीडेंट हुआ था। इस तरह कोर्ट ने यूनियन ऑफ इंडिया की अपील खारिज कर दी। इसने इस बात पर भी ध्यान दिया कि सिंगल जज के आदेश के ढाई साल बाद भी पीड़ित के परिवार को कोई मुआवजा नहीं दिया गया। कोर्ट ने आदेश दिया कि केंद्र सरकार मुआवजे की रकम आठ हफ्ते के अंदर जारी करेगी।
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-केंद्र सरकार की अपील को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने किया खारिज
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अमृतसर में अटारी बॉर्डर पर करंट लगने से मारे गए एक शिक्षक के परिवार को 60 लाख का मुआवजा देने के एकल जज के आदेश के खिलाफ केंद्र सरकार की अपील खारिज कर दी है। कोर्ट ने शिक्षक के आश्रितों को मुआवजे के लिए पात्र माना और एकल जज के आदेश पर मुहर लगा दी।
2013 में में 32 साल के नरेंद्र कुमार अटारी बॉर्डर पर बीटिंग द रिट्रीट सेरेमनी में शामिल होने गए थे। सेरेमनी खत्म होने के बाद वहां लोगों की भीड़ लग गई और कुमार कथित तौर पर जंक्शन बॉक्स पर पैर कर एक डिमार्केशन लैंप के खंभे पर चढ़ गए। बॉक्स टूट गया और इससे बिजली का तार बाहर आ गया जिससे उन्हें करंट लग गया। फरवरी 2023 में सिंगल-जज ने बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स और पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड को इस घटना के लिए संयुक्त रूप से जिम्मेदार ठहराया और उन्हें पीड़ित के परिवार को मुआवजा देने का आदेश दिया। केंद्र सरकार और पीएसपीसीएल दोनों ने इस आदेश के खिलाफ अपील की।
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खंडपीठ ने पीएसपीसीएल की यह बात मान ली कि वह जिम्मेदार नहीं है क्योंकि जिस इलाके में एक्सीडेंट हुआ वह के खास अधिकार क्षेत्र में है। कोर्ट ने कहा विवादित जगह भारत और पाकिस्तान के बीच इंटरनेशनल गेट के पास है इसलिए एक्सीडेंट वाली जगह केंद्र सरकार के खास अधिकार क्षेत्र और कंट्रोल में है जिसे बीएसएफ कंट्रोल कर रहा है। कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति को उस इलाके में पहुंचने देने में लापरवाही भी बीएसएफ की है जहां एक्सीडेंट हुआ था। इस तरह कोर्ट ने यूनियन ऑफ इंडिया की अपील खारिज कर दी। इसने इस बात पर भी ध्यान दिया कि सिंगल जज के आदेश के ढाई साल बाद भी पीड़ित के परिवार को कोई मुआवजा नहीं दिया गया। कोर्ट ने आदेश दिया कि केंद्र सरकार मुआवजे की रकम आठ हफ्ते के अंदर जारी करेगी।
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