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20 साल बाद मिला इंसाफ:  हाईकोर्ट ने घायल वकील को दिलवाया ₹8.64 करोड़ का मुआवजा, बीमा कंपनी को दिए आदेश

Sat, 24 Jan 2026 07:20 PM IST
शाहिल शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, जालंधर
अमर उजाला ब्यूरो, जालंधर Published by: शाहिल शर्मा Updated Sat, 24 Jan 2026 07:20 PM IST
सार

सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल जालंधर के वकील को पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने बीमा कंपनी को ₹8.64 करोड़ का मुआवजा देने की अपील की है। 

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High Court awarded compensation of ₹8.64 crore to the injured lawyer
कोर्ट का आदेश। - फोटो : सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल जालंधर के वकील नरिंदर पाल सिंह को दो दशक बाद बड़ी राहत दी है। अदालत ने बीमा कंपनी को इलाज, पुनर्वास और भविष्य की मेडिकल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए करोड़ों रुपये का मुआवजा ब्याज सहित जारी करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि दुर्घटना पीड़ितों के मामलों में सिर्फ आंकड़ों के आधार पर नहीं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।
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साल 2002 का है मामला 

हाईकोर्ट के माननीय जस्टिस सुदीप्ति शर्मा की बेंच ने स्पष्ट किया कि मुआवजे का उद्देश्य केवल वित्तीय सहायता नहीं, बल्कि पीड़ित के सम्मानजनक जीवन, इलाज और भविष्य की जरूरतों को सुरक्षित करना भी है। अदालत ने बीमा कंपनियों से अपेक्षा जताई कि वे पीड़ितों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण और उदार रुख अपनाएं। यह मामला वर्ष 2002 का है, जब जालंधर के युवा वकील नरिंदर पाल सिंह एक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। सिर में गहरी चोट, सुनने की क्षमता में कमी और लगातार स्वास्थ्य समस्याओं के कारण उनका पेशेवर जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। वर्षों तक देश-विदेश में इलाज कराने के बाद भी हालत में सुधार नहीं हो पाया और अंततः अमेरिकी ब्रेन सर्जरी ही अंतिम विकल्प बचा, जिसकी लागत परिवार के लिए असंभव थी।
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स्थानीय ट्रिब्यूनल ने दिया था ₹52 लाख का मुआवजा

पहले स्थानीय ट्रिब्यूनल ने उन्हें लगभग 52 लाख रुपये का मुआवजा दिया था, लेकिन इसमें जीवनयापन, स्थायी अक्षमता और भविष्य की चिकित्सा जरूरतों का समुचित आकलन नहीं हुआ। इसके बाद पीड़ित और उनके परिवार ने हाईकोर्ट का रुख किया, जहां लंबित अपील पर करीब 20 साल बाद सुनवाई हुई। अंततः हाईकोर्ट ने मुआवजा राशि को बढ़ाकर 2.64 करोड़ रुपये कर दिया और इसके साथ तीन अमेरिकी सर्जरी के लिए 6 करोड़ रुपये ब्याज सहित देने का निर्देश जारी किया। कोर्ट ने बीमा कंपनी को तय समयसीमा के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने का आदेश भी दिया है। यह फैसला न केवल एक पीड़ित को वर्षों बाद न्याय दिलाने का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि अदालतें अब सड़क दुर्घटना पीड़ितों के अधिकारों और गरिमा को प्राथमिकता दे रही हैं।
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