पंजाब विधानसभा चुनाव: 94 साल उम्र में भी प्रकाश सिंह बादल का जोश बरकरार, इस बार भी लड़ सकते हैं चुनाव
2012 में 84 साल की उम्र में सबसे उम्रदराज मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने वाले प्रकाश सिंह बादल ने जब शिअद पर अपना वर्चस्व बनाया, किसी विरोधी को सिर नहीं उठाने दिया।
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पंजाब के पांच बार सीएम रहे प्रकाश सिंह बादल बेशक अब घर से कम निकलते हों पर सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर 2022 में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में वे फिर से अकाली दल के कार्यकर्ताओं में जोश भर रहे हैं। उनका दिन राजनीतिक चर्चा से शुरू होता है और अपने तजुर्बे को सुखबीर को हर कदम पर साझा करके वे उन्हें राजनीति के दांव पेंच सिखा रहे हैं।
राजनीतिक सफर को देखकर शायद उनके राजनीतिक विरोधी रश्क खाते हों पर बादल का जोश बरकरार है। अकाली दल इस बार फिर से उनको चुनाव लड़ा सकता है। बादल ने पिछले विधानसभा चुनाव में लंबी सीट से कैप्टन अमरिंदर सिंह को 22,770 मतों से हराया था। पंजाब के पांच बार पंजाब के मुख्यमंत्री रह चुके प्रकाश सिंह बादल 1970 में जब वह मुख्यमंत्री बने थे तब वह सबसे युवा सीएम थे। वर्ष 2012 में दस साल पहले उन्होंने 84 साल की उम्र में सबसे उम्रदराज मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी। राजनीति में बाबा बोहड़ के नाम से जाने वाले प्रकाश सिंह बादल ने जब शिअद पर अपना वर्चस्व बनाया, किसी विरोधी को सिर नहीं उठाने दिया।
1947 में जीता था सरपंच का चुनाव
1947 में पहली बार सरपंच का चुनाव जीतकर बादल राजनीति के मैदान में आए थे। तब उनकी उम्र महज 20 साल थी। 1957 में पहली बार वे कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा पहुंचे। इसके बाद वर्ष 1969 में उन्हें जनता ने दोबारा विधानसभा पहुंचाया। 70 के दशक में ही पहली दफा उन्हें मंत्री पद मिला और इसके बाद उनकी राजनीति का विस्तार होता चला गया। वर्ष 1970-71 में प्रकाश सिंह बादल पहली बार पंजाब के मुख्यमंत्री बनाए गए। इसके बाद उन्होंने सियासत में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। पांच बार पंजाब के सीएम बनने वाले भी बादल इकलौते नेता हैं। वह 1972, 1980 और 2002 के चुनाव में हार के बाद पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रहे हैं। प्रकाश सिंह बादल पंजाब की राजनीति में ही सक्रिय रहे, हालांकि 1977 में मोरारजी देसाई की सरकार में वे केंद्र में भी कुछ समय के लिए मंत्री रहे हैं।
हर बार लंबी सीट से लड़ते हैं चुनाव
बादल अब तक दस बार विधायक रह चुके हैं और ज्यादातर वह लंबी सीट से ही चुनाव लड़ते रहे हैं। इस बार माना जा रहा था कि सीनियर बादल चुनाव नहीं लड़ेंगे। लेकिन अकाली दल के भीतर का एक गुट इस बात के लिए जोर लगा रहा है कि प्रकाश सिंह बादल को लंबी से फिर से चुनाव लड़ाया जाना चाहिए, इसलिए सुखबीर बादल इस सीट पर प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है। 8 दिसंबर को 94 साल की आयु पूरी करने जा रहे सीनियर बादल को शिरोमणि अकाली दल लंबी विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में उतारने की तैयारी कर रहा है। दरअसल, पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर शिअद साख की रणनीति तैयार कर रहा है और बादल को मैदान में उतारने की तैयारी इसी रणनीति का हिस्सा है।
इस बार बहुत चुनौतियां
प्रकाश सिंह बादल के राजनीतिक कैरियर में इस बात की खासियत रही है कि उन्होंने किसी को सिर नहीं उठाने दिया। अकाली दल में उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती जत्थेदार गुरचरण सिंह टोहड़ा थे, जिनको एसीजीपीसी के प्रधान पद से हटवाया। इसके अलावा अकाली दल मान, अकाली दल 1920 के रवि इंद्र सिंह, दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व प्रधान मंजीत सिंह जीके, अकाली दल टकसाली के सुखदेव सिंह ढींढसा, अकाली दल डेमोक्रेटिक समेत किसी भी अकाली दल को प्रकाश सिंह बादल ने पांव नहीं जमाने दिए। लेकिन 2022 में काफी चुनौतियां हैं, जिनके लिए प्रकाश सिंह बादल सुखबीर को टिप्स दे रहे हैं। इस बार भाजपा अकाली दल के साथ चुनाव नहीं लड़ रही है और केंद्र की सत्ता में भाजपा है। अकाली दल की सरकार में हुई बेअदबी व ड्रग के मामले अभी गर्म है और अकाली दल को अभी विरोध का सामना करना पड़ता है।
रोजाना समाचार पत्र पढ़ने के बाद अपनी कोर टीम को टिप्स देते हैं बड़े बादल
प्रकाश सिंह बादल ने अपनी दिनचर्या नहीं बदली है। 94 साल के होने जा रहे प्रकाश सिंह बादल रोजाना सुबह उठकर समाचार पत्र पढ़ते हैं। इसके बाद वह अपनी कोर टीम को टिप्स देना शुरू कर देते हैं। बेटे सुखबीर सिंह बादल से कई बार फोन पर बात करते हैं, उसको दांव पेंच समझाते हैं। किसको आगे लाना है, कहां से कैसे करना है, इसके लिए प्रकाश सिंह बादल ही सुखबीर को सब समझा रहे हैं और अगली रणनीति क्या बनानी है, उसके बारे में विचार करते हैं। फिर ताजा मुद्दों पर चर्चा करने के बाद बयानबाजी जारी करते हैं।