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घी का सैंपल फेल होने पर अदालत में पेश कर दिया फर्म का नकली मालिक

Fri, 28 Feb 2020 10:09 PM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Fri, 28 Feb 2020 10:09 PM IST
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Fake owner of the firm presented in court after sample of ghee failed
पंजाब सरकार के मिशन तंदुरुस्त पंजाब के तहत मिलावटी खाद्य पदार्थ बेचने वालों पर कड़ी कार्रवाई करते हुए अधिकारी हरप्रीत सिंह सूदन ने बठिंडा के एक डिस्ट्रिीब्यूटर के खिलाफ साजिश के तहत झूठी बयानबाजी कर गुमराह करने की कोशिश के आरोप में मामला दर्ज करने का निर्देश दिया हैं। डीलर के खिलाफ थाना सदर पुलिस ने आईपीसी की धारा 191, 181 व 419 के अंतर्गत मामला दर्ज कर लिया है।
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अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (सामान्य) सूदन ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की ओर से खाद्य पदार्थ बेचने वाली दुकानों का औचक निरीक्षण कर सैंपल भरे जाते हैं जो कि जांच के लिए फूड लेबोरेट्री खरड़ में भेजे दिए जाते हैं। फेल पाए सैंपलों संबंधी शिकायत अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट की अदालत में दायर की जाती है। उन्होंने बताया कि अदालती समय के दौरान एक मामले में अशोक कुमार निवासी मेन मार्केट तलवाड़ा उपस्थित हुए, जिनका स्वास्थ्य विभाग की ओर से देसी घी का सैंपल भरा गया था और जांच में सैंपल फेल पाया गया।
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अशोक कुमार के साथ राकेश कुमार मौड़ मंडी, जिला बठिंडा व उमेश कुमार उपस्थित हुए। इस मामले की सुनवाई के दौरान राकेश कुमार ने अपने आप को सैंपल में फेल पाए देसी घी का डिस्ट्रिब्यूटर और उमेश कुमार को इसे बनाने वाली फर्म बाला जी इंडस्ट्रीज, हिसार (हरियाणा) का मालिक बताया। क्रास वेरिफाई करने पर उमेश कुमार ने माना कि वह न ही इस फर्म का मालिक है और न ही हिसार का रहने वाला है। उमेश कुमार का आईडी प्रूफ देखा गया तो वह मोहल्ला दर्जियां मुकेरियां का निवासी निकला, जिससे सच्चाई अदालत के सामने आ गई। उमेश ने बताया कि राकेश कुमार ने उसे अदालत में बतौर मालिक पेश होकर यह सब कहने के लिए कहा था। इससे साफ हो गया कि राकेश कुमार की ओर से अदालत को एक सोची समझी साजिश के अंतर्गत झूठी बयानबाजी कर गुमराह करने की कोशिश की गई व एडमिनिस्ट्रेशन आफ जस्टिस में विघ्न डाला गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए राकेश कुमार को दोषी करार देकर उसके खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया गया। इस पर फूड सेफ्टी अधिकारी रमन विरदी के बयान पर थाना सदर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
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अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट हरप्रीत सिंह सूदन ने बताया कि मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए फूड सेफ्टी एक्ट के तहत नवंबर 2019 से जनवरी 2020 तक तीन महीनों में उनकी कोर्ट में 57 केस मिलावटखोरी के केस सामने आए, जिनमें से 55 पर निर्णय लिया गया और इनको 7 लाख 90 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
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