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आतंकी तारा के साथ गहरे संबंध रहे हैं पम्मा के
सुरिंदर पाल/अमर उजाला, जालंधर
Updated Wed, 23 Dec 2015 10:09 PM IST
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पुर्तगाल में गिरफ्तार बब्बर खालसा के आतंकवादी परमजीत सिंह उर्फ पम्मा के गहरे संबंध पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के हत्यारे जगतार सिंह तारा से रहे हैं।
यही वजह है कि इस साल जुलाई में तारा की गिरफ्तारी के बाद आईबी (इंटेलिजेंस ब्यूरो), काउंटर इंटेलिजेंस की टीम व यूके की मिडलैंड पुलिस का संयुक्त अभियान पम्मा के खिलाफ चल रहा था।
पुख्ता सूचना मिलने के बाद वेस्ट मिडलैंड पुलिस व काउंटर इंटेलिजेंस और आईबी के अधिकारियों ने पुर्तगाल सरकार व वहां की एजेंसियों को पम्मा के बारे में सूचना दी, जिसके बाद वह गिरफ्त में आ गया।
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दरअसल, परमजीत सिंह पम्मा 2010 में भी गिरफ्तार किया गया था। तब वह यूके में रह रहा था। पम्मा राष्ट्रीय सिख संगत प्रमुख रूलदा सिंह की हत्या का साजिशकर्ता बताया जा रहा था।
उसके खिलाफ काउंटर इंटेलिजेंस की टीम ने सारी जानकारी जुटाकर वेस्ट मिडलैंड पुलिस यूके को दी थी, जिसके बाद 22 जुलाई 2010 को पम्मा को उसके साथियों गुरशरणबीर सिंह, प्यारा सिंह, अमृतबीर सिंह के साथ गिरफ्तार कर लिया गया था।
यूके पुलिस की एक टीम भारत आई थी लेकिन पम्मा के खिलाफ पर्याप्त सबूत न होने के कारण मिडलैंड पुलिस ने उसे छोड़ दिया था क्योंकि प्रत्यर्पण संभव नहीं था क्योंकि यूके से यह संधि नहीं है।
पम्मा मिडलैंड पुलिस से छूटने के बाद यूके से पुर्तगाल शिफ्ट हो गया और वहीं पर अपने बच्चों व परिवार सहित रह रहा था। पम्मा के यूके से शिफ्ट होने के बाद भी भारत की खुफिया एजेंसियों व यूके पुलिस ने अपना होमवर्क जारी रखा।
तारा की गिरफ्तारी के बाद पम्मा के बारे में अहम खुलासे हुए और केस काफी मजबूत बन गए और प्रत्यर्पण के लिए आशा की किरण दिखाई दे रही थी।
होमवर्क व तमाम कार्रवाई पूरी होते ही पम्मा पर दोबारा शिकंजा कस लिया गया है। सूत्रों के मुताबिक पम्मा के प्रत्यर्पण के लिए पंजाब के डीजीपी सुरेश अरोड़ा ने काम शुरू कर दिया है।
पम्मा चमकौर साहिब के निकट बख्खू बुर्ज गांव का रहने वाला है और उसके भाई राजा को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया था। आतंकवाद के दौरान ही पम्मा भारत से निकल गया था और यूके में शरण ले ली थी।
पम्मा बब्बर खालसा इंटरनेशनल से जुड़ा रहा और वहीं से उसने कट्टरपंथी लोगों को लेकर अभियान जारी रखा। आरएसएस के सिख संगत के रूलदा सिंह की हत्या का तानाबाना भी पम्मा ने यूके में ही बैठकर बुना था।
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यही वजह है कि इस साल जुलाई में तारा की गिरफ्तारी के बाद आईबी (इंटेलिजेंस ब्यूरो), काउंटर इंटेलिजेंस की टीम व यूके की मिडलैंड पुलिस का संयुक्त अभियान पम्मा के खिलाफ चल रहा था।
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पुख्ता सूचना मिलने के बाद वेस्ट मिडलैंड पुलिस व काउंटर इंटेलिजेंस और आईबी के अधिकारियों ने पुर्तगाल सरकार व वहां की एजेंसियों को पम्मा के बारे में सूचना दी, जिसके बाद वह गिरफ्त में आ गया।
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दरअसल, परमजीत सिंह पम्मा 2010 में भी गिरफ्तार किया गया था। तब वह यूके में रह रहा था। पम्मा राष्ट्रीय सिख संगत प्रमुख रूलदा सिंह की हत्या का साजिशकर्ता बताया जा रहा था।
उसके खिलाफ काउंटर इंटेलिजेंस की टीम ने सारी जानकारी जुटाकर वेस्ट मिडलैंड पुलिस यूके को दी थी, जिसके बाद 22 जुलाई 2010 को पम्मा को उसके साथियों गुरशरणबीर सिंह, प्यारा सिंह, अमृतबीर सिंह के साथ गिरफ्तार कर लिया गया था।
यूके पुलिस की एक टीम भारत आई थी लेकिन पम्मा के खिलाफ पर्याप्त सबूत न होने के कारण मिडलैंड पुलिस ने उसे छोड़ दिया था क्योंकि प्रत्यर्पण संभव नहीं था क्योंकि यूके से यह संधि नहीं है।
पम्मा मिडलैंड पुलिस से छूटने के बाद यूके से पुर्तगाल शिफ्ट हो गया और वहीं पर अपने बच्चों व परिवार सहित रह रहा था। पम्मा के यूके से शिफ्ट होने के बाद भी भारत की खुफिया एजेंसियों व यूके पुलिस ने अपना होमवर्क जारी रखा।
तारा की गिरफ्तारी के बाद पम्मा के बारे में अहम खुलासे हुए और केस काफी मजबूत बन गए और प्रत्यर्पण के लिए आशा की किरण दिखाई दे रही थी।
होमवर्क व तमाम कार्रवाई पूरी होते ही पम्मा पर दोबारा शिकंजा कस लिया गया है। सूत्रों के मुताबिक पम्मा के प्रत्यर्पण के लिए पंजाब के डीजीपी सुरेश अरोड़ा ने काम शुरू कर दिया है।
पम्मा चमकौर साहिब के निकट बख्खू बुर्ज गांव का रहने वाला है और उसके भाई राजा को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया था। आतंकवाद के दौरान ही पम्मा भारत से निकल गया था और यूके में शरण ले ली थी।
पम्मा बब्बर खालसा इंटरनेशनल से जुड़ा रहा और वहीं से उसने कट्टरपंथी लोगों को लेकर अभियान जारी रखा। आरएसएस के सिख संगत के रूलदा सिंह की हत्या का तानाबाना भी पम्मा ने यूके में ही बैठकर बुना था।