{"_id":"5a3be5c84f1c1b8d698c3090","slug":"81513874888-jalandhar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"कानून के लचीलेपन का भरपूर फायदा उठा रहे अधिकारी","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
कानून के लचीलेपन का भरपूर फायदा उठा रहे अधिकारी
Updated Thu, 21 Dec 2017 10:30 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अपने ही बैंक से की धोखाधड़ी, नहीं हो पा रही रिकवरी
कृषि विकास बैंक मैनेजर की करोड़ों की धोखाधड़ी का मामला अदालत में विचाराधीन
अमर उजाला ब्यूरो
कपूरथला।
कपूरथला कृषि विकास बैंक ने डिफाल्टरों से रकम उगराही के लिए ‘गांधीगिरी’ को अपनाया है, लेकिन इस बैंक के खुद मैनेजर ने मिलीभगत से करोड़ों रुपये की ठगी मारी है। आरोपी पर जहां थाना सिटी में केस दर्ज है और मामला अदालत में विचाराधीन हैं। वहीं आरोपी मैनेजर सस्पेंड चल रहा है।
माल रोड स्थित कृषि विकास बैंक में सितंबर 2005 से सितंबर 2012 तक भूपिंदरपाल सिंह बैंक मैनेजर थे। उन्होंने स्टाफ की मिलीभगत से उच्च अधिकारियों को धोखे में रखकर लगभग 14 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की थी। भूपिंदरपाल सिंह ने बैंक के नियमों के विपरीत जाकर नजूल लैंड के मालिकों के करोड़ों रुपये के लोन पास कर दिए।
जबकि नियम के मुताबिक नजूल लैंड के मालिक को किसी भी किसी का लोन नहीं दिया जा सकता है, परंतु मैनेजर ने इस नियमों की खूब धज्जियां उड़ाई। मैनेजर ने नजूल लैंड के 239 केसों को 7.63 करोड़ रुपये के कर्ज परवान कर दिए।
विज्ञापन
इसका पता चलते ही उच्च अधिकारी ने मैनेजर भूपिंदरपाल सिंह को सस्पेंड कर दिया। रिकवरी का एक मौका भी दिया, लेकिन आरोपों के घेरे में आया मैनेजर रिकवरी में नाकाम रहा।
मैनेजर गुरप्रेम पाल ने बताया कि आरोपी मैनेजर भूपिंदरपाल सिंह के खिलाफ 2013 में थाना सिटी में केस दर्ज कर लिया गया था। फरवरी 2017 में अदालत में चालान भी पेश हो गया है। मामला अदालत में विचाराधीन हैं। नजूल लैंड वाले मामले में अब तक महज 65 लाख रुपये की रिकवरी हुई है।
विज्ञापन
कृषि विकास बैंक मैनेजर की करोड़ों की धोखाधड़ी का मामला अदालत में विचाराधीन
अमर उजाला ब्यूरो
कपूरथला।
कपूरथला कृषि विकास बैंक ने डिफाल्टरों से रकम उगराही के लिए ‘गांधीगिरी’ को अपनाया है, लेकिन इस बैंक के खुद मैनेजर ने मिलीभगत से करोड़ों रुपये की ठगी मारी है। आरोपी पर जहां थाना सिटी में केस दर्ज है और मामला अदालत में विचाराधीन हैं। वहीं आरोपी मैनेजर सस्पेंड चल रहा है।
माल रोड स्थित कृषि विकास बैंक में सितंबर 2005 से सितंबर 2012 तक भूपिंदरपाल सिंह बैंक मैनेजर थे। उन्होंने स्टाफ की मिलीभगत से उच्च अधिकारियों को धोखे में रखकर लगभग 14 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की थी। भूपिंदरपाल सिंह ने बैंक के नियमों के विपरीत जाकर नजूल लैंड के मालिकों के करोड़ों रुपये के लोन पास कर दिए।
विज्ञापन
जबकि नियम के मुताबिक नजूल लैंड के मालिक को किसी भी किसी का लोन नहीं दिया जा सकता है, परंतु मैनेजर ने इस नियमों की खूब धज्जियां उड़ाई। मैनेजर ने नजूल लैंड के 239 केसों को 7.63 करोड़ रुपये के कर्ज परवान कर दिए।
विज्ञापन
इसका पता चलते ही उच्च अधिकारी ने मैनेजर भूपिंदरपाल सिंह को सस्पेंड कर दिया। रिकवरी का एक मौका भी दिया, लेकिन आरोपों के घेरे में आया मैनेजर रिकवरी में नाकाम रहा।
मैनेजर गुरप्रेम पाल ने बताया कि आरोपी मैनेजर भूपिंदरपाल सिंह के खिलाफ 2013 में थाना सिटी में केस दर्ज कर लिया गया था। फरवरी 2017 में अदालत में चालान भी पेश हो गया है। मामला अदालत में विचाराधीन हैं। नजूल लैंड वाले मामले में अब तक महज 65 लाख रुपये की रिकवरी हुई है।