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आस्था पर कोरोना का साया, श्री सिद्ध बाबा सोढल मेले में श्रद्धालु घटे, 20 करोड़ के कारोबार का नुकसान
Tue, 01 Sep 2020 05:54 PM IST
पंजाब ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, जालंधर (पंजाब)
Published by: पंजाब ब्यूरो
Updated Tue, 01 Sep 2020 05:54 PM IST
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श्री सिद्ध बाबा सोढल जी मेले में नतमस्तक होते श्रद्धालु।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अनंत चौदस को लगने वाले उत्तर भारत के विश्व प्रसिद्ध श्री सिद्ध बाबा सोढल जी मेले में कोरोना महामारी के चलते इस बार कम संख्या में श्रद्धालु नतमस्तक होने पहुंचे। दशकों पुराना बाबा सोढल का मेला पहली बार बिना झूलों और खिलौनों के संपन्न हुआ। मंदिर के अंदर और बाहर कहीं भी कोई लंगर और स्टॉल नहीं लगा। अनंत चौदस के दिन खेत्री तथा मटठियों की धार्मिक रस्में पूरी करने वाले श्रद्धालु ही मंदिर पहुंचे और बाबा जी का आशीर्वाद प्राप्त किया।
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कोरोना संक्रमण के कारण इस बार जिला प्रशासन ने मेला लगाने की अनुमति नहीं दी। इससे श्रद्धालु भी पहले की तरह मंदिर नहीं आए। मेले के दिन बाबा सोढल जी के दर्शन करने को श्रद्धालुओं की लंबी लाइनें लगती थीं, इस बार ऐसा कुछ नहीं हुआ। सुबह के समय कम ही संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और दोपहर बाद छोटी सी लाइनें मंदिर परिसर में लगी। उसके अलावा मंदिर के बाहर किसी तरह की कोई भीड़ नहीं थी।
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कहीं पर भी कोई झूला और खरीदारी करने वाले स्टॉल तक नहीं थे। कम ही संख्या में श्रद्धालु अपने छोटे बच्चों को मंदिर में लेकर आये। ज्यादातर बड़े लोगों ने ही मंदिर में आकर अपनी धार्मिक रस्में पूरी की। गौरतलब है कि बाबा सोढल का मेला दशकों से करीब 6 किलोमीटर के दायरे में लगता आया है। लाखों की संख्या में देश और विदेश से श्रद्धालु नतमस्तक होने आते रहे हैं।
20 करोड़ का कारोबार हुआ चौपट
विरासत और धर्म का प्रतीक तीन दिनों तक चलने वाले मेले में करीब 10 हजार परिवारों को रोजगार मिलता रहा है और लगभग 20 करोड़ रुपये का कारोबार होता रहा है। हलवाइयों से लेकर राशन, सब्जियां, डिस्पोजल क्राकरी, टेंट हाउस, बैंड बाजे, फूलों की सजावट, ट्रांसपोर्ट में बस, ऑटो एवं रिक्शा, फास्ट फूड और पारंपरिक फूड की रेहड़ियां लगाने वालों को कारोबार मिलता रहा है। कोरोना के चलते मेले में दुकानें न लगने से इस बार ऐसा कुछ नहीं हुआ।
चढ़ावा भी कम आया
श्री सिद्ध बाबा सोढल मंदिर में हर साल मेले के दिनों लाखों रुपये का चढ़ावा चढ़ता आया है। इस बार मेले की अनुमति न होने के कारण श्रद्धालुओं की संख्या कम रही। इससे चढ़ावा भी कम आया है। ट्रस्ट के अनुसार गिनती पूरी होने के बाद चढ़ावे की जानकारी दी जाएगी। उल्लेखनीय है कि साल 2014 में 35 लाख रुपये, 2015 में 36 लाख, 2016 में 38 लाख, 2017 में 40 लाख, 2018 में 42 लाख तथा 2019 में 45 लाख रुपये चढ़ावा आया था।