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कांग्रेस ने कंबोज और राय सिख बिरादरी को नजर अंदाज कर अरोड़ा बिरादरी से लिया प्रत्याशी
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जलालाबाद उपचुनाव में कांग्रेस ने राय सिख व कंबोज बिरादरी से इस बार प्रत्याशी न लेकर अरोड़ा बिरादरी से रमिंदर आंवला को चुनाव मैदान में उतारा है, ऐसा पहली बार हुआ है। जबकि अकाली दल ने राय सिख बिरादरी से राज सिंह डिब्बीपुरा और आम आदमी पार्टी ने राय सिख बिरादरी से महिंदर सिंह कचूरा को टिकट देकर चुनाव मैदान में उतारा है, वहीं कंबोज बिरादरी को किसी भी राजनीतिक पार्टी ने टिकट नहीं दिया है, कंबोज बिरादरी से कांग्रेस से बागी होकर जगदीप कंबोज गोल्डी आजाद प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं। जलालाबाद विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक वोट राय सिख बिरादरी, दूसरे नंबर पर कंबोज बिरादरी जबकि तीसरी स्थान पर अरोड़ा बिरादरी की बताई जा रही है। इस बार जलालाबाद में त्रिकोणी मुकाबला है।
सियासी जानकारों के मुताबिक पिछले लंबे समय से अरोड़ा बिरादरी विभिन्न राजनीतिक पार्टी से अपना प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारने की मांग कर रही थी, इस बार कांग्रेस ने राय सिख और कंबोज बिरादरी से प्रत्याशी न लेकर अरोड़ा बिरादरी से रमिंदर आंवला को लिया है। उपचुनाव में कांग्रेस ने अरोड़ा बिरादरी की मांग पूरी की है, लेकिन जलालाबाद में अरोड़ा बिरादरी की वोटें बहुत कम है। जानकारों का कहना है कि जलालाबाद विधानसभा चुनाव में तकरीबन दो लाख चार हजार पांच सौ वोटर हैं, इनमें राय सिख बिरादरी की लगभग 80 हजार वोटें बताई जा रही है, जबकि कंबोज बिरादरी की 45 हजार वोटें व अरोड़ा बिरादरी की लगभग तीस से पैंतीस के बीच वोटें होने की बात कही जा रही है। जलालाबाद से हार जीत का फैसला राय सिख बिरादरी की वोटों से होता है, क्योंकि ये बिरादरी एक जुट होकर एक ही राजनीतिक पार्टी की तरफ झुक जाती है, ऐसा कहा जा रहा है। इसीलिए अकाली दल और आम आदमी पार्टी ने राय सिख बिरादरी से प्रत्याशी चुना है। मालूम हो कि शिअद के अध्यक्ष सुखबीर बादल जलालाबाद में अपने प्रत्याशी राज सिंह डिब्बीपुरा के लिए कम अपने नाम से वोटें मांग रहे हैं। दूसरी तरफ आम आदमी के प्रत्याशी कचूरा के लिए उनकी पार्टी का कोई वरिष्ठ नेता चुनाव प्रचार के लिए जलालाबाद नहीं पहुंचा है। कंबोज बिरादरी को सभी राजनीतिक पार्टी ने जलालाबाद के उपचुनाव में नजरअंदाज किया है, किसी राजनीतिक पार्टी ने कंबोज बिरादरी से किसी प्रत्याशी नहीं चुना है। कंबोज बिरादरी से कांग्रेस में जगदीप कंबोज गोल्डी थे, जिन्होंने कांग्रेस टिकट की दावेदारी जताई थी लेकिन कांग्रेस ने उन्हें टिकट न देकर आंवला को टिकट दिया। इसीलिए गोल्डी ने कांग्रेस से बागी होकर आजाद प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं।
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सियासी जानकारों के मुताबिक पिछले लंबे समय से अरोड़ा बिरादरी विभिन्न राजनीतिक पार्टी से अपना प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारने की मांग कर रही थी, इस बार कांग्रेस ने राय सिख और कंबोज बिरादरी से प्रत्याशी न लेकर अरोड़ा बिरादरी से रमिंदर आंवला को लिया है। उपचुनाव में कांग्रेस ने अरोड़ा बिरादरी की मांग पूरी की है, लेकिन जलालाबाद में अरोड़ा बिरादरी की वोटें बहुत कम है। जानकारों का कहना है कि जलालाबाद विधानसभा चुनाव में तकरीबन दो लाख चार हजार पांच सौ वोटर हैं, इनमें राय सिख बिरादरी की लगभग 80 हजार वोटें बताई जा रही है, जबकि कंबोज बिरादरी की 45 हजार वोटें व अरोड़ा बिरादरी की लगभग तीस से पैंतीस के बीच वोटें होने की बात कही जा रही है। जलालाबाद से हार जीत का फैसला राय सिख बिरादरी की वोटों से होता है, क्योंकि ये बिरादरी एक जुट होकर एक ही राजनीतिक पार्टी की तरफ झुक जाती है, ऐसा कहा जा रहा है। इसीलिए अकाली दल और आम आदमी पार्टी ने राय सिख बिरादरी से प्रत्याशी चुना है। मालूम हो कि शिअद के अध्यक्ष सुखबीर बादल जलालाबाद में अपने प्रत्याशी राज सिंह डिब्बीपुरा के लिए कम अपने नाम से वोटें मांग रहे हैं। दूसरी तरफ आम आदमी के प्रत्याशी कचूरा के लिए उनकी पार्टी का कोई वरिष्ठ नेता चुनाव प्रचार के लिए जलालाबाद नहीं पहुंचा है। कंबोज बिरादरी को सभी राजनीतिक पार्टी ने जलालाबाद के उपचुनाव में नजरअंदाज किया है, किसी राजनीतिक पार्टी ने कंबोज बिरादरी से किसी प्रत्याशी नहीं चुना है। कंबोज बिरादरी से कांग्रेस में जगदीप कंबोज गोल्डी थे, जिन्होंने कांग्रेस टिकट की दावेदारी जताई थी लेकिन कांग्रेस ने उन्हें टिकट न देकर आंवला को टिकट दिया। इसीलिए गोल्डी ने कांग्रेस से बागी होकर आजाद प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं।
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