{"_id":"94-29675","slug":"Jalandhar-29675-94","type":"story","status":"publish","title_hn":"राहुल की नसीहत तार-तार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राहुल की नसीहत तार-तार
Jalandhar
Updated Sun, 04 Nov 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जालंधर। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव व सांसद राहुल गांधी की जालंधर फेरी में नेताओं को दी गई नसीहत का भी असर चंद दिनों बाद ही खत्म हो गया। हालात यह है कि दिल्ली में होने वाली रैली के लिए कांग्रेसी एक दर्जन से ज्यादा गुटों में रवाना हुए हैं।
दिल्ली में कांग्रेस की बड़ी रैली रविवार को होने जा रही है। इससे पहले पिछले दिनों राहुल गांधी जालंधर के आदमपुर में आए और नेताओं के साथ लंबी वार्ता करके चले गए, बीच-बीच में गुटबंदी के कारण हुई हार की नसीहतें भी देते रहे। इसका असर चंद दिन भी नहीं रहा। जालंधर के कांग्रेसी एकजुट नहीं बल्कि और कई गुटों में बंट गए। सांसद मोहिंदर सिंह केपी खुद पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं। जिला प्रधान अरुण वालिया अपनी अलग टीम के साथ दिल्ली रवाना हुए। कांग्रेसी पार्षद राजा व उनकी टोली अलग से निकलने की तैयारी कर रही थी। पूर्व मंत्री अवतार हेनरी अलग से अपने नेताओं के साथ दिल्ली जाने के लिए तैयार थे। जालंधर से ही कांग्रेसी एक दर्जन से अधिक गुटों में बंटकर दिल्ली रवाना हुए।
जालंधर में ही कांग्रेस कई गुटों में बंटी हुई है। पूर्व सीएम बीबी राजिंदर कौर भट्ठल के खासमखास जिला प्रधान अरुण वालिया व पीपीसीसी के सचिव वरिंदर शर्मा के पास जिले की कमान है। इस कारण कैप्टन अमरिंदर सिंह की टीम उनके सारे कार्यक्रमों में आने से गुरेज करती है। वहीं सांसद केपी अपना खेमा अलग चला रहे हैं। जालंधर वेस्ट के पार्षदों ने अपनी अलग टोली बना रखी है, जो केपी के खिलाफ खुलकर दौड़ रहे हैं। जालंधर में कैंट से चुनाव लड़ने वाले जगबीर बराड़ खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे हैं। बराड़ को पीपीपी से तोड़कर कैप्टन ने कांग्रेस ज्वाइन करवाई थी, तभी से बराड़ के विरोध में कई कांग्रेसी नेता हैं, जो कैंट से चुनाव लड़ने की तैयारी करके बैठे हुए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
दिल्ली में कांग्रेस की बड़ी रैली रविवार को होने जा रही है। इससे पहले पिछले दिनों राहुल गांधी जालंधर के आदमपुर में आए और नेताओं के साथ लंबी वार्ता करके चले गए, बीच-बीच में गुटबंदी के कारण हुई हार की नसीहतें भी देते रहे। इसका असर चंद दिन भी नहीं रहा। जालंधर के कांग्रेसी एकजुट नहीं बल्कि और कई गुटों में बंट गए। सांसद मोहिंदर सिंह केपी खुद पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं। जिला प्रधान अरुण वालिया अपनी अलग टीम के साथ दिल्ली रवाना हुए। कांग्रेसी पार्षद राजा व उनकी टोली अलग से निकलने की तैयारी कर रही थी। पूर्व मंत्री अवतार हेनरी अलग से अपने नेताओं के साथ दिल्ली जाने के लिए तैयार थे। जालंधर से ही कांग्रेसी एक दर्जन से अधिक गुटों में बंटकर दिल्ली रवाना हुए।
विज्ञापन
जालंधर में ही कांग्रेस कई गुटों में बंटी हुई है। पूर्व सीएम बीबी राजिंदर कौर भट्ठल के खासमखास जिला प्रधान अरुण वालिया व पीपीसीसी के सचिव वरिंदर शर्मा के पास जिले की कमान है। इस कारण कैप्टन अमरिंदर सिंह की टीम उनके सारे कार्यक्रमों में आने से गुरेज करती है। वहीं सांसद केपी अपना खेमा अलग चला रहे हैं। जालंधर वेस्ट के पार्षदों ने अपनी अलग टोली बना रखी है, जो केपी के खिलाफ खुलकर दौड़ रहे हैं। जालंधर में कैंट से चुनाव लड़ने वाले जगबीर बराड़ खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे हैं। बराड़ को पीपीपी से तोड़कर कैप्टन ने कांग्रेस ज्वाइन करवाई थी, तभी से बराड़ के विरोध में कई कांग्रेसी नेता हैं, जो कैंट से चुनाव लड़ने की तैयारी करके बैठे हुए थे।
विज्ञापन