{"_id":"24959","slug":"Jalandhar-24959-94","type":"story","status":"publish","title_hn":"फैसले के मुताबिक खुद को नहीं ढाल सका शिक्षा विभाग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फैसले के मुताबिक खुद को नहीं ढाल सका शिक्षा विभाग
Jalandhar
Updated Sun, 17 Jun 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
जालंधर। राज्य के शिक्षा विभाग ने अपनी कमजोरी को छिपाने के लिए विद्यार्थियों के भविष्य को दांव पर लगा दिया है। विभाग ने दो साल पहले विद्यार्थियों को बेस मजबूत करने के लिए बोर्ड की कक्षाओं में सेमेस्टर सिस्टम लागू किया था, लेकिन खुद की नाकामी के कारण अब सेमेस्टर सिस्टम को ही रद कर दिया है। इसकी अधिकारिक घोषणा राज्य के शिक्षा मंत्री सिकंदर सिंह मलूका ने कर दी है।
विद्यार्थियों में बढ़ रहे प्रोफेशनल कोर्सों में दाखिले के चलन को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा विभाग व पंजाब स्कूल एजूकेशन बोर्ड ने 10वीं व 12वीं में दो साल पहले सेमेस्टर सिस्टम को लागू किया था। विभाग का मानना था कि सेमेस्टर सिस्टम स्कूलों में होना जरूरी है, क्योंकि स्कूल से निकलकर अधिकतर विद्यार्थी प्रोफेशनल कोर्सों में दाखिला लेते हैं। कई विद्यार्थी कालेज शिक्षा के लिए समय के साथ खुद को सेमेस्टर प्रणाली में नहीं ढाल पाते। इस कारण स्कूली स्तर पर सेमेस्टर प्रणाली लागू करके उन विद्यार्थियों को काफी सहायता मिलेगी।
इस फैसले के बाद विद्यार्थियों ने विभाग के फैसले के मुताबिक खुद को ढालना शुरू कर दिया, लेकिन विभाग खुद को अपने फैसले के मुताबिक नहीं ढाल सका। सेमेस्टर सिस्टम लागू होने के बाद शिक्षा विभाग की परेशानियां औैर भी बढ़ गईं। कभी नतीजा लेट होने लगा तो कभी किताबों की कमी। यहां तक की अध्यापकों पर सिलेबस समाप्त करवाने की परेशानी भी बढ़ गई।
विज्ञापन
क्या कहते हैं प्रिंसिपल
शिक्षा विभाग खुद को अपने फैसले के मुताबिक ढाल नहीं सका है। शिक्षा मंत्री ने सही फैसला लिया है, लेकिन इससे विद्यार्थियों का बेस कमजोर होने की परेशानी पेश आएगी। उन्होंने कहा कि विभाग को दोबारा सेमेस्टर सिस्टम को योजना बनानी चाहिए, लेकिन खुद को मजबूत करके।
बीबी शर्मा, प्रिंसिपल डीएवी कालेज
यह फैसला एक साल देरी से लिया गया है। विभाग सेमेस्टर सिस्टम को लागू करने में फेल हुआ है। इसलिए यह जरूरी था कि इस रद कर दिया जाए।
डा. जसपाल सिंह रंधावा,प्रिंसिपल,लायलपुर खालसा कालेज
विज्ञापन
विद्यार्थियों में बढ़ रहे प्रोफेशनल कोर्सों में दाखिले के चलन को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षा विभाग व पंजाब स्कूल एजूकेशन बोर्ड ने 10वीं व 12वीं में दो साल पहले सेमेस्टर सिस्टम को लागू किया था। विभाग का मानना था कि सेमेस्टर सिस्टम स्कूलों में होना जरूरी है, क्योंकि स्कूल से निकलकर अधिकतर विद्यार्थी प्रोफेशनल कोर्सों में दाखिला लेते हैं। कई विद्यार्थी कालेज शिक्षा के लिए समय के साथ खुद को सेमेस्टर प्रणाली में नहीं ढाल पाते। इस कारण स्कूली स्तर पर सेमेस्टर प्रणाली लागू करके उन विद्यार्थियों को काफी सहायता मिलेगी।
विज्ञापन
इस फैसले के बाद विद्यार्थियों ने विभाग के फैसले के मुताबिक खुद को ढालना शुरू कर दिया, लेकिन विभाग खुद को अपने फैसले के मुताबिक नहीं ढाल सका। सेमेस्टर सिस्टम लागू होने के बाद शिक्षा विभाग की परेशानियां औैर भी बढ़ गईं। कभी नतीजा लेट होने लगा तो कभी किताबों की कमी। यहां तक की अध्यापकों पर सिलेबस समाप्त करवाने की परेशानी भी बढ़ गई।
विज्ञापन
क्या कहते हैं प्रिंसिपल
शिक्षा विभाग खुद को अपने फैसले के मुताबिक ढाल नहीं सका है। शिक्षा मंत्री ने सही फैसला लिया है, लेकिन इससे विद्यार्थियों का बेस कमजोर होने की परेशानी पेश आएगी। उन्होंने कहा कि विभाग को दोबारा सेमेस्टर सिस्टम को योजना बनानी चाहिए, लेकिन खुद को मजबूत करके।
बीबी शर्मा, प्रिंसिपल डीएवी कालेज
यह फैसला एक साल देरी से लिया गया है। विभाग सेमेस्टर सिस्टम को लागू करने में फेल हुआ है। इसलिए यह जरूरी था कि इस रद कर दिया जाए।
डा. जसपाल सिंह रंधावा,प्रिंसिपल,लायलपुर खालसा कालेज