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बाबा फरीद यूनिवर्सिटी का 100 नर्सिंग कॉलेजों को नोटिस
Updated Sat, 14 Jul 2018 10:25 PM IST
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बाबा फरीद यूनिवर्सिटी का 100 नर्सिंग कॉलेजों को नोटिस
फरीदकोट। बाबा फरीद मेडिकल यूनिवर्सिटी ने कई तरह का खामियों के चलते राज्य के 109 नर्सिंग कॉलेजों में से 100 कॉलेजों को नोटिस जारी कर दिया है। इन 100 में से 47 कॉलेज को ऐसे है जिन्होंने पिछले तीन साल से यूनिवर्सिटी को वार्षिक एफिलिएशन फीस, निरीक्षण फीस, एंडॉवमेंट फंड, वार्षिक प्रशासनिक व्यय शुल्क और कई अन्य खर्चों का भुगतान तक नहीं किया है। ऐसे कॉलेजों की मान्यता को लेकर खतरा पैदा हो गया है। बार बार परिपत्रों के बावजूद भुगतान न देने वाले डिफाल्टर कॉलेजों के नाम भी सार्वजनिक कर दिए हैं और पंजाब के इन कॉलेजों की तरफ यूनिवर्सिटी का करीब चार करोड़ बकाया खड़ा है। यूनिवर्सिटी प्रशासन के मुताबिक राज्य में 109 नर्सिंग कॉलेजों में से ज्यादातर कॉलेजों के पास बुनियादी ढांचे की कमी है और वह भारतीय नर्सिंग काउंसिल नई दिल्ली के मानदंडों के अनुसार काम नहीं कर रहे हैं। प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपलों के कम अनुभव, शिक्षण स्टाफ की कमी, पुस्तकालयों में कम संख्या में किताबें समेत बच्चों को ट्रेनिंग के लिए अस्पताल तक भी आभाव है। ऐसे में 100 कॉलेजों को नोटिस जारी किया गया है। संसाधनों के आभाव की वजह से इन कॉलेजों में 50 फीसदी से ज्यादा सीटें खाली रह जाती हैं।
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फरीदकोट। बाबा फरीद मेडिकल यूनिवर्सिटी ने कई तरह का खामियों के चलते राज्य के 109 नर्सिंग कॉलेजों में से 100 कॉलेजों को नोटिस जारी कर दिया है। इन 100 में से 47 कॉलेज को ऐसे है जिन्होंने पिछले तीन साल से यूनिवर्सिटी को वार्षिक एफिलिएशन फीस, निरीक्षण फीस, एंडॉवमेंट फंड, वार्षिक प्रशासनिक व्यय शुल्क और कई अन्य खर्चों का भुगतान तक नहीं किया है। ऐसे कॉलेजों की मान्यता को लेकर खतरा पैदा हो गया है। बार बार परिपत्रों के बावजूद भुगतान न देने वाले डिफाल्टर कॉलेजों के नाम भी सार्वजनिक कर दिए हैं और पंजाब के इन कॉलेजों की तरफ यूनिवर्सिटी का करीब चार करोड़ बकाया खड़ा है। यूनिवर्सिटी प्रशासन के मुताबिक राज्य में 109 नर्सिंग कॉलेजों में से ज्यादातर कॉलेजों के पास बुनियादी ढांचे की कमी है और वह भारतीय नर्सिंग काउंसिल नई दिल्ली के मानदंडों के अनुसार काम नहीं कर रहे हैं। प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपलों के कम अनुभव, शिक्षण स्टाफ की कमी, पुस्तकालयों में कम संख्या में किताबें समेत बच्चों को ट्रेनिंग के लिए अस्पताल तक भी आभाव है। ऐसे में 100 कॉलेजों को नोटिस जारी किया गया है। संसाधनों के आभाव की वजह से इन कॉलेजों में 50 फीसदी से ज्यादा सीटें खाली रह जाती हैं।