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पंजाब के ‘मिनी श्रीलंका’ का संपर्क देश-दुनिया से टूटा
Updated Sat, 14 Jul 2018 10:32 PM IST
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पंजाब के ‘मिनी श्रीलंका’ का संपर्क देश से टूटा
सुल्तानपुर लोधी के मंड एरिया के 14 गांवों की जिंदगी चलेगी किश्ती के सहारे
तीन माह के लिए दरिया ब्यास पर लगा अस्थायी पैंटून पुल हटा
अमर उजाला ब्यूरो
कपूरथला। पंजाब के ‘मिनी श्रीलंका’ का संपर्क देश से कट गया है। सुल्तानपुर लोधी के मंड एरिया के 14 गांव के बाशिंदे अब किश्ती के सहारे जिंदगी चलाएंगे। क्योंकि दरिया ब्यास पर बने अस्थायी पैंटून पुल को पीडब्ल्यूडी की ओर से हटा दिया गया है। मानसून के सीजन में हर साल लगभग तीन माह के लिए इस पुल को समेट लिया जाता है। अब दरिया पार करने के लिए लोगों को तीन महीने किश्ती का सहारा लेना पड़ेगा। इन गांवों की करीब 9 हजार लोगों को इलाके से बाहर जाने के लिए अब कोई भी सहारा नहीं बचा है।
सुल्तानपुर लोधी के 14 गांव दरिया ब्यास से घिरे हैं। वहीं तरनतारन के भी कुछ गांव दरिया में बसे हैं। इन गांवों में रहने वाले लोगों की सुविधा के लिए पीडब्ल्यूडी सुल्तानपुर लोधी ने अस्थाई पैंटून पुल की व्यवस्था कर रखी है। मानसून सीजन में जेसीबी की मदद से पुल को समेट लिया गया। दस मीटर की लंबाई वाले करीब 25 पैंटून को जोड़कर अस्थायी पुल खड़ा किया जाता है, जिन पर से दरिया में बसे गांवों के करीब 9 हजार लोग आते-जाते हैं। अब पुल हटने के बाद उनके लिए पार जाने का सहारा किश्ती ही है, लेकिन ब्यास दरिया में मानसून सीजन के दौरान पानी उफान पर आ जाता है। ऐसे में किश्ती का सफर काफी खतरनाक साबित होता है। कुछ अर्से पहले तरनतारन से सुल्तानपुर लोधी के समीपवर्ती गांव में आयोजित वार्षिक मेले में शामिल होने कुछ लोग किश्ती से आ रहे थे। किश्ती पलटने से उनकी मौत हो गई थी। उस समय भी पैंटून पुल हटाया हुआ था। दरिया ब्यास के गांव लक्खवरिया पत्तन पर पैंटून पुल लगता है। दरिया के उफान पर होने के चलते पैंटून पुल के बहने का खतरा बना रहता है। ऐसे में जुलाई से सितंबर तक पैंटून पुल हटा लिया जाता है।
बच्चों की पढ़ाई हुई बाधित
एसडीओ के मुताबिक दरिया ब्यास में 14 गांव घिरे हैं। जिनमें से कुछ बेचिराग गांव भी हैं। सुल्तानपुर लोधी से करीब नौ किलोमीटर दूर दरिया ब्यास का क्षेत्र शुरू हो जाता है। इस दरिया में बसे गांव टापू की तरह हैं। इस एरिया में एक स्कूल है, जहां पर बच्चे तो हैं, लेकिन इनको पढ़ाने के लिए टीचर को दरिया पार करके जाना पड़ता है। अब गांव बाऊपुर सांगरा, मंड बाऊपुर, बाऊपुर नया, कंगड़ा, मुहमदाबाद, रामपुर गोढ़ा, भैणीकादर बख्श, भैनी बहादुर, बाउपुर पुराना, पद्दू नया और किशनपुर घड़ता का संपर्क बाहरी दुनिया से कट गया है। पैंटून पुल के बंद हो जाने के कारण इस इलाके के 14 गांवों के कई विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई को बीच में ही रोकना पड़ेगा, क्योंकि इस क्षेत्र में माध्यमिक स्कूल से अधिक कोई स्कूल नहीं हैं और यहां के विद्यार्थी इस पुल से ही सुल्तानपुर लोधी, कपूरथला आदि में उच्च शिक्षा हासिल करने जाते हैं। अब सभी विद्यार्थी दरिया के किनारे बैठ कर ही वक्त गुजारने को मजबूर होंगे।
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सुल्तानपुर लोधी के मंड एरिया के 14 गांवों की जिंदगी चलेगी किश्ती के सहारे
तीन माह के लिए दरिया ब्यास पर लगा अस्थायी पैंटून पुल हटा
अमर उजाला ब्यूरो
कपूरथला। पंजाब के ‘मिनी श्रीलंका’ का संपर्क देश से कट गया है। सुल्तानपुर लोधी के मंड एरिया के 14 गांव के बाशिंदे अब किश्ती के सहारे जिंदगी चलाएंगे। क्योंकि दरिया ब्यास पर बने अस्थायी पैंटून पुल को पीडब्ल्यूडी की ओर से हटा दिया गया है। मानसून के सीजन में हर साल लगभग तीन माह के लिए इस पुल को समेट लिया जाता है। अब दरिया पार करने के लिए लोगों को तीन महीने किश्ती का सहारा लेना पड़ेगा। इन गांवों की करीब 9 हजार लोगों को इलाके से बाहर जाने के लिए अब कोई भी सहारा नहीं बचा है।
सुल्तानपुर लोधी के 14 गांव दरिया ब्यास से घिरे हैं। वहीं तरनतारन के भी कुछ गांव दरिया में बसे हैं। इन गांवों में रहने वाले लोगों की सुविधा के लिए पीडब्ल्यूडी सुल्तानपुर लोधी ने अस्थाई पैंटून पुल की व्यवस्था कर रखी है। मानसून सीजन में जेसीबी की मदद से पुल को समेट लिया गया। दस मीटर की लंबाई वाले करीब 25 पैंटून को जोड़कर अस्थायी पुल खड़ा किया जाता है, जिन पर से दरिया में बसे गांवों के करीब 9 हजार लोग आते-जाते हैं। अब पुल हटने के बाद उनके लिए पार जाने का सहारा किश्ती ही है, लेकिन ब्यास दरिया में मानसून सीजन के दौरान पानी उफान पर आ जाता है। ऐसे में किश्ती का सफर काफी खतरनाक साबित होता है। कुछ अर्से पहले तरनतारन से सुल्तानपुर लोधी के समीपवर्ती गांव में आयोजित वार्षिक मेले में शामिल होने कुछ लोग किश्ती से आ रहे थे। किश्ती पलटने से उनकी मौत हो गई थी। उस समय भी पैंटून पुल हटाया हुआ था। दरिया ब्यास के गांव लक्खवरिया पत्तन पर पैंटून पुल लगता है। दरिया के उफान पर होने के चलते पैंटून पुल के बहने का खतरा बना रहता है। ऐसे में जुलाई से सितंबर तक पैंटून पुल हटा लिया जाता है।
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बच्चों की पढ़ाई हुई बाधित
एसडीओ के मुताबिक दरिया ब्यास में 14 गांव घिरे हैं। जिनमें से कुछ बेचिराग गांव भी हैं। सुल्तानपुर लोधी से करीब नौ किलोमीटर दूर दरिया ब्यास का क्षेत्र शुरू हो जाता है। इस दरिया में बसे गांव टापू की तरह हैं। इस एरिया में एक स्कूल है, जहां पर बच्चे तो हैं, लेकिन इनको पढ़ाने के लिए टीचर को दरिया पार करके जाना पड़ता है। अब गांव बाऊपुर सांगरा, मंड बाऊपुर, बाऊपुर नया, कंगड़ा, मुहमदाबाद, रामपुर गोढ़ा, भैणीकादर बख्श, भैनी बहादुर, बाउपुर पुराना, पद्दू नया और किशनपुर घड़ता का संपर्क बाहरी दुनिया से कट गया है। पैंटून पुल के बंद हो जाने के कारण इस इलाके के 14 गांवों के कई विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई को बीच में ही रोकना पड़ेगा, क्योंकि इस क्षेत्र में माध्यमिक स्कूल से अधिक कोई स्कूल नहीं हैं और यहां के विद्यार्थी इस पुल से ही सुल्तानपुर लोधी, कपूरथला आदि में उच्च शिक्षा हासिल करने जाते हैं। अब सभी विद्यार्थी दरिया के किनारे बैठ कर ही वक्त गुजारने को मजबूर होंगे।
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