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बरगाड़ी बेअदबी व गोलीकांड पर राजनीति गरमाई, कांग्रेस में कार्यवाही का क्रेडिट लेने की होड
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बरगाड़ी बेअदबी व गोलीकांड पर राजनीति गरमाई
कांग्रेस में कार्रवाई का क्रेडिट लेने की होड़
14 मई को अनाज मंडी बरगाड़ी में आयोजित होगी कैप्टन अमरिंदर सिंह की जनसभा
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदकोट। साढ़े तीन साल पुराने बरगाड़ी बेअदबी मामले व उससे संबंधित बहिबल कलां व कोटकपूरा गोलीकांड मामले को लेकर फरीदकोट की राजनीति इन दिनों काफी गरमाई हुई है। इन घटनाओं में कार्रवाई न किए जाने के चलते सिख जत्थेबंदियों द्वारा पहले से ही शिरोमणि अकाली दल का विरोध किया जा रहा था और अब लोकसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस ने भी शिअद की घेराबंदी शुरू कर दी है। कांग्रेस का आरोप है कि इन घटनाओं के आरोपियों को शिअद ने बचाव किया था, जबकि उनकी सरकार ने इन आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करवा दी है। कांग्रेस में इस बात का क्रेडिट लेने की होड़ लग गई है और उसने चुनाव को ध्यान में रखते हूए बरगाड़ी की अनाज मंडी में राज्य के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई में विशाल जनसभा करने की तैयारी शुरू कर दी है। अगर कोई फेरबदल न हुआ तो रैली के लिए कांग्रेस ने 14 मई की तारीख तय की है।
जानकारी के अनुसार बरगाड़ी बेअदबी का मामला 12 अक्टूबर 2015 को पेश आया था और इस घटना के विरोध में सिख जत्थेबंदियों द्वारा जगह जगह रोष प्रदर्शन व धरने लगाए गए। इन्हीं धरने में शामिल कोटकपूरा व बहिबल कलां में 14 अक्टूबर 2015 को पुलिस बल का उपयोग किया गया और बहिबल कलां गोलीकांड मामले में दो सिख नौजवानों किशन भगवान सिंह व गुरजीत सिंह की मौत हो गई। उस समय की अकाली दल सरकार ने बेअदबी मामले की जांच तो सीबीआई के हवाले कर दी, जबकि गोलीकांड घटनाओं की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया। दोनों ही एजेंसियों की लंबी पड़ताल के बावजूद ना तो बेअदबी करने वाले आरोपियों के चेहरे बेनकाब हुए और ना ही गोली चलाने वाले पुलिस अधिकारियों का बाल बांका हो पाया। अकाली सरकार के समय ही न्यायिक जांच करने वाले जस्टिस जोरा सिंह आयोग की रिपोर्ट भी सार्वजनिक नहीं की गई। साल 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में कांग्रेस सरकार बनीं और मुख्यमंत्री ने इन घटनाओं की जांच के लिए जस्टिस रणजीत सिंह आयोग का गठन किया। इसी आयोग की रिपोर्ट सामने आने से पहले ही एसआईटी ने बरगाड़ी बेअदबी मामले में डेरा सच्चा सौदा सिरसा के अनुयायियों का हाथ होने का खुलासा किया और करीब 11 आरोपियों को गिरफ्तार करके जांच रिपोर्ट सीबीआई के हवाले कर दी। वहीं गोलीकांड की घटनाओं के जांच के लिए गठित एसआईटी ने मोगा के पूर्व एसएसपी चरनजीत सिंह शर्मा व आईजी परमराज सिंह उमरानंगल जैसे बड़े पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तार किया है और कोटकपूरा गोलीकांड मामले में शिअद के पूर्व विधायक मनतार सिंह बराड़ को भी नामजद किया है। अब कांग्रेस द्वारा सरकार के कार्यकाल में बेअदबी मामले में बेनकाब हुए आरोपियों और गोलीकांड मामलों में पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तारी समेत शिअद के पूर्व विधायक को नामजद करने का क्रेडिट लेने का प्रयास किया जा रहा है। क्रेडिट लेने की रणनीति के तहत ही कांग्रेस ने बरगाड़ी की उसी अनाज मंडी में संभवत 14 मई को जनसभा करने की तैयारी की है जहां पर पिछले साल सिख जत्थेबंदियों द्वारा लगातार छह माह तक इंसाफ मोर्चा लगाकर शिअद अकाली दल व बादल परिवार की व्यापक स्तर पर घेराबंदी की थी।
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कांग्रेस में कार्रवाई का क्रेडिट लेने की होड़
14 मई को अनाज मंडी बरगाड़ी में आयोजित होगी कैप्टन अमरिंदर सिंह की जनसभा
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदकोट। साढ़े तीन साल पुराने बरगाड़ी बेअदबी मामले व उससे संबंधित बहिबल कलां व कोटकपूरा गोलीकांड मामले को लेकर फरीदकोट की राजनीति इन दिनों काफी गरमाई हुई है। इन घटनाओं में कार्रवाई न किए जाने के चलते सिख जत्थेबंदियों द्वारा पहले से ही शिरोमणि अकाली दल का विरोध किया जा रहा था और अब लोकसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस ने भी शिअद की घेराबंदी शुरू कर दी है। कांग्रेस का आरोप है कि इन घटनाओं के आरोपियों को शिअद ने बचाव किया था, जबकि उनकी सरकार ने इन आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करवा दी है। कांग्रेस में इस बात का क्रेडिट लेने की होड़ लग गई है और उसने चुनाव को ध्यान में रखते हूए बरगाड़ी की अनाज मंडी में राज्य के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई में विशाल जनसभा करने की तैयारी शुरू कर दी है। अगर कोई फेरबदल न हुआ तो रैली के लिए कांग्रेस ने 14 मई की तारीख तय की है।
जानकारी के अनुसार बरगाड़ी बेअदबी का मामला 12 अक्टूबर 2015 को पेश आया था और इस घटना के विरोध में सिख जत्थेबंदियों द्वारा जगह जगह रोष प्रदर्शन व धरने लगाए गए। इन्हीं धरने में शामिल कोटकपूरा व बहिबल कलां में 14 अक्टूबर 2015 को पुलिस बल का उपयोग किया गया और बहिबल कलां गोलीकांड मामले में दो सिख नौजवानों किशन भगवान सिंह व गुरजीत सिंह की मौत हो गई। उस समय की अकाली दल सरकार ने बेअदबी मामले की जांच तो सीबीआई के हवाले कर दी, जबकि गोलीकांड घटनाओं की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया। दोनों ही एजेंसियों की लंबी पड़ताल के बावजूद ना तो बेअदबी करने वाले आरोपियों के चेहरे बेनकाब हुए और ना ही गोली चलाने वाले पुलिस अधिकारियों का बाल बांका हो पाया। अकाली सरकार के समय ही न्यायिक जांच करने वाले जस्टिस जोरा सिंह आयोग की रिपोर्ट भी सार्वजनिक नहीं की गई। साल 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में कांग्रेस सरकार बनीं और मुख्यमंत्री ने इन घटनाओं की जांच के लिए जस्टिस रणजीत सिंह आयोग का गठन किया। इसी आयोग की रिपोर्ट सामने आने से पहले ही एसआईटी ने बरगाड़ी बेअदबी मामले में डेरा सच्चा सौदा सिरसा के अनुयायियों का हाथ होने का खुलासा किया और करीब 11 आरोपियों को गिरफ्तार करके जांच रिपोर्ट सीबीआई के हवाले कर दी। वहीं गोलीकांड की घटनाओं के जांच के लिए गठित एसआईटी ने मोगा के पूर्व एसएसपी चरनजीत सिंह शर्मा व आईजी परमराज सिंह उमरानंगल जैसे बड़े पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तार किया है और कोटकपूरा गोलीकांड मामले में शिअद के पूर्व विधायक मनतार सिंह बराड़ को भी नामजद किया है। अब कांग्रेस द्वारा सरकार के कार्यकाल में बेअदबी मामले में बेनकाब हुए आरोपियों और गोलीकांड मामलों में पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तारी समेत शिअद के पूर्व विधायक को नामजद करने का क्रेडिट लेने का प्रयास किया जा रहा है। क्रेडिट लेने की रणनीति के तहत ही कांग्रेस ने बरगाड़ी की उसी अनाज मंडी में संभवत 14 मई को जनसभा करने की तैयारी की है जहां पर पिछले साल सिख जत्थेबंदियों द्वारा लगातार छह माह तक इंसाफ मोर्चा लगाकर शिअद अकाली दल व बादल परिवार की व्यापक स्तर पर घेराबंदी की थी।
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