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93 बिल्डिंग व कालोनियों की जांच के लिए हाई पावर कमेटी का गठन

Sat, 30 Jun 2018 10:04 PM IST
Updated Sat, 30 Jun 2018 10:04 PM IST
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93 बिल्डिंग व कालोनियों की जांच के लिए हाई पावर कमेटी का गठन
93 बिल्डिंग और कालोनियों की जांच के लिए हाई पावर कमेटी गठित
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तीन अधिकारी जांच के दायरे में,
जालंधर। निगम निगम में नौ अधिकारियों के सस्पेंड होने के बाद अफरातफरी वाला माहौल पैदा हो गया है। वहीं निकायमंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की ओर से 93 इमारतों व कालोनियों की सूची जालंधर भेज दी गई है। इसकी जांच व जिम्मेदारी फिक्स करने के लिए एक हाई पावर कमेटी का गठन कर दिया गया है। यह कमेटी इन इमारतों की जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट निकायमंत्री को सौंपेगी। वहीं सिद्धू के आदेशों में से तीन नाम गायब होने को लेकर दिन भर चर्चा होती रही।
निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने 14 जून को जालंधर में अवैध कालोनियों और अवैध इमारतों का दौरा करने के बाद बिल्डिंग विभाग के 8 अफसरों को सस्पेंड किया था। दो को चार्जशीट किया। शुक्रवार को जारी सस्पेंशन लेटर में तीन अफसरों के नाम ही बदल दिए गए जिसमें एसटीपी मोनिका आनंद, एसटीपी परमपाल सिंह, एमटीपी मेहरबान सिंह, एटीपी बलविंदर सिंह, एटीपी नरेश मेहता, एटीपी बांके बिहारी, इंस्पेक्टर अरुण खन्ना, इंस्पैक्टर वरिंदर कौर और एडीएफओ केएल अरोड़ा को सस्पेंड किया गया है। इनके खिलाफ आरोप है कि शहर में अवैध कालोनियों और निर्माण को होने दिया। सिद्धू ने 14 जून को जालंधर दौरे के दौरान प्रेस कांफ्रेंस कर एसटीपी मोनिका आनंद, एसटीपी परमपाल सिंह, एमटीपी मेहरबान सिंह, एटीपी बलविंदर सिंह, एटीपी नरेश मेहता, इंस्पैक्टर नीरज शर्मा, इंस्पैक्टर अजीत शर्मा और इंस्पैक्टर पूजा मान को मौके पर ही सस्पेंड कर दिया था। अब सस्पेंशन लेटर में से इंस्पेक्टर अजीत शर्मा, नीरज शर्मा और पूजा मान का नाम ही नहीं है। सूत्रों का कहना है कि इन तीन इंस्पेक्टरों को विधायकों के दबाव में सस्पेंड नहीं किया गया। वहीं इंस्पेक्टर अरुण खन्ना और राजिंदर शर्मा को चार्जशीट किया गया था लेकिन अब सस्पेंशन लेटर में इंस्पेक्टर अरुण खन्ना को सस्पेंड किया गया है।
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पता चला है कि 14 से लेकर 28 जून तक इन अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिक जांच विभागीय अधिकारियों की ओर से बारीकी से की गई। अब सिद्धू ने चंडीगढ़ से 93 इमारतों व बिल्डिंगों की सूची निगम को भेज दी है। इसकी उच्चस्तरीय जांच व कार्रवाई के लिए आदेश दिए गए हैं। इन 93 इमारतों व कालोनियों की अगर बारीकी से जांच हुई तो निश्चित तौर पर नगर निगम के कई अन्य अधिकारियों पर गाज गिरेगी।
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